अब पुलिस लीलावती निलेश और जय को आतंकवादी तांत्रिक समझ रहे थे । वहीं पूरा भारत उन्हें चोर मक्कार कला जादू करने वाला कहते हे । अभी तो फिलहाल वह सुरक्षित थे । पर ऑफिसर प्रशांत अभी भी उन्हें ढूंढ रहे थे । वहीं मरे हुए मोर में से भ्रम राक्षस का अंश बाहर आ गया था और धीरे धीरे विकराल रूप ले रहा था । ये सब जय अपनी दिव्य दृष्टि से देख रहा था क्योंकि उसके पास अब भ्रम राक्षस की पावर थी । निलेश जय से कहता हे कि तू भ्रम राक्षस के मन में देख क्या हे उसका अतीत पता कर । जय वही करता हे जय ध्यान लगता हे जय के आंखों का बिंदु येलो कलर का हो गया था । जय देखता हे कि 2025 में एक साइंटिस्ट अपनी खोज के लिए एकगुफा के अंदर पहुंच जाते । वहीं उन्हें वह भ्रम राक्षस दिखता है साइंटिस्ट उससे कंट्रोल करना चाहते थे । इस लिए वह उससे एक यंत्र में कैद कर लेते हे । और उससे पावर पाने के लिए उससे अपनी बॉडी में इंजेक्ट करते हे । पर वह भ्रम राक्षस उसके शरीर से जुड़ जाता हे और पूरी तरह से काबू पा लेता हे । पर अभी भी वह उस गुफा से बाहर नहीं निकल सकता क्यों कि उससे सतयुग में ऋषि मुनि ने श्राप दिया था । की जब तक कोई पवित्र लड़की अपने मुंह से ये कह दे कि तुम आजाद हो । तब तक तू उस गुफा से नहीं निकल सकता । उसके कुछी दिनों के बाद रिया जो पार्थ की पड़ोसी थी वह घूमते घूमते वहां पहुंच जाती हे भ्रम राक्षस चालाकी से एक बुजुर्ग का रूप ले लेता हे और उससे वह बुलाता हे । और कहता हे कि बेटा मुझे यहां से निकालो । रिया आवाज सुन कर गुफा में जाती हे । राक्षस उससे कहता हे कि बेटा तुम मुझे बाहर ऐसे ही नहीं निकाल सकती तुम्हे अपने मुहब्से बोलना होगा कि में यहां से निकल जाऊ तभी में यह से निकल पाऊं गा । रिया सोच में पड़ जाती हे कि ऐसा कैसे हो सकता हे । पर वह बुजुर्ग का मान रखने के लिए बोल देती हे । और वहीं उसके जीवन की सबसे खतरनाक गलती होती हे । आखिरी गलती होती हे भ्रम राक्षस हंसने लगता हे । और रिया को अपना असली रूप दिखता हे । रिया डर कर गुफा से बाहर आती हे । वहीं वह भ्रम राक्षस 1994 के बाद पहली बार उस गुफा से बाहर आया । और बोला सालों पहले उस गोरिला ने मुझे पीटा था(iski Puri story alag se ek kahani me likhi he jiska name he great gorila vs bhram rakshash) अब कोई नहीं रोक सकता मुझे । और वह राक्षस रिया को हवा में उड़ता हे । उसके शरीर की हड्डियां तोड़ देता हे और बिचारी रिया वही पर मर जाती हे । वहीं से पार्थ जा रहा होता हे । और वह रिया की बॉडी को देखता हे और वहीं से ये सारी समस्या शुरू हो जाती हे । अब जय दिव्य दृष्टि से बाहर आता हे और बहुत ही उदास होता हे और सारी बात निलेश को बताता हे । और उससे ये बताता हे कि साइंटिस्ट और कोई नहीं उसी के पिता हे जो गायब हो गए थे । जय की आंखों में आंसू थे । तभी राक्षस का अंश उस पर हमला कर देता हे । निलेश उससे खींच कर बचा लेता हे । लीलावती अपने शक्तियों का प्रयोग करती हे पर कोई फायदा नहीं होता ।तभी वहा एक गोरिला राक्षस के अंश पर हमला करता हे। ये गोरिला 1994 में मरे गए द ग्रेट गोरिला का बेटा था । वह तीनों बच कर भाग जाते हे । गोरिला राक्षस के अंश को रोक लेता हे । और उससे उठा उठा कर पटक पटक कर सालों की भड़ास निकालता हे। वहीं वह तीनों किसी तरह दिव्य दृष्टि की मदद से पार्थ तक पहुंच जाते हे । वहीं दूसरी और उस राक्षस ने अपना एक अंश गिरनार की और कृपधार को मरने भेजा था । पर कृपधार और राक्षस के बीच में गिरनार पर्वत पर लड़ाई होती हे ।जिसमें कृपधार उस राक्षस के अंश को हरा देते हे । और उन्हें आने वाले संकट का पता चल जाता हे । वोह तुरंत गिद्ध पर बैठ कर शहर की और चले जाते हे । वहीं जय निलेश और लीलावती भ्रम राक्षस और पार्थ के पास पहुंच जाते हे । और जय और निलेश का फोन ट्रेस कर कर आर्मी फोर्स हेलीकॉप्टर से वहा पहुंच जाती हे । और देख कर दंग रह जाती हे। 200 फिट लंबा भ्रम राक्षस वोह भी दो दो । वोह उन राक्षस पर हमला कर देते हे । अपने हेलीकॉप्टर से बुत वोह राक्षस हेलीकॉप्टर को दूर फेक देता हे । जय पार्थ के माइंड में घुस कर कहता हे याद कर तू हमारा दोस्त हे याद कर जब तेरी चड्डी फटी थी तो तू निलेश की चड्डी उधार ले जाता था। पार्थ भी दिमाग पर जोर लगाता हे । वहीं जय अपनी पूरी जान लगा देता हे उससे याद करने में । जय की आंखों का बिंदु पीले कलर का हो गया था । जय कहता हे पार्थ से उससे अपने आप पर काबू मत करने दे । तू उस राक्षस जैसा नहीं हे तू एक ईमानदार इंसान हे । वहीं दूसरी और भ्रम राक्षस पार्थ को अपने दिमाग से कंट्रोल करता हे । इस बार भ्रम राक्षस अपना पैर निलेश पर रखने वाला ही होता हे कि पार्थ उससे पकड़ लेता हे । पार्थ सब कुछ बरदास कर सकता हे मगर कोई उसके दोस्त को चोट पहुंचाए तो वह पार्थ सहन नहीं कर सकता पार्थ को सब याद आ जाता हे । असल में पार्थ गए था जो निलेश से प्यार करता था पर ये बात वोह निलेश से कभी कह नहीं पाया । और अपने प्यार के लिए उससे सब याद आ जाता हे । भ्रम राक्षस बना हुआ पार्थ कहता हे कि । निलेश मैने तुम्हे हमेशा पसंद किया हे पर में एक लड़का हु पर फिर भी तुमसे प्यार करता हु ये बात में तुम्हे बताता तो तुम मुझसे दोस्ती तोड़ देते । इस लिए कभी नहीं बताई । भ्रम राक्षस कहता हे कि । बहुत हुआ तुम लोगो का ड्रामा पार्थ तू मेरा गुलाम हे । लेकिन पार्थ उसकी नहीं सुनता और एक मौका उस राक्षस को मारता हे । सारी पुलिस फोर्स और प्रशांत ये देखते रह जाते हे । दोनों 200 फिट लंबे राक्षस में लड़ाई होती हे । तभी वहा कृपधार भी पहुंच जाते हे । पार्थ राक्षस को बहुत मुक्के मारता हे और अंत में भ्रम राक्षस हर जाता हे । मरते मरते राक्षस कहता हे कि मुझे तो हरा दिया मगर किसी और दुनिया की मुसीबत तुम पर आने वाली हे । इतना कह कर राक्षस मर जाता हे पार्थ ठीक हो जाता हे । मगर खतरा अभी भी पूरी तरह से नहीं खत्म हुआ ।
The end ............
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