स्कूल की जिंदगी अब बिकाश और माया के लिए पहले जैसी सामान्य नहीं रही थी। पहली दोस्ती, पहली नोक-झोंक, और पहला प्यार – सब कुछ उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन में रंग भर चुका था।
एक हफ्ते बाद, शनिवार का दिन आया। माया ने बिकाश को पार्क में मिलने के लिए बुलाया था। बिकाश सुबह से ही उत्साहित था। उसने अपनी शर्ट अच्छी तरह प्रेस की, बाल संवार लिए और बस माया के आने का इंतजार करने लगा।
पहली डेट की शुरुआत
पार्क का मौसम बिल्कुल परफेक्ट था। हल्की धूप, ठंडी हवा और चारों ओर हरियाली। माया पहले ही वहां पहुंची थी। जैसे ही बिकाश ने उसे देखा, उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाय माया!”
माया भी हँसते हुए बोली,
“हाय बिकाश! मुझे इंतजार करना पड़ा।”
दोनों एक-दूसरे के हाथ थामकर पार्क की घास पर घूमने लगे। रास्ते में उन्होंने छोटी-छोटी बातें की – स्कूल की हंसी-मज़ाक, टीचर्स की यादें और दोस्तों की शरारतें।
बिकाश ने धीरे से कहा,
“माया, तुम्हारे साथ हर पल बहुत अच्छा लगता है। कभी-कभी लगता है कि समय रुक जाए।”
माया ने उसका हाथ कसकर पकड़ा और मुस्कुराई,
“मुझे भी ऐसा लगता है बिकाश। तुम्हारे साथ सब कुछ आसान और मज़ेदार लगता है।”
दोस्तों की मस्ती और छोटी-सी नोक-झोंक
जैसे ही दोनों बेंच पर बैठे, माया ने हँसी में कहा,
“तुम हमेशा इतने शर्मीले क्यों रहते हो? कभी खुलकर मुझसे बात नहीं करते।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम्हारे सामने शर्म करना नहीं, मज़ा है माया। तुम्हें देखकर मेरा दिल झूम जाता है।”
माया ने उंगली से उसकी कोहनी थपथपाई।
“तुम सच में बहुत प्यारे हो बिकाश। कभी-कभी लगता है कि तुम मेरे लिए ही बने हो।”
“और तुम मेरे लिए,” बिकाश ने मुस्कुरा कर कहा।
पार्क में चलते-चलते, दोनों दोस्तों की टोली से मिले। उनके दोस्त भी देखकर मुस्कुरा रहे थे।
“वाह! बिकाश और माया एकदम प्यारी जोड़ी लग रही हो!” – उनके दोस्त मजाक में कहने लगे।
बिकाश और माया एक-दूसरे की तरफ़ शर्माते हुए मुस्कुराए।
पहली रोमांटिक नज़दीकी
पार्क की झील के पास, दोनों घास पर बैठ गए। हवा में हल्की ठंडी महक थी और सूरज ढलने ही वाला था।
बिकाश ने माया की तरफ़ देखा और धीरे से कहा,
“माया, मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूँ… क्या हम हमेशा ऐसे ही साथ रहेंगे?”
माया ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
“हाँ बिकाश, हमेशा। मैं नहीं चाहती कि हम अलग हों।”
बिकाश ने धीरे से माया का हाथ पकड़ा। दोनों के हाथों में गर्मी फैल गई। झील की पानी की हल्की लहरें और चारों ओर की हरियाली ने उनके पल को और रोमांटिक बना दिया।
छोटी चुनौती और मस्ती
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, देखते हैं कौन ज्यादा जल्दी झूलों पर पहुँचता है।”
बिकाश ने चुनौती स्वीकार की। दोनों दौड़े, हँसे, और झूलों पर बैठकर झूलने लगे।
“तुम सच में बहुत मज़ेदार हो माया!” बिकाश ने कहा।
“और तुम भी बिकाश! तुम्हारे बिना यह दिन अधूरा होता।”
इस छोटे-से खेल ने उनके रिश्ते में और नज़दीकियाँ बढ़ा दी। दोनों अब केवल हाथ पकड़ने या मुस्कुराने तक ही सीमित नहीं थे – उनके दिल और बातें दोनों ही मिलकर उनका प्यार जाहिर कर रहे थे।
दिन का रोमांचक अंत
शाम ढलने लगी, और दोनों पार्क से घर लौटने लगे। रास्ते में, माया ने धीरे से कहा,
“आज का दिन बहुत खास था बिकाश। मैं हमेशा इसे याद रखूँगी।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“मैं भी माया… तुम्हारे साथ हर पल यादगार लगता है। आज से हमारी कहानी और भी मज़ेदार होने वाली है।”
घर लौटते समय, दोनों हाथ में हाथ डाले चल रहे थे। उनका प्यार अब स्कूल के चौक-चौराहों में भी दिखने लगा था। हर हँसी, हर नोक-झोंक, और हर छोटा पल अब उनके रिश्ते का हिस्सा बन चुका था।
Episode 4 का संदेश
इस एपिसोड ने दिखाया कि पहली डेट सिर्फ़ मस्ती और हँसी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, छोटे-छोटे रोमांटिक पल जीने और प्यार को गहराई देने का मौका है।
बिकाश और माया अब न केवल पहले प्यार के अनुभव में आगे बढ़ रहे थे, बल्कि उनके लिए दोस्ती और प्यार का मेल सबसे अनमोल चीज़ बन गया था।