. अनचाहा अहसास
विक्रम सिंह की मौत के बाद शहर में शांति तो हो गई थी, लेकिन माया के लिए यह शांति किसी आने वाले तूफान का संकेत थी। आर्यन की रूह को इंसाफ मिल चुका था, पर माया के कमरे में फैली वह मोगरे की खुशबू अब फीकी पड़ने की बजाय और भी तेज़ होने लगी थी।
एक रात, जब माया गहरी नींद में थी, उसे महसूस हुआ कि उसके बेडरूम की खिड़की जोर-जोर से हिल रही है। जैसे ही उसने आँखें खोलीं, उसने देखा कि खिड़की के कांच पर भाप से एक धुंधला चेहरा बना हुआ है। वह आर्यन नहीं था। वह चेहरा किसी छोटी बच्ची का लग रहा था जिसकी आँखों की जगह सिर्फ दो काले गड्ढे थे।
माया चिल्लाते-चिल्लाते बची। उसने झटके से लाइट जलाई, तो कांच बिल्कुल साफ था। तभी उसकी नज़र फर्श पर पड़ी—वहां गीले पैरों के छोटे-छोटे निशान थे, जो उसकी अलमारी की ओर जा रहे थे।
एक नया रहस्य: फाइल नंबर 404
अगले दिन, माया अपने पुराने ऑफिस गई। हालांकि उसने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उसे अहसास हुआ कि आर्यन और नंदिनी की कहानी के पीछे कोई और बड़ा राज़ छिपा है। उसने चुपके से रिकॉर्ड रूम में प्रवेश किया।
पुरानी फाइलों को पलटते समय उसे एक पीला लिफाफा मिला जिस पर लिखा था— "प्रोजेक्ट साया: 1974"।
उस फाइल के अंदर कुछ ऐसी तस्वीरें थीं जिन्हें देखकर माया के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन तस्वीरों में आर्यन और नंदिनी के साथ एक छोटी बच्ची भी थी। तस्वीर के पीछे लिखा था: "हमारी छोटी गुड़िया, जिसे दुनिया कभी नहीं जान पाएगी।"
माया का दिमाग चकराने लगा। क्या नंदिनी और आर्यन का कोई बच्चा भी था? और अगर था, तो उस आग वाली रात उसका क्या हुआ?
अजनबी की एंट्री
जब माया ऑफिस से बाहर निकल रही थी, तो सीढ़ियों पर उसकी टक्कर एक लंबे, प्रभावशाली व्यक्ति से हुई। उसने काले रंग का ओवरकोट पहना था और उसकी आँखें भूरी थीं।
"संभलकर, मिस माया," उसने एक गहरी आवाज़ में कहा।
माया ठिठक गई। उसने इस आदमी को पहले कभी नहीं देखा था, फिर उसने उसका नाम कैसे जाना? "आप कौन हैं?" माया ने पूछा।
उसने एक हल्का सा मुस्कुराते हुए अपना कार्ड आगे बढ़ाया। कार्ड पर लिखा था: इशान खन्ना - पैरानॉर्मल आर्काइविस्ट (Paranormal Archivist)।
"मैं उन कहानियों का पीछा करता हूँ जिन्हें वक्त दफन कर देता है। आर्यन मेहरा की रूह आज़ाद नहीं हुई है, माया। उसे तो बस एक नई दिशा मिली है। और वह बच्ची... वह आपको बुला रही है।"
. कुएं का बुलावा
इशान की बातें सुनकर माया कांप उठी। रात को जब वह वापस अपने फ्लैट पर आई, तो उसे अपने घर के पीछे वाले हिस्से से, जहाँ एक पुराना और बंद पड़ा कुआँ था, किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी।
वह टॉर्च लेकर उस कुएं के पास पहुँची। कुएं के चारों तरफ मोगरे के वही फूल बिखरे हुए थे जो उसे अपने तकिए के नीचे मिलते थे। जैसे ही उसने कुएं के अंदर टॉर्च मारी, आवाज़ अचानक बंद हो गई।
लेकिन टॉर्च की रोशनी में उसे पानी की सतह पर अपना अक्स नहीं, बल्कि उसी छोटी बच्ची का अक्स दिखाई दिया। उसने अपने छोटे से हाथ से कुएं की दीवार की ओर इशारा किया, जहाँ एक ईंट थोड़ी बाहर निकली हुई थी।
माया ने हिम्मत जुटाकर उस ईंट को खींचा। उसके पीछे एक छोटा सा लकड़ी का डिब्बा छिपा था। जैसे ही उसने डिब्बा खोला, उसके भीतर एक सोने का ताबीज और एक खून से सना हुआ खत मिला।
खत में लिखा था: "आर्यन, अगर तुम्हें यह खत मिले, तो समझ लेना कि विक्रम सिंह ने हमें ढूंढ लिया है। हमारी बेटी को उस पुरानी सराय के तहखाने में छिपा दिया है। उसे बचा लेना..."
अंत की शुरुआत
तभी माया को महसूस हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है। उसने पीछे मुड़कर देखा तो इशान खन्ना वहां खड़ा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
"तो तुम्हें मिल गया?" इशान ने ठंडे स्वर में पूछा। "अब असली खेल शुरू होगा। क्योंकि वह बच्ची अभी मरी नहीं है... वह पिछले 50 सालों से उस सराय में 'जीते-जी दफन' है।"
माया के हाथ से वह खत गिर गया। क्या वह बच्ची अभी भी ज़िंदा हो सकती है? या वह कोई ऐसी चीज़ बन चुकी है जिसे दु
निया कभी नहीं देखना चाहेगी?