वह औरत गीता के बारे में सोचते सोचते अतीत (चार साल पहले)में चली जाती है
"अरी ओ काकी सुनती हो"
पानी कब आता है यहां।
तब गीता नई ब्याह के आई थी और यहां के आबो हवा का जायजा ले रही थी। उसके लिए यह सब कुछ नया था।
गीता के पति के पास बस यहां एक रहने लायक खोली थी उसके अलावा यहां कुछ ना था।
यहां तक की जिस साधन (घर का जरुरी सामान)से वो अपना जीवन व्यतीत कर पाए वो भी नहीं था।
गीता अपनी ज़िंदगी का नया सफ़र शूरु करने के इरादे से इस इंसान से शादी करने को राज़ी हुई थी।
एक दो महीने तक वो इंसान गीता को पलकों पर बिठा कर रखता है। उसे आश्वासन दिलाता है कि वो उसे हमेशा खुश रखेगा।
गीता इस बात से अंजान की ये इंसान भी उसके बाप के जैसे दारूबाज और नशेड़ी है। उसके कभी दारु पी लेने पर कसमें देती। और कहती,,,,,की
आप को मेरी कसम है इसे वापस से हाथ नहीं लगाना ,,, गीता का पति भी कसम की लाज रखने को बॉटल उठा कर फेक देता की ये लो अब से इसे हाथ तक नहीं लगाऊंगा। गीता को लगता की ये सुधरता जा रहा है।
मगर इस सब से अंजान उसे क्या पता थ। की वह बस केवल उसका प्रेम पाने के लिए नाटक करता है।
मगर जैसे जैसे उस दरिंदे की प्यास बुझती जा रही थी गीता के प्रति उसका प्रेम भाव भी परिवर्तित होता जा रहा था।
अब वह गीता को कोसने लगा था। शुरुआत के दो ही महीनों में उसने गीता से कहा की में अकेला हमारे खर्चे उठाने के लिए काफी नहीं हूं। तभी तपाक से गीता कहती है की हम मिल के दोनों घर के खर्चे उठाएंगे।
आगे जो भी होने वाला था उससे अंजान गीता अपने अतीत के बारे में सोचने लग जाती है
"(गीता के माता पिता मजदूर वर्ग से थे गीता घर पर रहकर सारा काम संभालती थी। ओर गीता के माता पिता घर से बाहर जाकर फैक्ट्री में काम किया करते। गीता के माता पिता पास की ही एक शीशा फैक्ट्री में चूड़ियां बनाने का काम किया करते जिससे वक्त के साथ धीरे धीरे उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो गईं थी।)"
गीता का बचपन से सपना रहा की वो स्कूल में पढ़ने जाए। मगर पहले बस गीता के पापा काम पर जाते और फिर जब गीता खेलने कूदने लायक हो गईं तो घर की जरूरतों को पुरा करने के लिए उसकी मां भी काम में लग गई।
गीता जब छोटी थी तभी उसके मां पापा उसे घर पर अकेली छोड़ कर चले जाते। गीता की मां की आंख बहुत जल्दी खराब हो गईं। ओर अब वह बस वास के घरों में काम करने के लिए जाती। जीतना कुछ मिलता गुजारा करते।
गीता के पिता को धीरे धीर शराब की आदत लग गईं। वो जीतना कुछ कमाते घर पर कम लाते सारा शराब में उड़ा आते थे।
ओर घर आते ही जानवरों जैसा सलूक गीता की मां के साथ करते।
पहले उसकी मां जो कुछ भी बनाती थी उसे दोनों साथ में प्यार से खा लिया करते थे। मगर अब तो अलग ही नखरे थे।
"कि इसमें नमक ज्यादा है या मिर्ची डालना भूल गईं क्या चक्कर है।"
मतलब उनको दारू के लत बर्बाद करने लग गईं थी।
कई बार तो जैसे ही कारखाने से हिसाब होता वो सारे पैसे रास्ते में पड़ने वाले ठेको और गुम्मट में उड़ा आते और बचे कूचे थोड़े बहुत रुपे वो घर आकर गीता की मां को दे देते।
मगर बात यहां ही खतम नहीं होती।
अगले दिन वापस उनको पीने के लिए पैसे चाहिए होते थे। तो वो गीता की मां से मांगते। वो जो खुद लाए होते उनको तो खर्च कर ही देते। साथ की साथ गीता की। मां की आमदनी भी उड़ाने लग जाते।
गीता की मां जब जोर देकर कहती की। इस बार राशन वाले का हिसाब भी करना है। तो कहते वो तू देख लेना में कितने तो कमा कर लाता हूं। ऐश मोज में खत्म करेगी तू।
ला जल्दी दे। अगर गीता की मां रुपे दे देते तब तो ठीक नगर उनके मना करने पर वो हैवान बन जाते और गीता की मां को पीटने लग जाते।
उनको इतना पीटा जाता की मरने में कुछ ही कसर रह जाती। तो अधमरी हालाथ। में उनको मजबूरी में रुपे देने ही पड़ते।
ओर गीता की मां रोती बिलखती हालत में यूंही पड़ी रह जाती।
इतना सब देख देख कर गीता से रहा न गया उसने भी कमाने का फैसला कर लिया। अब उसने हर मुमकिन कोशिश की जिससे वो अपना घर चलाने में हाथ बंटा सके। उसने गुजारिश की,,,
कि उसको चुड़ी फैक्ट्री में काम करने दिया जाए। मगर वो जगह सुरक्षित ना थी। तो मना कर दिया गया।
तब गीता अपनी सहेलियों के साथ पास के ढाबों पर प्लेट साफ़ करने और बर्तन मांजने का काम करने लगीं। ज्याद रुपे तो नही आते मगर उसकी नाम मात्र की जरूरतें पुरी हो जाती थी।
ये सब सोचते- सोचते गीता वापस से वर्तमान में आ जाती हैं।
जहा वो पलकों पर बैठ कर राज करने वाली थी अब वो काकी से बात करके काम ढूंढने को कहती हैं।
इनके काम भी निर्धारित थे। बस लोगों के घरों में झाड़ू पोंछा और बर्तन मांझना या कपडे धुलना आदि।
उसे सब आता था तो वह बिना कुछ सोचे दूसरे ही महीने से काम करने के लिए चली जाती।
पहले घर का काम करती और फिर बाहर का और वापस से फिर घर आकर काम करती।
ओर दोनों पति पत्नी साथ में वक्त बिताते मगर गीता का पति बस इतना ही वक्त बिताता की दारू पीता और गीता के साथ सो जाता। उसे उसकी भावनाओ की कोई कद्र नहीं थी।
क्यूंकि उसने गीता को उसके मां बाप से एक लाख में खरीदा जो था। वो बस गीता का इस्तेमाल करता।
ओर इस सब से अंजान गीता की ,,,"उसके पति को सिर्फ उसके जिस्म की भूख हैं और एक नोकरानी खरीद कर लाया है"
वो सोचती की सच्चा प्रेम करते हैं
To be continued................