Berang Ishq Gahra Pyaar - 10 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 10

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बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 10

खन्ना मेंशन की उस सुबह में सूरज की पहली किरण ने केवल अंधेरा नहीं छँटाया था, बल्कि विश्वास और संकल्प की एक नई इबारत लिखी थी। लेकिन जैसा कि कहा जाता है, "तूफान के आने से पहले की शांति सबसे अधिक भयानक होती है।" खन्ना खानदान के भीतर का काँटा तो निकल चुका था, पर बाहरी दुश्मन, मिस्टर सिंघानिया, अभी भी अपनी हार का बदला लेने के लिए घात लगाए बैठा था।
अदृश्य साए और नई रणनीति
सगाई के अगले ही दिन, देब ने मेंशन की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया। अब चप्पे-चप्पे पर आधुनिक सर्विलांस कैमरे और देब के सबसे भरोसेमंद कमांडो तैनात थे। देब जानता था कि चाचा सोमनाथ तो महज एक मोहरा थे, असली खिलाड़ी तो अभी भी शतरंज की बिसात बिछा रहा है।
देब ने आर्यन को अपने स्टडी रूम में बुलाया। "आर्यन, सोमनाथ जेल में है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी ने सिंघानिया को सतर्क कर दिया है। वह अब सीधे वार करने के बजाय तुम्हारी रीढ़ की हड्डी पर हमला करेगा—यानी तुम्हारी 'खन्ना एंटरप्राइजेज' पर।"
आर्यन की आँखों में अब वह मासूमियत नहीं थी। उसने ठंडे स्वर में कहा, "उसे आने दो देब। अब तक वह एक आशिक से लड़ रहा था, अब उसका सामना एक ऐसे इंसान से होगा जिसने अपनों का विश्वासघात झेला है।"
इसी बीच, राधिका कमरे में दाखिल हुई। उसके हाथ में कुछ फाइलें थीं। "सिर्फ बिजनेस ही नहीं देब, सिंघानिया हमारे पारिवारिक इतिहास के उन पन्नों को खंगाल रहा है जिन्हें सालों पहले बंद कर दिया गया था। वह किसी ऐसे राज की तलाश में है जो खन्ना मेंशन की नींव हिला सके।"
सावित्री बुआ का रहस्यमय व्यवहार
घर के एक कोने में, सावित्री बुआ की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। जब से सोमनाथ की गिरफ्तारी हुई थी, वह गुमसुम रहने लगी थीं। एक दोपहर, जब राधिका लाइब्रेरी में कुछ पुरानी किताबें देख रही थी, उसने बुआ को तहखाने (Basement) की ओर जाते देखा। उनके हाथ में एक पुराना पीतल का संदूक था।
राधिका ने दबे पाँव उनका पीछा किया। तहखाने के अंधेरे में सावित्री बुआ एक पुरानी तस्वीर के सामने खड़ी होकर सुबक रही थीं।
"मुझे माफ कर दो मालकिन... मैं सच नहीं बता पाई। अगर आज मैंने मुँह खोला तो आर्यन बाबा बिखर जाएंगे।"
राधिका के पैर वहीं ठिठक गए। क्या सोमनाथ अकेला गद्दार नहीं था? क्या खन्ना मेंशन की दीवारों में कोई और गहरा राज दफन था? राधिका ने तुरंत देब को मैसेज किया।
बाज़ार में हलचल: आर्थिक युद्ध
अगले कुछ दिनों में, खन्ना एंटरप्राइजेज के शेयर अचानक गिरने लगे। मिस्टर सिंघानिया ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। उसने बाज़ार में यह खबर फैला दी कि खन्ना परिवार आंतरिक कलह के कारण टूटने वाला है।
आर्यन ने एक इमरजेंसी बोर्ड मीटिंग बुलाई। वहां उसे पता चला कि उसके कुछ पुराने वफादार मैनेजर भी पाला बदल चुके थे। सिंघानिया की दौलत ने वफादारी को खरीद लिया था। मीटिंग के बीच में ही सिंघानिया का वीडियो कॉल स्क्रीन पर फ्लैश हुआ।
"आर्यन बेटा, सगाई मुबारक हो! लेकिन अफसोस, तुम्हारी दुल्हन को मिलने वाला मुँह दिखाई का तोहफा मैंने पहले ही छीन लिया है। तुम्हारी कंपनी के ४०% शेयर्स अब मेरे पास हैं। बस १०% और... और खन्ना मेंशन की चाबियाँ मेरे पास होंगी।" सिंघानिया की ठहाके भरी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज उठी।
आर्यन मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान जिसने सिंघानिया को सोच में डाल दिया। "मिस्टर सिंघानिया, आपने शेयर्स तो खरीदे, पर शायद यह नहीं देखा कि वह 'शेल कंपनियां' (Shell Companies) किसकी थीं। आपने पिछले ४८ घंटों में जो पैसा निवेश किया है, वह सीधा मेरे ट्रस्ट में गया है। शुक्रिया, हमारे चैरिटी फंड को इतने बड़े दान की ज़रूरत थी।"
सिंघानिया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। देब की चतुराई ने बाज़ार में एक जाल बुछाया था, जिसमें सिंघानिया खुद उलझ गया था।
सच्चाई का विस्फोट
उधर मेंशन में, देब और राधिका ने सावित्री बुआ को घेर लिया था। देब ने सख़्ती से पूछा, "बुआ, उस संदूक में क्या है? सोमनाथ के साथ आपका क्या रिश्ता था?"
सावित्री बुआ फूट-फूट कर रोने लगीं। उन्होंने संदूक खोला। उसमें कुछ पुराने कानूनी दस्तावेज़ और एक वसीयत थी।
"आर्यन बाबा, आपके पिता ने मरने से पहले एक और वसीयत लिखी थी। सोमनाथ ने उसे बदल दिया था। सच तो यह है कि सिंघानिया कोई बाहरी दुश्मन नहीं है... वह आपके पिता का सौतेला भाई है जिसे इस जायदाद से बेदखल कर दिया गया था।"
यह सुनकर आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई, जो अभी-अभी ऑफिस से लौटा था। जिस इंसान से वह लड़ रहा था, वह उसी के खून का हिस्सा था?
सावित्री बुआ ने आगे बताया, "सिंघानिया को लगता है कि उसके साथ नाइंसाफी हुई थी, इसलिए वह इस घर को बर्बाद करना चाहता है। सोमनाथ सिर्फ उसकी मदद कर रहा था ताकि उसे अपना हिस्सा मिल सके।"
अंतिम टकराव: कुरुक्षेत्र
सिंघानिया को जब पता चला कि उसका राज खुल गया है, तो वह पागल हो उठा। वह अपने हथियारों से लैस गुंडों के साथ सीधे खन्ना मेंशन के गेट पर आ पहुँचा। वह अब कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि खूनी खेल खेलना चाहता था।
"आर्यन! बाहर आओ! आज इस खानदान का फैसला सड़क पर होगा!" सिंघानिया की आवाज़ में पागलपन था।
आर्यन बाहर निकला, लेकिन अकेला नहीं। उसके एक तरफ राधिका थी और दूसरी तरफ देब।
"चाचा... या मैं आपको दुश्मन कहूँ?" आर्यन ने शांत स्वर में पूछा। "आपने हक की बात की? हक माँगा जाता है, छीना नहीं जाता। अगर आप प्यार से आते, तो शायद मैं खुद यह सब आपको सौंप देता।"
सिंघानिया ने बंदूक तान दी। "मुझे तुम्हारी भीख नहीं चाहिए! मुझे यह बर्बादी चाहिए!"
जैसे ही उसने ट्रिगर दबाना चाहा, देब की स्नाइपर टीम ने उसकी बंदूक पर निशाना साधा। बंदूक हाथ से छूटकर गिर गई। पुलिस की गाड़ियाँ सायरन बजाती हुई अंदर दाखिल हुईं। राधिका ने पहले ही सारा सबूत और वसीयत पुलिस कमिश्नर को भेज दी थी।
एक नए युग का उदय
जब सिंघानिया को हथकड़ियाँ पहनाई जा रही थीं, उसने राधिका की ओर देखा। "तुमने सब बिगाड़ दिया लड़की..."
राधिका ने गर्व से कहा, "मैंने कुछ नहीं बिगाड़ा, मैंने सिर्फ उस घर को बचाया है जिसने मुझे अपनी पहचान दी। प्रेम में शक्ति होती है, लेकिन सत्य में विजय।"
उस रात, खन्ना मेंशन की छत पर आर्यन और राधिका साथ बैठे थे।
"क्या अब सब ठीक हो जाएगा?" राधिका ने आर्यन के कंधे पर सिर रखते हुए पूछा।
आर्यन ने आसमान के तारों को देखते हुए कहा, "घाव भरने में समय लगेगा राधिका। अपनों ने जो ज़ख्म दिए हैं, उनके निशान रहेंगे। लेकिन अब मुझे डर नहीं है। क्योंकि अब मेरे पास वह 'संतुलन' है जिसकी तलाश में मैं भटक रहा था—तुम और देब।"
देब दूर से उन्हें देख रहा था। उसने अपने वायरलेस पर कहा, "ऑपरेशन क्लीन स्वीप पूरा हुआ। अब इस घर में सिर्फ खुशियाँ आएंगी।"
सुबह की नई धूप में खन्ना मेंशन की दीवारें अब और भी मज़बूत लग रही थीं। विश्वासघात की जड़ें काट दी गई थीं और प्रेम का एक नया पौधा अंकुरित हो चुका था, जिसे अब कोई सिंघानिया या कोई सोमनाथ नहीं उखाड़ सकता था