Deewane Ki Diwaniyat - Episode in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 7

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 7

बगावत के सुर

एपिसोड 7: न्याय की आग, बदले की छायादरभंगा की सुबहें अब साये से भरी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट की साइट पर मजदूर तेजी से काम कर रहे थे, लेकिन पृथ्वी राठौर की आँखें हर कोने पर टिकी रहतीं। कालिया भाग चुका था, और वो जानता था—ये जंग अभी अधर में लटकी है। सनाया उसके साथ साइट पर आती, फाइलें चेक करती, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ झलकता। भानु प्रताप की डायरी ने सब बदल दिया था। पिता का कत्ल—ये राज पृथ्वी के सीने में आग की तरह सुलग रहा था।कालिया की साजिश

रात के अंधेरे में कालिया अपने ठिकाने पर गुर्गों से घिरा बैठा था। भानु प्रताप की जेल से आई चिट्ठी उसके हाथ में थी: "स्टेशन को उड़ाओ, सनाया को लाओ। राठौर का बेटा टूटेगा।" कालिया ने हँसते हुए कहा, "ठाकुर साहब की बेटी ने गद्दारी की है। कल रात स्टेशन साइट पर धमाका होगा। पृथ्वी को ललकारो, फिर अगवा।" उसके आदमियों ने हथियार चमकाए। एक ने कहा, "सनाया का फ्लैट अभी भी निगरानी में है। वो अकेली जाती है मार्केट।" कालिया की आँखें चमकीं—बदला पूरा होने वाला था।नई दोस्ती, पुरानी दुश्मनी

दोपहर को सनाया बाजार गई। सब्जी का थैला लटकाए लौट रही थी, तभी एक बाइक सवार करीब आया। वो कालिया का आदमी था। सनाया ने भागने की कोशिश की, लेकिन वो उसे पकड़ लिया। "ठाकुर साहब का पैगाम है—वापस आ जा!" सनाया ने चिल्लाया, "छोड़ो मुझे!" तभी एक युवक दौड़ा—साइट का ही मजदूर, रमेश। उसने लाठी से हमलावर को मारा। दोनों ने मिलकर उसे भगाया। सनाया ने रमेश को गले लगाया, "तुमने जान बचाई। कौन हो तुम?" रमेश ने मुस्कुराते कहा, "पृथ्वी सर का भाई जैसा। भानु प्रताप ने मेरे परिवार को बर्बाद किया था। अब न्याय का वक्त है।"पृथ्वी को खबर लगी तो वो सनाया को ले आया। रमेश को साइट पर रख लिया। "ये दुश्मनी पुरानी है, सनाया। तेरे पापा ने कई घर उजाड़े। लेकिन तू अलग है।" सनाया ने सिर झुका लिया। "मैं अपना पाप धोऊँगी। डायरी की कॉपी पुलिस को दूँगी।"धमाके की रात

रात ग्यारह बजे। स्टेशन साइट पर लाइटें जल रही थीं। पृथ्वी और रमेश गश्त कर रहे थे। सनाया घर पर थी, लेकिन चिंता में फोन पर बातें कर रही। अचानक धमाका! साइट के एक कोने में ब्लास्ट हो गया—ट्रक में छिपा विस्फोटक फटा। आग की लपटें उठीं, मजदूर चीखे। पृथ्वी दौड़ा, "सब बाहर निकलो!" रमेश ने एक संदिग्ध को पकड़ा—कालिया का गुर्गा। पूछताछ में उसने कालिया का ठिकाना बता दिया।पृथ्वी पुलिस को कॉल किया। लेकिन कालिया पहले ही सनाया के फ्लैट पर पहुँच चुका था। दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा। सनाया ने छिपने की कोशिश की, लेकिन वो पकड़ ली। "तूने ठाकुर साहब को धोखा दिया। अब तेरी सजा!" सनाया ने संघर्ष किया, "पापा गलत थे। न्याय सबके लिए।" तभी पृथ्वी का फोन आया—ट्रैकिंग से। कालिया हँसा, "तेरा प्रेमी आ रहा है। अच्छा, आमना-सामना होगा।"आखिरी टकराव

पृथ्वी पुलिस के साथ पहुँचा। फ्लैट के बाहर घेराबंदी। कालिया ने सनाया को बंधक बनाया। "राठौर, बाहर आ! तेरे बाप की तरह मर जाएगा!" पृथ्वी ने दरवाजा लात मारा। झड़प हुई—गोली चली। पृथ्वी ने कालिया के हाथ में गोली मारी, सनाया छूट गई। रमेश ने कालिया को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बाकी गुर्गों को पकड़ा।अस्पताल में सनाया और पृथ्वी फिर साथ थे। पृथ्वी का हाथ चोटिल था। "सनाया, डायरी से सच सामने आ गया। भानु प्रताप को उम्रकैद मिलेगी। स्टेशन बनेगा—नई शुरुआत।" सनाया ने आँसू पोंछे। "हम साथ हैं, पृथ्वी। बगावत खत्म, प्यार जीतेगा।" दोनों ने फिर होंठ मिलाए। बाहर बारिश हो रही थी—पुराने कांटे धुल रहे थे।लेकिन एक रहस्य बाकी था। कालिया की जेब से निकली चिट्ठी: "भानु प्रताप अकेला नहीं। बड़ा मास्टरमाइंड बाहर है।" दरभंगा की बगावत के सुर अब नई साजिश की ओर मुड़ने वाले थे...