🎵 नया हिंदी गीत: “संसार एक ठिकाना” 🎵
मुखड़ा (कोरस):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
खाली हाथ हम आए थे, खाली हाथ ही जाना,
साँसों की इस भीड़ में, सच बस यही पहचाना।
अंतरा 1:
रेत पे सपने लिखते हैं, मिट जाते हैं हर बार,
वक़्त की एक लहर काफी, ढा दे सारा संसार।
आज जो अपने लगते हैं, कल यादों में ढल जाएँ,
जन्म और मृत्यु के बीच, कुछ पल ही रह जाएँ।
मुखड़ा (दोहराव):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
अंतरा 2:
धन-दौलत और ये शोहरत, यहीं छूट जानी है,
साथ चलेगी बस माया, जो दिल से निभानी है।
घमंड का बोझ उतारो, दो दिन की ये काया,
कर्म वही अमर होते, जो जग में छोड़ जाए।
ब्रिज:
क्यों इतरा कर चलता है, दो दिन का मुसाफ़िर,
माया बाँट, प्रेम ही रख, बन जा थोड़ा सा बेहतर।
मुखड़ा (अंतिम):
संसार एक ठिकाना है, सच का ये ऐलान,
नाम नहीं कर्म बोलें, बन जाए पहचान।
अंत (आउट्रो):
आज है साँस, आज है मौका, आज ही कुछ कर ले,
कल का क्या है किसने जाना, दिल से जीवन भर ले।🎵 नया हिंदी गीत: “संसार एक ठिकाना” 🎵
मुखड़ा (कोरस):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
खाली हाथ हम आए थे, खाली हाथ ही जाना,
साँसों की इस भीड़ में, सच बस यही पहचाना।
अंतरा 1:
रेत पे सपने लिखते हैं, मिट जाते हैं हर बार,
वक़्त की एक लहर काफी, ढा दे सारा संसार।
आज जो अपने लगते हैं, कल यादों में ढल जाएँ,
जन्म और मृत्यु के बीच, कुछ पल ही रह जाएँ।
मुखड़ा (दोहराव):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
अंतरा 2:
धन-दौलत और ये शोहरत, यहीं छूट जानी है,
साथ चलेगी बस माया, जो दिल से निभानी है।
घमंड का बोझ उतारो, दो दिन की ये काया,
कर्म वही अमर होते, जो जग में छोड़ जाए।
ब्रिज:
क्यों इतरा कर चलता है, दो दिन का मुसाफ़िर,
माया बाँट, प्रेम ही रख, बन जा थोड़ा सा बेहतर।
मुखड़ा (अंतिम):
संसार एक ठिकाना है, सच का ये ऐलान,
नाम नहीं कर्म बोलें, बन जाए पहचान।
अंत (आउट्रो):
आज है साँस, आज है मौका, आज ही कुछ कर ले,
कल का क्या है किसने जाना, दिल से जीवन भर ले।🎵 नया हिंदी गीत: “संसार एक ठिकाना” 🎵
मुखड़ा (कोरस):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
खाली हाथ हम आए थे, खाली हाथ ही जाना,
साँसों की इस भीड़ में, सच बस यही पहचाना।
अंतरा 1:
रेत पे सपने लिखते हैं, मिट जाते हैं हर बार,
वक़्त की एक लहर काफी, ढा दे सारा संसार।
आज जो अपने लगते हैं, कल यादों में ढल जाएँ,
जन्म और मृत्यु के बीच, कुछ पल ही रह जाएँ।
मुखड़ा (दोहराव):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
अंतरा 2:
धन-दौलत और ये शोहरत, यहीं छूट जानी है,
साथ चलेगी बस माया, जो दिल से निभानी है।
घमंड का बोझ उतारो, दो दिन की ये काया,
कर्म वही अमर होते, जो जग में छोड़ जाए।
ब्रिज:
क्यों इतरा कर चलता है, दो दिन का मुसाफ़िर,
माया बाँट, प्रेम ही रख, बन जा थोड़ा सा बेहतर।
मुखड़ा (अंतिम):
संसार एक ठिकाना है, सच का ये ऐलान,
नाम नहीं कर्म बोलें, बन जाए पहचान।
अंत (आउट्रो):
आज है साँस, आज है मौका, आज ही कुछ कर ले,
कल का क्या है किसने जाना, दिल से जीवन भर ले।🎵 नया हिंदी गीत: “संसार एक ठिकाना” 🎵
मुखड़ा (कोरस):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
खाली हाथ हम आए थे, खाली हाथ ही जाना,
साँसों की इस भीड़ में, सच बस यही पहचाना।
अंतरा 1:
रेत पे सपने लिखते हैं, मिट जाते हैं हर बार,
वक़्त की एक लहर काफी, ढा दे सारा संसार।
आज जो अपने लगते हैं, कल यादों में ढल जाएँ,
जन्म और मृत्यु के बीच, कुछ पल ही रह जाएँ।
मुखड़ा (दोहराव):
संसार एक ठिकाना है, पल भर का ये साथ,
आज हँसी की धूप है, कल आँसुओं की रात।
अंतरा 2:
धन-दौलत और ये शोहरत, यहीं छूट जानी है,
साथ चलेगी बस माया, जो दिल से निभानी है।
घमंड का बोझ उतारो, दो दिन की ये काया,
कर्म वही अमर होते, जो जग में छोड़ जाए।
ब्रिज:
क्यों इतरा कर चलता है, दो दिन का मुसाफ़िर,
माया बाँट, प्रेम ही रख, बन जा थोड़ा सा बेहतर।
मुखड़ा (अंतिम):
संसार एक ठिकाना है, सच का ये ऐलान,
नाम नहीं कर्म बोलें, बन जाए पहचान।
अंत (आउट्रो):
आज है साँस, आज है मौका, आज ही कुछ कर ले,
कल का क्या है किसने जाना, दिल से जीवन भर ले।