काल दर्शी - भाग 2: रहस्य की गहराई (जारी)
अध्याय 26: बड़ा सवाल (जारी)
पंडित जी ने गहरी साँस ली। "बेटी, तुमने absolutely सही किया। Vikram का plan रोकना ज़रूरी था। लेकिन तुम्हारी यह empathy, यह उसके दर्द को समझने की कोशिश - यही तुम्हारी असली शक्ति है। यही तुम्हें एक अच्छा इंसान बनाती है।"
"लेकिन पंडित जी, अगर system ने पहले ही Vikram की मदद की होती, तो शायद यह सब होता ही नहीं। मैं सिर्फ symptoms को रोक रही हूँ, root cause को नहीं।"
पंडित जी मुस्कुराए। "तुम बिल्कुल सही कह रही हो। लेकिन बेटी, तुम अकेली नहीं हो जो पूरी system को बदल सके। हाँ, तुम अपने level पर awareness फैला सकती हो, लोगों की मदद कर सकती हो। लेकिन बड़े बदलाव के लिए collective effort चाहिए।"
"तो मुझे क्या करना चाहिए?"
"जो तुम already कर रही हो - compassion के साथ अपनी शक्ति का इस्तेमाल करो। लोगों को समझो, उनकी मदद करो। और हाँ, जहाँ possible हो, systemic changes के लिए भी काम करो। छोटे-छोटे कदम, बेटी। छोटे-छोटे कदम।"
तारा को थोड़ा better लगा। उसने decide किया कि वह Anjali और उसके बच्चों की मदद करेगी - financially और emotionally। यह कम से कम कुछ तो था।
अध्याय 27: नया perspective
अगले हफ्ते office में एक बड़ी meeting थी। Company के CEO खुद आने वाले थे - नए policies और changes announce करने के लिए।
Conference room में सभी employees gather हुए। CEO, Mr. Khurana, एक 55 साल के distinguished-looking व्यक्ति थे। उन्होंने presentation शुरू की।
"मुझे खुशी है कि हमारी company इस quarter में बहुत अच्छा perform कर रही है। Profits बढ़े हैं, client satisfaction high है।"
सब लोग clap कर रहे थे। लेकिन तारा ने Mr. Khurana को ध्यान से देखा। उनकी smile forced लग रही थी।
उसने concentrate किया...
"यह सब façade है। Company financially बहुत बुरी स्थिति में है। Next quarter में शायद हमें 30% employees को layoff करना पड़े। लेकिन अभी यह बता नहीं सकते। Stock prices गिर जाएंगे।"
तारा को झटका लगा। Layoffs? 30%? इसका मतलब उसके और उसके friends के साथ भी हो सकता था।
Meeting के बाद वह सोच में पड़ गई। क्या उसे यह बात किसी को बतानी चाहिए? प्रिया को? अनन्या को? ताकि वे prepare कर सकें?
लेकिन फिर उसे अपने नियम याद आए - लोगों की privacy respect करनी है। और यह confidential business information था।
उसने decide किया कि वह किसी को specific details नहीं बताएगी, लेकिन हाँ, सबको generally alert कर सकती है।
Lunch में उसने प्रिया और अनन्या से बात की।
"Guys, मैं यह नहीं कह सकती कि मुझे कैसे पता चला, लेकिन मुझे लगता है हमें financially prepare रहना चाहिए। Company की situation उतनी stable नहीं है जितनी दिख रही है।"
प्रिया ने surprised होकर कहा, "लेकिन अभी तो CEO ने कहा कि सब अच्छा चल रहा है।"
"मुझ पर trust करो। बस अपना resume update करके रखो, और expenses कम करने की कोशिश करो।"
अनन्या ने seriously सुना। "Tara, तुम्हारी बात में ज़रूर कुछ है। मैं तुम्हें जानती हूँ - तुम बिना reason के ऐसा नहीं कहोगी।"
अध्याय 28: परिवार का सच
उस weekend, तारा अपने माता-पिता से मिलने Gurgaon गई। वह उनसे दो महीने से मिली नहीं थी।
घर पहुंचते ही माँ ने गले लगा लिया। "अरे मेरी बच्ची! कितने दिनों बाद आई है। देख तो, कितनी कमजोर हो गई है।"
पापा hall में बैठे TV देख रहे थे। "आ गई बेटा? कैसी है?"
"बस ठीक हूँ, पापा।"
दोपहर का खाना family के साथ था। माँ ने तारा की सारी favorite dishes बनाई थीं।
"तो बेटा, office कैसा चल रहा है? कोई special news?" माँ ने पूछा।
"बस ठीक चल रहा है। हाँ, पिछले हफ्ते एक interesting incident हुआ था..." तारा ने Cyber Heights वाली बात बताई।
"क्या?! तू इतने danger में थी और हमें बताया भी नहीं?" माँ ने चिंता से कहा।
"माँ, सब ठीक हो गया ना। और वैसे भी police थी।"
पापा ने कहा, "बेटा, तूने बहुत brave काम किया। मुझे तुझ पर गर्व है।"
खाना खाते-खाते तारा ने notice किया कि पापा कुछ चिंतित लग रहे थे। माँ भी थोड़ी tense थी। कुछ तो था।
खाना खत्म होने के बाद जब तारा माँ के साथ किचन में बर्तन साफ़ कर रही थी, उसने पूछा, "माँ, क्या बात है? तुम दोनों कुछ परेशान लग रहे हो।"
माँ ने हिचकिचाते हुए कहा, "कुछ नहीं बेटा..."
"माँ, please। मुझे बताओ।"
माँ ने गहरी साँस ली। "बेटा, तेरे पापा की job... कुछ issues हैं।"
"कैसे issues?"
"Company में कुछ politics चल रही है। तेरे पापा के boss को कोई नया लड़का बहुत पसंद है। वह तेरे पापा को side-line कर रहा है। और अब rumors हैं कि कुछ senior employees को early retirement के लिए pressure किया जा रहा है।"
तारा का दिल डूब गया। पापा को इस उम्र में ऐसी tension!
"माँ, मैं पापा से बात करूं?"
"नहीं बेटा, वह तुझे tension नहीं देना चाहते। तुझ पर burden नहीं डालना चाहते।"
लेकिन तारा ने decide किया कि वह पापा से ज़रूर बात करेगी। शाम को जब पापा balcony में बैठे थे, तारा उनके पास गई।
"पापा, मुझे माँ ने बताया। Office की problem के बारे में।"
पापा ने हल्की सी मुस्कान दी। "तुझे tension लेने की ज़रूरत नहीं। ये सब चलता रहता है।"
"पापा, please। मुझे सब बताइए।"
पापा ने पूरी situation explain की। उनके boss, Mr. Verma, recently किसी को favor कर रहे थे - एक young manager को। और अब Mr. Verma चाहते थे कि पापा voluntarily retire हो जाएं।
"लेकिन पापा, आपकी retirement तो अभी तीन साल बाद है। और आपका performance हमेशा अच्छा रहा है।"
"बेटा, corporate world में performance से ज़्यादा politics मायने रखती है। मैं हमेशा अपने काम पर focus करता रहा, networking और politics नहीं की। शायद यही मेरी गलती थी।"
तारा को गुस्सा आ रहा था। पापा ने पूरी ज़िंदगी honestly काम किया, और अब यह सब?
"पापा, मैं कुछ कर सकती हूँ?"
"नहीं बेटा। तू अपने career पर focus कर। मैं manage कर लूंगा।"
लेकिन तारा ने अपने मन में decide कर लिया - वह definitely कुछ करेगी।
अध्याय 29: पापा के boss की असलियत
अगले सोमवार को तारा ने एक plan बनाया। उसे पापा के boss, Mr. Verma, के बारे में और जानना था।
उसने LinkedIn पर Mr. Verma को search किया। Profile तो impressive थी - 25 years का experience, कई companies में काम किया। लेकिन तारा को कुछ और चाहिए था।
उसने पापा से casually पूछा, "पापा, Mr. Verma आपकी company में कितने साल से हैं?"
"लगभग पांच साल।"
"और वह young manager जिसे वह favor कर रहे हैं, उसका नाम क्या है?"
"Rohit Malhotra। क्यों पूछ रही है?"
"बस ऐसे ही। मुझे जानने में interest है।"
तारा ने Rohit Malhotra को भी search किया। Interesting - वह Mr. Verma की पिछली company में भी था। तो connection पुराना था।
अगले शुक्रवार को तारा ने excuse बनाया कि उसे Gurgaon में एक meeting है। Actually, वह पापा की office के पास जाने वाली थी।
शाम को 6 बजे, जब employees निकल रहे थे, तारा building के बाहर एक café में बैठी। उसने पापा को बताया था कि वह पास में ही है और बाद में उनसे मिलेगी।
करीब 6:30 पर तारा ने Mr. Verma को building से निकलते देखा। वह Rohit के साथ थे, दोनों हंस-हंसकर बात कर रहे थे। तारा ने अपनी coffee छोड़ी और बाहर आ गई।
वे दोनों parking lot की ओर जा रहे थे। तारा ने cautiously उनके पीछे चलना शुरू किया, लेकिन safe distance बनाए रखी।
"Sir, आपको tension लेने की ज़रूरत नहीं है। Sharma ji खुद resign कर देंगे। मैंने उन पर अच्छे से pressure डाला है," Rohit कह रहा था।
तारा ने और पास जाने की कोशिश की। उसे Mr. Verma के विचार सुनने थे।
Mr. Verma ने कहा, "लेकिन Rohit, ध्यान रखना कि कोई legal issue ना हो। Sharma experienced आदमी है।"
तारा ने concentrate किया। Mr. Verma की आँखों पर focus किया...
"Sharma को निकालना ज़रूरी है। वह बहुत honest है, सवाल करता है। अगर उसने उस tender के बारे में ज़्यादा investigate किया, तो सारी kickback scheme खुल जाएगी। Rohit को promotion देना होगा - वह मेरे साथ है, चुप रहेगा।"
तारा को झटका लगा। तो यह corruption का मामला था! Mr. Verma किसी tender में kickback ले रहे थे, और पापा को इसलिए हटाना चाहते थे क्योंकि पापा को शक हो सकता था!
वह तुरंत वहाँ से हट गई। उसे proof चाहिए था। लेकिन कैसे?
अध्याय 30: investigation में तारा
अगले कुछ दिन तारा ने पूरी research की। उसने online उस company की recent tenders के बारे में जानकारी निकाली। एक specific tender था - एक बड़े software implementation project का। Value थी लगभग 50 crore।
तारा ने देखा कि यह tender एक relatively unknown company को मिला था। जब उसने उस company के बारे में search किया, तो पाया कि वह बहुत नई थी और इस scale का project handle करने का कोई proper experience नहीं था।
Suspicious।
फिर उसने उस company के directors के names देखे। उनमें से एक का surname था... Verma!
तारा ने और गहराई से खोदा। यह director, Mukesh Verma, Mr. Ajay Verma (पापा के boss) का भाई था!
तो यह था पूरा scene! Mr. Verma ने अपने भाई की company को favor किया था tender में। यह clear conflict of interest था।
लेकिन अब सवाल था - इसे expose कैसे करे?
तारा ने पंडित जी से advice ली।
"पंडित जी, मुझे फिर से एक moral dilemma का सामना है। मेरे पापा के boss corrupt हैं। मैंने पता लगाया है। लेकिन अगर मैं यह expose करूं, तो पापा की job की और भी risk है।"
पंडित जी ने सोचते हुए कहा, "बेटी, यह तुम्हारे पापा से discuss करने का matter है। उन्हें decide करने दो कि वह क्या करना चाहते हैं।"
"लेकिन अगर मैं उन्हें बताऊंगी, तो वे चाहेंगे कि मैं कुछ ना करूं। वे अपनी job की चिंता करेंगे।"
"तब भी, यह उनकी life है, उनका career। तुम्हें उन्हें involve करना होगा।"
तारा समझ गई। उसने उसी शाम पापा से बात करने का decide किया।
अध्याय 31: पापा से सच्ची बात
तारा ने पापा को call किया। "पापा, मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है। क्या आप घर पर हैं?"
"हाँ बेटा। क्या हुआ? सब ठीक तो है?"
"हाँ पापा। मैं अभी आ रही हूँ।"
दो घंटे बाद तारा Gurgaon पहुंच गई। पापा और माँ दोनों anxiously wait कर रहे थे।
"बेटा, इतनी रात को अचानक? कुछ problem है क्या?" माँ ने पूछा।
"माँ, पापा, मुझे आप दोनों से कुछ बताना है। Please, पहले मेरी पूरी बात सुनिए।"
तारा ने शुरू से अंत तक सब कुछ बताया - उसकी शक्ति के बारे में, कैसे उसे लोगों के मन की बात सुनाई देती है, और फिर Mr. Verma और उनके corruption के बारे में जो उसने पता लगाया।
पापा और माँ shocked थे। कुछ देर तक कोई कुछ नहीं बोला।
आखिरकार पापा ने कहा, "तारा... यह... यह तो..."
"मुझे पता है यह believe करना मुश्किल है। लेकिन पापा, मैं सच कह रही हूँ। और Mr. Verma के बारे में जो मैंने बताया, वह भी सच है। मेरे पास proofs हैं।"
माँ ने तारा का हाथ पकड़ा। "बेटा, यह शक्ति तुझे कैसे मिली?"
तारा ने मंदिर वाली पूरी story बताई।
पापा गहरी सोच में डूब गए। "अगर यह सच है... तो Mr. Verma ने company के साथ fraud किया है। यह बहुत serious matter है।"
"हाँ पापा। लेकिन मैं आपकी permission के बिना कुछ नहीं करूंगी। आप decide कीजिए।"
पापा ने कुछ देर सोचा। फिर बोले, "बेटा, अगर Mr. Verma सच में corrupt हैं, तो उन्हें expose करना ही सही है। भले ही मेरी job चली जाए। मैं अपनी ज़िंदगी भर honestly काम किया हूँ। मैं किसी corrupt person को shield नहीं कर सकता।"
माँ ने worried होकर कहा, "लेकिन फिर job का क्या होगा?"
"जो होगा देखा जाएगा। लेकिन गलत के साथ खड़ा नहीं हो सकता।"
तारा को अपने पापा पर गर्व हुआ। "पापा, मैं carefully सब कुछ plan करूंगी। आप पर कोई negative impact ना पड़े।"
अध्याय 32: योजना बनाना
अगले कुछ दिन तारा ने carefully plan बनाया। उसने सारे documents collect किए - tender details, company registration documents, director information।
फिर उसने एक detailed report तैयार की जिसमें clearly दिखाया कि:
Tender किसी inexperienced company को दिया गया
वह company Mr. Verma के भाई की है - clear conflict of interest
Tender process में irregularities थीं
लेकिन यह report किसे भेजे? Company के HR को? Board of Directors को?
प्रिया ने suggest किया, "तुझे एक lawyer से consult करना चाहिए। यह legal matter है।"
तारा ने एक corporate lawyer, Ms. Mehra, से appointment ली। उसने पूरी situation explain की (बिना अपनी शक्ति के बारे में बताए)।
Ms. Mehra ने documents देखे। "यह definitely एक serious case है। आपको यह report company के Board of Directors को भेजनी चाहिए। साथ ही, आप competition watchdog और anti-corruption authorities को भी inform कर सकते हैं।"
"लेकिन मेरे father की safety?"
"वह whistleblower protection के under आएंगे। Company उन्हें retaliate नहीं कर सकती। अगर की, तो यह illegal होगा।"
यह सुनकर तारा को थोड़ी relief मिली।
अध्याय 33: सच्चाई का खुलासा
तारा ने anonymously एक detailed complaint Board of Directors को भेजी। साथ ही, relevant authorities को भी copies भेजीं।
अगले हफ्ते के अंदर ही company में हलचल मच गई। Internal investigation शुरू हो गई।
Mr. Verma को suspend कर दिया गया। Rohit को भी questioning के लिए बुलाया गया।
पापा ने घर आकर बताया, "आज office में बहुत बड़ा drama हुआ। Mr. Verma को suspend कर दिया। Pata chala कि tender में कुछ irregularities थीं।"
माँ ने तारा की ओर देखा। तारा ने हल्की सी मुस्कान दी।
"लेकिन अजीब बात यह है," पापा ने continue किया, "मुझे HR ने बुलाया और पूछा कि क्या मैंने कभी कुछ suspicious notice किया था। मैंने हाँ में जवाब दिया - मुझे वह tender हमेशा से शक लगता था। HR ने कहा कि अगर मुझे कोई और information हो, तो share करूं।"
तो अब पापा investigation में witness बन गए थे - एक whistleblower के रूप में नहीं, बल्कि एक concerned employee के रूप में जिसे already कुछ शक था।
Perfect। तारा की planning काम कर गई थी।
दो हफ्ते बाद results आए। Internal investigation ने confirm किया कि Mr. Verma ने conflict of interest के साथ tender दिया था। उन्हें terminate कर दिया गया और legal action भी start हो गया।
Rohit को भी warning मिली - हालांकि उसके against कोई direct evidence नहीं था, लेकिन उसका close association Mr. Verma के साथ suspicious था।
और सबसे अच्छी बात - पापा को recognize किया गया उनकी integrity के लिए। उन्हें एक appreciation letter मिला और assurance दिया गया कि उनकी job secure है।
माँ रो रही थी - खुशी के आँसू। "बेटा, तूने अपने पापा की इज्ज़त बचा ली।"
तारा ने पापा को गले लगाया। "पापा, आप हमेशा मेरे hero रहे हैं। मैंने बस वही किया जो right था।"
अध्याय 34: शक्ति की नई समझ
इस पूरे episode के बाद तारा को अपनी शक्ति की एक नई understanding मिली। यह सिर्फ लोगों के मन की बात सुनने की शक्ति नहीं थी - यह justice दिलाने का, सच्चाई को सामने लाने का एक tool था।
लेकिन साथ ही, उसे यह भी एहसास हुआ कि इस शक्ति के साथ बहुत बड़ी responsibility आती है। हर बार उसे सोच-समझकर decide करना पड़ता था कि कब intervene करना है और कब नहीं।
एक शाम तारा अपनी balcony में बैठी थी, चाय पी रही थी और sunset देख रही थी। उसका phone बजा - प्रिया का message।
"Tara, कल office में एक नई लड़की join कर रही है। Shreya। मैंने सुना है वह बहुत talented है। तुझसे मिलवाऊंगी।"
अगले दिन office में जब Shreya से मिली, तो तारा को वह बहुत nice लगी। 26 साल की, confident, और friendly।
Lunch में जब वे तीनों - तारा, प्रिया, और Shreya - साथ बैठे, तो Shreya ने अपने बारे में बताया। "मैं Bangalore से हूँ। Wahan एक startup में काम कर रही थी। लेकिन वह company close हो गई, इसलिए यहाँ shift करना पड़ा।"
तारा ने casually उसे देखा। कुछ सोचे बिना, habit से उसने concentrate किया...
"मुझे नहीं पता मैं इन्हें बताऊं या नहीं। Bangalore में जो हुआ... वह harassment case... मेरे boss ने... लेकिन किसी ने मेरा support नहीं किया। Company ने उसका side लिया। मुझे ही resign करना पड़ा। यहाँ fresh start लेना है। लेकिन डर लगता है कि कहीं फिर से वही ना हो।"
तारा का दिल बैठ गया। Bechari लड़की इतना कुछ झेल कर आई है।
बाकी lunch में तारा ने Shreya को comfortable feel कराने की पूरी कोशिश की। उसने assure किया, "Shreya, यहाँ का environment बहुत अच्छा है। और हाँ, अगर कभी कोई भी problem हो, तो हम सब हैं। हमेशा याद रखना।"
Shreya की आँखों में आँसू आ गए। "Thank you, Tara। Tumhari baat sunke bohot अच्छा लगा।"
अध्याय 35: Shreya की दोस्ती
अगले कुछ हफ्तों में Shreya और तारा अच्छी friends बन गईं। Shreya काम में बहुत अच्छी थी और jaldi ही team की important member बन गई।
लेकिन एक दिन तारा ने notice किया कि उनके एक male colleague, Karan, Shreya के साथ थोड़ा ज़्यादा friendly हो रहा था। Unnecessary उसके पास जाता, बहाने बनाता।
तारा ने ध्यान से Karan को observe किया। उसके विचार सुनने की कोशिश की...
"यह नई लड़की अच्छी लग रही है। थोड़ा impress कर लूं। देखते हैं क्या होता है।"
अभी तक तो कुछ wrong नहीं था। Normal attraction।
लेकिन अगले कुछ दिनों में Karan का behavior थोड़ा uncomfortable हो गया। वह Shreya को lunch के लिए repeatedly पूछने लगा। जब Shreya politely refuse करती, तो वह persist करता।
एक दिन तारा ने Shreya को upset देखा।
"Shreya, क्या हुआ?"
Shreya ने हिचकिचाते हुए कहा, "Tara, वो Karan... वह मुझे थोड़ा uncomfortable feel करा रहा है। बार-बार मेरे पास आता है, personal questions पूछता है।"
"तूने उसे मना किया?"
"हाँ, लेकिन वह समझ नहीं रहा। और मुझे डर लगता है कि अगर मैंने complaint की, तो लोग सोचेंगे कि मैं overreact कर रही हूँ। Bangalore में भी यही हुआ था।"
तारा ने उसका हाथ पकड़ा। "Shreya, यह overreaction नहीं है। अगर तुझे uncomfortable feel हो रहा है, तो यह legitimate concern है। और मैं तेरे साथ हूँ।"
"सच में?"