Adhure ishq ki puri dastan - 16 in Hindi Love Stories by Nirali Ahir books and stories PDF | अधूरे इश्क की पूरी दास्तान - 16

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान - 16

मनीष ने पहली बार इतना डर महसूस किया था।अपनी पत्नी के गुजर जाने पर भी वो इतना कमजोर नहीं हुआ था जितना आज लग रहा था।

    उसके दिमाग मे एक ही बात थी कि अपने बच्चों को वो सुरक्षित कैसे रखे,कैसे इस मुसीबत से उसे दूर रखे?उसके दिमाग के कई सारे खयाल एक साथ आ जा रहे थे।

    तभी विष्णु बाइक की चाबी लेकर बाहर आया ओर बोला चल प्रीतम चलेगा साथ ?मनीष ने जल्दबाजी में बोला कहा जा रहे हो बेटा?
  
    अपने पापा को इसे रिएक्ट करता देख विष्णु बोला पापा में तो बस यू ही चक्कर लगाने की बात कर रहा था आप ऐसे क्यू रिएक्ट कर रहे हैं? जैसा आप सोच रहे है वैसा कुछ नहीं होगा।

    प्रीतम ओर मनीष ने एकदूसरे की ओर देखा तभी फिर से विष्णु ने कहा ऐसे क्या देख रहो हो पीछा करने वाले को मैने भी देखा था मेरी भी आंखे है भई।

   प्रीतम ने डांटते हुए कहा जब तुम्हे सबकुछ पता ही है तो क्यू चाबी उठाकर चले आए क्यों पापा को तंग कर रहे हो?

   सॉरी सॉरी में बस यू ही इधर पास में ही जाने के लिए बोल रहा था अगर आप लोग मन कर रहे हैं तो नहीं जाता।

   इस तरफ नीलिमा ओर बाकी सब लोग बैठकर बाते कर रहे थे तभी सुमित के फोन पे अनजान नंबर से कॉल आया सुमित कॉल उठाकर बाहर चला गया।

    सुमित बाबू अनुराग बोल रहा हु।उस तरफ से कॉल उठाते ही आवाज आई।

   हा बोलो क्या पता चला?सुमित ने पूछा।

   आपका शक सही था ये सारे फोटोग्राफ्स नकली है उसे इस तरह से बनाया गया है ओर ये काम एक बदमाश का है जिसका नाम बिल्लू है। अनुराग ने सारी इनफार्मेशन देते हुए कहा।

   उस बदमाश से किसने काम करवाया ये पता चला? सुमित ने परेशान होते हुए कहा।

    इतने हाथ पैर मारने के बाद इतना पता चला है सुमित बाबू पूरी इनफार्मेशन के लिए थोड़ा ओर वक्त चाहिए।अनुराग ने कहा।

    जितने हाथ पैर मारने पड़े मारो। जो करना पड़े करो पर मुझे इनफार्मेशन चाहिए।सुमित ने कड़क आवाज में कहा।

    जी सुमित बाबू !अनुराग ने ये कहते हुए कॉल काट दी।

   सुमित गहरी सोच में पड़ गया, वो यू ही खड़ा था तभी बेला आई ओर बोली क्या हुआ क्या सोच रहे हो?

    कुछ नहीं बस यू ही।ये कह कर सुमित चुप हो गया ओर फिर अचानक बोल पड़ा मुझे लगता हैं हमे नीलिमा की शादी जल्द ही करा देनी चाहिए।

    बेला सुमित का मुंह ताकती रही ओर बोली क्यों कोई ऐसी बात है क्या ? 

    सुमित ने कहा ऐसी कोई बात नहीं है बस में अपनी बेटी की खुशियां उसकी झोली में डाल देना चाहता हु।

    इतना बोलते ही उसकी आंखें भर आई तभी बेला बोली में समझती हु आपकी परेशानी एक पिता के लिए एक बेटी उसका सबकुछ होती है उसका मान सम्मान,गौरव,सबकुछ बस कभी कभी बचे ही इस बात को नहीं समझ पाते पर हमारी बेटी बहुत समझदार है।

    ये बाते चल हीं रही थी कि फिर से सुमित का फोन बजा उसने देखा तो इस बार मनीष था,उसने कॉल उठाई और हेलो बोले उससे पहले ही उस तरफ से आवाज आई हेलो सुमित जल्दी से नीलिमा को लेकर सिटी हॉस्पिटल आ जाओ विष्णु ओर प्रीतम....इससे आगे मनीष बोले उससे पहले उसका गला भर आया ओर वो चुप हो गया बस हल्की सिसकी की आवाज सुनाई दी और कॉल कट गई।

   सुमित भी बेबाकला होकर चिल्लाने लगा ये देखे बिना की कॉल कट चुकी है, मनीष क्या हुआ प्रीतम ओर विष्णु को? हॉस्पिटल में क्यों हो? पर कोई आवाज ना आई फिर उसे ध्यान आया कि कॉल कट चुकी है।

   
    उसकी आवाज सुनकर आकाश बाहर आया ओर बोला मामी क्या हुआ मामा इतने परेशान क्यू है?

   तभी सुमित बोला आकाश जल्दी से कार स्टार्ट करो हमे सिटी हॉस्पिटल जाना है नीलिमा को लेकर प्रीतम को कुछ हुआ है साथ में विष्णु को भी पर क्या ये पता नहीं जल्दी करो वक्त नहीं है।

   एक ही सांस में सुमित ने पूरी बात खतम की ओर कमरे दौड़ गया ओर नीलिमा को लेकर बाहर आया सब सिटी हॉस्पिटल की ओर तेजी से बढ़ने लगे ।


    वहां जाकर देखा तो मनीष i.c.u. के बाहर नीचे फर्श पे दीवाल से सटकर सहमा हुआ बैठा था उसके हाथ ओर कपड़े खून से लथपथ थे ।

 
    ये नजर देख सब दौड़े ओर पास आकर उसे संभालते हुए सुमित बोला मनीष ये सब क्या है? ये.....ये खून कैसा?

    तभी नीलिमा की नजर i.c.u.के अंदर लेटे विष्णु ओर प्रीतम की ओर गई।प्रीतम के मुंह पे ऑक्सीजन मास्क लगा था,मंद मंद सी सांसे चल रही थी शरीर पर कई घाव थे,पूरा बदन सूजा हुआ लग रहा था ओर बिलकुल बेजान सा पड़ा था।बाजू में लेते विष्णु का भी यही हाल था ये देख नीलिमा वही पर धम्म से गिर पड़ी।