my lord in Hindi Drama by ziya books and stories PDF | मेरे हुजूर

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मेरे हुजूर

भाग 1

रात के करीब साढ़े दस बजे का समय था। हवेली के बाहर हल्की बारिश हो रही थी। आसमान में बिजली चमकती और फिर सब कुछ कुछ पल के लिए सन्नाटे में डूब जाता।
शहर के सबसे रसूखदार और अमीर खानदान की यह पुरानी हवेली आज फिर रौशनी से जगमगा रही थी, लेकिन भीतर का माहौल किसी तूफ़ान से कम नहीं था।
हवेली के अंदर, बड़े हाल में, परिवार के सभी सदस्य बैठे थे। माहौल में तनाव साफ महसूस हो रहा था।
“मैंने फैसला कर लिया है,” भारी आवाज गूंजी।
यह आवाज थी अयान मलिक की — शहर का सबसे ताकतवर बिजनेसमैन, जिसकी एक हां पर करोड़ों का खेल पलट जाता था।
सबकी निगाहें उसी पर टिकी थीं।
“निकाह अगले महीने होगा।”
कमरे में खामोशी छा गई।
सामने बैठी लड़की की आंखों में हैरानी और डर साफ दिख रहा था। उसका नाम था ज़ारा सिद्दीकी।
वह इस हवेली में काम करने वाले पुराने मैनेजर की बेटी थी। सीधी-सादी, पढ़ने में होशियार और सपनों से भरी लड़की।
लेकिन आज वह इस हवेली में मेहमान नहीं, बल्कि फैसले का हिस्सा बनकर बैठी थी।
“मगर… ये अचानक?” ज़ारा की मां ने हिम्मत करके पूछा।
अयान की नजरें उनकी ओर उठीं — ठंडी, कठोर, बिना किसी भाव के।
“आपके पति ने खुद ये रिश्ता मांगा था। अब पीछे हटने की कोई वजह नहीं।”
ज़ारा का दिल धड़क उठा।
उसे याद आया — कुछ दिन पहले उसके अब्बू ने बहुत परेशान होकर कहा था कि कंपनी घाटे में जा रही है, नौकरी जाने का डर है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
लेकिन उसे नहीं पता था कि उस परेशानी का हल उसकी शादी बन जाएगा।
ज़ारा ने धीमी आवाज में कहा,
“मुझे… थोड़ा वक्त चाहिए।”
अयान ने पहली बार उसे गौर से देखा।
उसकी आंखों में डर था, लेकिन साथ ही अजीब सी मजबूती भी।
कुछ पल तक वह चुप रहा, फिर बोला—
“एक हफ्ता। बस।”
और वह उठकर कमरे से बाहर चला गया।
उस रात ज़ारा सो नहीं पाई।
उसके दिमाग में बार-बार वही सवाल घूम रहा था—
क्या वह अपनी जिंदगी का फैसला खुद कर पाएगी? या हालात उसे मजबूर कर देंगे?
उधर, हवेली की ऊपरी मंजिल पर, अपने कमरे में, अयान खिड़की के पास खड़ा था।
बारिश की बूंदें शीशे पर गिर रही थीं।
उसके दोस्त और बिजनेस पार्टनर कबीर ने पूछा—
“तू सच में उससे शादी करेगा? तू तो शादी के नाम से ही दूर भागता था।”
अयान ने सिगरेट का धुआं बाहर छोड़ा।
“ये शादी नहीं… सौदा है।”
“सौदा?”
“उसके पिता की वजह से हमारी कंपनी का बड़ा नुकसान हुआ है। अगर वो परिवार हमारी तरफ रहेगा, तो मामला संभल जाएगा।”
कबीर ने हल्की मुस्कान दी।
“लेकिन लड़की खूबसूरत है। कहीं दिल ना हार बैठे।”
अयान की आंखों में ठंडक उतर आई।
“मुझे किसी से प्यार नहीं हो सकता।”
उसे अपने अतीत की याद आ गई—
एक लड़की… एक धोखा… और उसके बाद टूट चुका भरोसा।
अगले दिन कॉलेज में ज़ारा की दोस्त सना ने उसे परेशान देखा।
“क्या हुआ? तू इतनी चुप क्यों है?”
ज़ारा की आंखें भर आईं।
“मेरी शादी तय कर दी गई है।”
सना चौंक गई।
“क्या? तू तो आगे पढ़ना चाहती थी!”
“मैं अभी भी चाहती हूं…”
“तो मना कर दे!”
ज़ारा हल्का सा मुस्कुराई।
“हर किसी के पास मना करने की आज़ादी नहीं होती, सना।”
उधर, अयान की जिंदगी भी उतनी आसान नहीं थी।
कंपनी में लगातार दुश्मनों की नजर थी। कोई अंदर से उसे गिराने की कोशिश कर रहा था।
उसकी सेक्रेटरी ने खबर दी—
“सर, किसी ने हमारे अगले प्रोजेक्ट की फाइल लीक कर दी है।”
अयान की मुट्ठियां भींच गईं।
“पता लगाओ कौन है। और याद रखो… गद्दार को मैं माफ नहीं करता।”
शाम को अचानक ज़ारा के घर पर महंगी कार आकर रुकी।
बाहर अयान खड़ा था।
पूरे मोहल्ले की नजरें उसी पर टिक गईं।
ज़ारा हैरान रह गई।
“आप यहाँ?”
“तुमसे बात करनी है।”
वे दोनों घर के बाहर ही खड़े रहे।
अयान ने सीधे कहा—
“अगर तुम ये शादी नहीं करना चाहती, तो साफ कह दो।”
ज़ारा ने उसकी आंखों में देखा।
पहली बार उसे महसूस हुआ कि यह आदमी उतना ठंडा नहीं जितना दिखता है।
उसने धीमे से कहा—
“अगर मैं मना कर दूँ, तो मेरे परिवार का क्या होगा?”
अयान कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
“तुम्हारे परिवार को कोई नुकसान नहीं होगा।”
“लेकिन आपकी कंपनी?”
अयान हल्का सा मुस्कुराया।
“कंपनी मैं संभाल लूंगा। सवाल है… तुम क्या चाहती हो?”
ज़ारा ने जवाब नहीं दिया।
क्योंकि उसे खुद नहीं पता था।
रात को वह छत पर बैठी आसमान देख रही थी।
उसे एहसास हुआ—
जिंदगी अचानक मोड़ ले चुकी है।
और सामने खड़ा आदमी… उसका दुश्मन है या उसकी किस्मत?
उधर अयान भी सोच रहा था—
क्यों वह लड़की उसके दिमाग से निकल नहीं रही?
क्यों उसकी आंखों का डर उसे बेचैन कर रहा है?
और उसी वक्त…
किसी अंधेरे कमरे में, एक आदमी फोन पर बोला—
“अयान मलिक जल्द ही बर्बाद होने वाला है। शादी हो या बिजनेस… सब खत्म कर दूँगा।”
फोन कट गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
उधर, हवेली की बालकनी में खड़े अयान को अचानक किसी अनजाने खतरे का एहसास हुआ।
और उसने खुद से कहा—
“जो भी मेरे रास्ते में आएगा… खत्म कर दूंगा।”
लेकिन उसे नहीं पता था—
इस बार खतरा उसके बिजनेस को नहीं…
उसके दिल को होने वाला था।


जारी रहेगा… (भाग 2 में)