Present Time – Bedroom
Shristi दूसरी तरफ मुंह करके बिस्तर पर लेटी थी। उसकी सांसें धीमी थीं, लेकिन उसका मन फिर भी past memories में उलझा हुआ था। उसकी आंखों में खामोशी थी, पर मन में यादों की हलचल थी। Past का डर, नफरत और दर्द सब एक साथ लौट आए थे। Shristi की यादें अचानक उसे सुहागरात की रात की ओर ले गईं…
Past Time – Suhagrat Night
Shristi अपने कमरे में बैठी थी। हर लड़की की तरह उसके भी सपने थे – हसीन, प्यार भरे, उसकी पहली रात की उम्मीदें।
Kabir कमरे में आया। उसका चेहरा गंभीर, आँखों में नफरत साफ़ झलक रही थी।
Kabir (गहरी, कड़क आवाज़ में) बोला -
घूंघट हटाओ… और अपना चेहरा दिखाओ।
Shristi ने धीरे-धीरे घूंघट हटाया। Kabir की नजरें उस पर ठहर गईं। उसका दिल धड़क उठा, पर उसकी आँखों में अब भी नफरत थी।
Kabir (धीमे से, खुद से सोचते हुए) बोला -
ये… ये तो Shristi है… ये वही लड़की जो मेरे सामने… ये… ये मेरे साथ धोखा कर रही है?
Kabir को लगता था कि Shristi ने उसके साथ उसका विश्वास और इज्जत तोड़ने की कोशिश की है। वो चाहती तो शादी के लिए मना कर सकती थी। उसकी आंखों में गुस्सा, दिल में झुंझलाहट थी।
Shristi (धीमे, आश्चर्य और घबराहट में) बोली -
Kabir जी… क्या हुआ? मैं… मैं तो बस…
Shristi का मन डर और confusion से भर गया। उसे नहीं पता था कि Kabir की नज़र और उसके गुस्से ने उसे इतना डराएगा।
Present Time – Bedroom
Shristi अपने दाहिनी तरफ मुंह करके बिस्तर पर लेटी थी। Past memories उसके दिमाग में घूम रही थीं। Kabir ने चुपचाप उसे देखा। Past की वो रात, Kabir की नफरत और उसके अपने डर ने Shristi को आज भी खामोश और दूरी बनाए रखने पर मजबूर किया था। दोनों एक ही बिस्तर पर थे, पर दिलों में दूरी और नज़दीकी के बीच लड़ाई थी। Kabir ने धीरे से खुद को पीछे किया, ताकि Shristi को थोड़ी राहत मिले। उसकी आंखों में regret और guilt झलक रहा था।
Shristi (अंदर से, डर और दर्द के बीच) बोली -
आज भी… वही डर… वही बेचैनी… कैसे कभी ये सब खत्म होगा?
Past Time – सुहागरात का कमरा
कमरे में दीये जल रहे थे, फूलों की खुशबू थी… पर हवा में प्यार नहीं, सन्नाटा था। Kabir की आँखों में गुस्सा अब काबू से बाहर हो चुका था। उसकी साँसें तेज़ थीं। Kabir का गुस्सा फूट पड़ा। वो सोच चुका था कि उसके साथ धोखा हुआ है… और जब इंसान सोच ले कि उसे धोखा मिला है, तब वह सच सुनने की हालत में नहीं रहता। Kabir ने अचानक Shristi का हाथ बहुत कसकर पकड़ लिया। इतनी ज़ोर से कि Shristi को दर्द होने लगा। उसने shristi को अपनी और खींच लिया। उसकी कमर को अपनी बाहों में भर लिया। Shristi घबरा गई।
Shristi (दर्द और डर में, काँपती आवाज़ में) बोली -
आह… Kabir जी… दर्द हो रहा है… please…
उसकी आँखों से मोटे‑मोटे आँसू बहने लगे। वह समझ ही नहीं पा रही थी कि उसका कसूर क्या है।
Kabir (गुस्से से भरी, सख़्त आवाज़ में) बोला -
तुमने मेरे साथ धोखा किया है, Shristi… और उसकी सज़ा तुम्हें मिलकर रहेगी।
उसकी पकड़ और सख़्त हो जाती है, फिर वह शब्दों से वार करता है।
Kabir बोला -
मैं तुम्हारी ज़िंदगी को नर्क बना दूँगा… ऐसा नर्क कि तुम मुझसे मौत की भीख माँगोगी।
अगले ही पल, जैसे किसी झटके में Kabir ने उसे छोड़ दिया। वो bed पर धड़ाम से गिरी। वो एक पल के लिए रुका… फिर बिना पीछे देखे कमरे से बाहर चला गया। दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया।
Shristi ज़मीन पर बैठ गई। उसके हाथ काँप रहे थे। आँसू रुक नहीं रहे थे। उस रात Shristi का सिर्फ़ हाथ नहीं पकड़ा गया था… उसका भरोसा, उसके सपने और उसका आत्मसम्मान—सब टूट गया था।
Shristi (रोते हुए, खुद से) बोली -
मैंने… मैंने क्या किया था? इतना बड़ा जुर्म…?
कमरे में सिर्फ़ उसकी सिसकियाँ थीं।
Present Time – Bedroom
Shristi की पलकों से आँसू चुपचाप तकिये में उतर रहे थे। वो आज भी उसी दर्द को जी रही थी। यही वो रात थी… जिसने Shristi के दिल में Kabir के लिए थोड़ी सी नफरत बो दी थी। और यही वो ज़ख्म था, जो आज भी भरा नहीं था। Kabir दूसरी तरफ जाग रहा था। उसे पता नहीं था कि Shristi किस दर्द से गुजर रही है… पर आज, पहली बार, उसे अपनी कही बातों का असली मतलब समझ आने लगा था।
Kabir धीरे-धीरे Shristi की ओर खिसका। उसका दिल अभी भी उस past घटना की याद से भारी था। Shristi ने उसे देखा, लेकिन अचानक दूर की ओर पलटी और गद्दे पर और दूर चली गई। Kabir ने सोचा—
Kabir को Shristi को अपने सीने में सुलाने की आदत पड़ गई थी। चाहे वह उसे खुद से दूर करने की कोशिश करे, उसका शरीर और दिल पहले जैसी routine चाहते थे। Kabir चुपचाप उसे देखते हुए सोचने लगा कि कैसे वह उसे सुरक्षित महसूस करवा सकता है।
Past Time – एक साल पहले
Shristi सिसकते हुए सो गई थी। Kabir कमरे में आया और देखा कि वह सो चुकी थी। Kabir भी कमरे में ही सोफे पर लेट गया। पर अचानक उसे Shristi की सिसकियों की आवाज़ सुनाई दी।
Kabir (झुंझलाते हुए, बड़बड़ाते हुए) बोला -
कौन सो रहा है? इतनी देर तक क्यों रो रही है?
Kabir ने धीरे-धीरे उसकी तरफ देखा। Shristi ने उसे बताया कि उसके सीने में तेज़ दर्द है और साथ में माइग्रेन भी हो रहा है। उसे Kabir की जरूरत थी।
Shristi (कमजोर आवाज़ में) बोली -
Kabir जी… मुझे… मुझे तुम्हारी जरूरत है… मेरे सीने में बहुत दर्द है… और माइग्रेन भी…।
Kabir झुंझला गया, लेकिन उसने धीरे-धीरे अपनी protective habit का ख्याल रखा। वह उसके पास आया और उसकी side में bed पर लेट गया।
Present Time – Bedroom
Kabir अब भी अपनी आदत से Shristi के पास खड़ा था। वह महसूस कर रहा था कि उसका instinct अब भी वही कह रहा है—Shristi को पास रखना ही सही है। Shristi अभी भी दूर थी, लेकिन उसकी साँसों में वही दर्द और vulnerability झलक रही थी। Kabir ने धीरे-धीरे उसे देखा और खुद को उसके पास रखा।
Past की वो रात, उसकी protective habit और present की दूरी… दोनों ने Kabir को सिखा दिया कि Shristi को पास लाना सिर्फ उसकी आदत नहीं, उसकी जिम्मेदारी थी। Shristi ने धीरे-धीरे पलटा, Kabir की warmth और presence को महसूस किया, लेकिन अब भी कुछ दूरी बनी हुई थी।
To Be Continued…
Kabir की protective habit और past guilt के बीच कैसे balance बनेगा?
Shristi अब भी Kabir से पूरी तरह trust नहीं कर रही – कब यह distance टूटेगा?
क्या Kabir कभी Shristi को समझा पाएगा कि उसने उसका past trauma समझकर protect किया है?
आगे कैसे उनकी forced proximity और emotional bonding विकसित होगी?
Aapko kya lagta hai -
Kabir Shreya ki life sach me hell bana dega? A ya B likh kar jaiye.”
“shristi kya karegi?
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Kyunki main daily update karti hoon.
Or Jo log yahan tak padh
chuke hain aur chup ho… ek ❤️ drop karke jao. Main dekhna chahti hoon kitne silent readers hain.