Wedding of Wounds - 6 in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | ज़ख्मों की शादी - 6

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ज़ख्मों की शादी - 6

Past Time – Suhagrat Night


कमरा अंधेरे में था, हल्की मोमबत्तियों की रोशनी थी। फूलों की खुशबू थी, पर माहौल में कोई खुशी नहीं थी। Kabir धीरे-धीरे Shristi के पास बिस्तर पर लेट गया। Shristi पहले से ही दर्द और तनाव से तंग थी। Kabir Shristi के पास लेटा, पर Shristi का pain अब बढ़ चुका था। शादी की पहली रात ही उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह रोने लगी। Shristi उठकर बैठ गई। एक हाथ से सीने को दबा रही थी, और दूसरा हाथ सिर पर रखते हुए कराह रही थी।


Shristi (कष्ट और दर्द में, रोते हुए) बोली - 

आह… दर्द… दर्द बहुत हो रहा है… Kabir जी… मुझे… कुछ मत कहिए… बस मुझे छोड़ दीजिए…।


Kabir उसकी हालत देखकर irritate हुआ, पर गुस्से के पीछे उसकी चिंता छिपी थी। उसने जल्दी से pain killer पकड़ा दिया।


Kabir (गुस्से में, irritate होकर) बोला - 

लो… ये लो… खा लो। जल्दी ठीक हो जाओ वरना और भी बड़बड़ाऊँगा।


Shristi ने pain killer खा लिया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। उसका सिर, सीना और माइग्रेन उसे परेशान कर रहे थे। Kabir irritate था… पर उसे पता था कि Shristi सचमुच दर्द में है। उसे अब अपने गुस्से को control करके उस दर्द से लड़ना होगा।

Kabir कमरे में लेटा हुआ था, उसका चेहरा गंभीर, आँखें आधी बंद थीं। धीरे-धीरे उसे नींद लग गई। Shristi पास बैठी थी। उसका दर्द अब और बढ़ गया था। सीने में दर्द और माइग्रेन उसे तंग कर रहे थे।

Kabir अपनी तरफ मुंह करके सो गया। लेकिन Shristi अपने आप पर गुस्सा कर रही थी। दर्द सहन नहीं हो रहा था। Shristi गुस्से में उठकर pain killer की डिब्बी उठाई। उसने सारी गोलियाँ हाथ में लीं और मुंह में भरने ही वाली थी। Shristi का गुस्सा और helplessness उसे इस कदर उकसा रहा था कि उसने एक पल के लिए सोचा कि दर्द से छुटकारा पाने के लिए सब कर देगी। Kabir ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।


Kabir (गुस्से और डर से) बोला - 

क्या कर रही हो तुम! ये क्या कर रही हो? गोलियाँ मत लो!


Shristi ने रोते हुए हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन Kabir ने सभी गोलियाँ फेंक दीं।


Shristi (रोते हुए, दर्द में) बोली - 

Kabir जी… मुझसे… मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा…


Kabir ने झुंझलाकर देखा, पर फिर उसकी protective side जाग गई। उसने Shristi को उठाया और अपने सीने से कसकर लगा लिया। Kabir अब helpless था। वह जानता था कि Shristi को अकेला नहीं छोड़ सकता। उसकी नफरत और गुस्सा अब protective instinct में बदल गए। Shristi अब अपने आँसुओं और दर्द के साथ उसके सीने से चिपकी रही। उसकी सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। Kabir ने धीरे-धीरे उसे शांत करने की कोशिश की।


Kabir (धीमे, protective tone में) बोला - 

बस… चुप हो जाओ। मैं हूँ न… मैं तुम्हे नुकसान नहीं पहुँचने दूंगा।


Shristi का शरीर काँप रहा था। वह रोते हुए धीरे-धीरे Kabir के सीने से सटी।


Present Time – Bedroom


Kabir चुपचाप बिस्तर पर बैठा था। उसकी नजरें Shristi पर थीं, जो दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी। कमरे में सन्नाटा था, सिर्फ उनकी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।


Kabir (धीमे, खुद से सोचते हुए) बोला - 

बस… एक बार आके मेरे सीने से  लग जाओ, Shristi…तुम तो मेरा शुकून ही छीन रही हो...।


Kabir की आवाज़ में थकान और हल्की मजबूरी थी। उसके मन में guilt और longing दोनों झलक रहे थे।


Shristi (दूसरी तरफ से, क्रोध और दर्द के साथ) बोली - 

क्यों लग जाऊँ? इतना सब कुछ तो हो गया। आपने तो अपने शरीर की भूख भी मुझसे मिटा ली… किसी काम का नहीं छोड़ा… अब मैं क्या करूँगी मैं आपके पास आके? हवश तो पूरी कर ली आपने अपनी।


Shristi की आवाज़ में गुस्सा, निराशा और दर्द के मिश्रण थे। वह अभी भी Kabir पर भरोसा नहीं कर रही थी। Kabir की आँखों में झुंझलाहट और regret था। वह जानता था कि Shristi को अपने मन की बातें करने का हक़ था… और फिर भी उसका दिल चाहता था कि वह उसे पास करे।


Kabir (धीमे, खुद को समझाते हुए, लेकिन tone में softness लेते हुए) बोला - 

मैं जानता हूँ… मैंने बहुत कुछ किया… मैंने तुम्हें दर्द दिया… पर अब… बस एक बार… मेरे पास आ जाओ… मेरी गोदी में… बस इतना…


Shristi ने पलट कर उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में रोष था, पर दिल की एक कोमल आवाज़ भी झलक रही थी।


Shristi (धीमे, लगभग फुसफुसाते हुए) बोली - 

Kabir जी… मैं… मैं… अभी नहीं…


Kabir चुप रहा। उसने distance बनाए रखा, लेकिन उसके हाथ और नजरें उसे silently invite कर रही थीं। Present की यह रात, पुराने ज़ख्मों और नई नफरत के बीच दोनों को खींच रही थी। प्यार, डर, गुस्सा और longing – सब कुछ एक साथ उनकी चुप्पी में मौजूद था।


To be continued 


Shristi ने Kabir से इतनी दूरी क्यों बनाई – सिर्फ past trauma या अभी भी distrust?

Kabir की भावनाएँ अब क्या हैं – सिर्फ desire या guilt और responsibility भी?

क्या Shristi धीरे-धीरे Kabir की protective nature को समझ पाएगी?

Kabir और Shristi के बीच emotional bonding कब और कैसे शुरू होगी?

आगे की रात में क्या Kabir धीरे-धीरे Shristi का भरोसा जीत पाएगा या फिर नफरत बढ़ेगी?


Aapko kya lagta hai - 

Shristi kabir ko maf karegi ya nahin, A ya B me comment jaroor Karen....

Kya kabir ko gussa kam Karna chahiye 


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Kyunki main daily update karti hoon.

Or Jo log yahan tak padh chuke hain aur chup ho… ek ❤️

drop karke jao. Main dekhna chahti hoon kitne silent readers hain.