The beloved wife of two husbands - 12 in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | दो पतियों की लाडली पत्नी - 12

Featured Books
Categories
Share

दो पतियों की लाडली पत्नी - 12

कमरा हल्की धूप से भरा हुआ
कुर्सी पर रात से जलता टेबल लैंप अब भी टिमटिमा रहा था।
श्रेया धीरे-धीरे करवट बदलते हुए जागी… और जैसे ही उसकी आँखें खुलीं—
उसका दिल एक पल को रुक गया।

वो पूरी तरह करण के सीने से लिपटी हुई थी…।
और पीछे से कबीर की मज़बूत बाहें उसकी कमर को थामे थीं।
तीनों की साँसे एक दूसरे से टकरा रही थीं…
गरमाहट… सुरक्षा… और एक अजीब-सी शांति कमरे में तैर रही थी।
श्रेया धीरे से आंखें मलती है, फिर नीचे देखती है और धीरे से फुसफुसाती है।

श्रेया (चौंक कर, पर प्यारे अंदाज़ में) बोली - 
हे भगवान… मैं इस तरह सो गई थी?

करण, जिसकी नींद हल्की थी, उसकी हलचल से जाग गया।
वो नीचे देखकर मुस्कुराया।

करण (धीमे स्वर में) बोला - 
हाँ… कल की रात तुम बहुत डर गईं थीं न। बस आकर ऐसे ही सो गईं… हमने भी हटाया नहीं।

कबीर अब भी आधी नींद में था।
उसका चेहरा श्रेया के कंधे पर टिका हुआ था।
कबीर ने बिना आँखें खोले कहा—

कबीर (नींद भरी, पर गहरी आवाज़ में) बोला - 
हटाता कौन? तुम्हें पता भी है, तुम कितनी cute लग रहीं थीं… बस हम दोनों देखते ही रह गए।

श्रेया का चेहरा गहरा लाल हो गया।
वो हल्का सा खुद को छुड़ाने लगी।
लेकिन—
करण ने उसकी कलाई पकड़ ली।
कबीर ने उसकी कमर पर पकड़ थोड़ा और टाइट कर दी।
दोनों एक साथ बोले—

करण: "रुको।"
कबीर: "हिलना मत।"

श्रेया और भी लाल पड़ गई।
करण ने उसके माथे पर हल्की-सी उंगली से छूकर कहा—

करण बोला - 
कल अगर हम एक पल भी लेट हो जाते, तो…

उसने बात अधूरी छोड़ दी, नज़रें झुका लीं।
कबीर ने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा—

कबीर बोला - 
श्रेया… तुम हमारी ज़िम्मेदारी हो। खुद को ऐसे खतरे में मत डाला करो। तुम्हें खोने का डर… बहुत बुरा लगता है।

श्रेया की आँखें नम हो गईं।
वो धीरे से बोल पड़ी—

श्रेया (टूटती आवाज़ में) बोली - 
मुझे लगा आप लोग मुझ पर गुस्सा होंगे…।

करण हंसा।

करण बोला - 
बहुत गुस्सा है… पर उससे भी ज्यादा प्यार।

कबीर ने उसके बाल पीछे करके कहा—

कबीर बोला - 
और जब तुम ऐसे हमारे बीच सोती हो न… तो हमारा गुस्सा पिघल जाता है।

श्रेया ने शरमाकर अपनी आँखें बंद कर लीं।
श्रेया वापस करण के सीने में छिप गई…।
कबीर ने पीछे से उसे फिर से पकड़ लिया…।
और कुछ देर तक तीनों बिना कुछ कहे, बस एक-दूसरे की शांति और गर्माहट महसूस करते रहे।
 
सुबह का माहौल—तीनों अभी-भी बिस्तर पर लेटे हुए
धीमी सी हवा परदे हिला रही थी।
श्रेया अब करण और कबीर के बीच थोड़ी दूर बैठ गई थी, पर उसके गाल अब भी लाल थे।
करण धीरे से उठ बैठा।
कबीर ने एक लंबी सी अंगड़ाई ली।

करण (हाथ जोड़कर, ड्रामेबाज अंदाज़ में) बोला - 
प्यारी श्रेया जी… क्या आपको ज़रा-सा भी अंदाज़ा है कि कल हम दोनों का क्या हाल हुआ था?

कबीर (गंभीर बनने की acting करता हुआ) बोला - 
दिल दुखा है हमारा… दिल!

श्रेया ने तकिया उठाकर दोनों को मारने का नाटक किया।

श्रेया (गुस्सा दिखाते हुए) बोली - 
अच्छा जी? आप दोनों ने तो मुझे कल डाँटा भी था।

करण ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा—

करण बोला - 
हाँ, डाँटा था… क्योंकि डर लग गया था।

कबीर आगे झुक कर बोला—

कबीर बोला - 
अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो?

श्रेया चुप हो गई।
अचानक उसका चेहरा उदास हो गया।
श्रेया हल्की आवाज़ में बोली—

श्रेया बोली - 
मुझे लगा...
 मैं सच में गलत हूँ। मेरी वजह से आप दोनों परेशान हो गए।

करण उसकी ठोड़ी ऊपर उठाता है।

करण (softly) बोला - 
गलत? अगर सच के लिए लड़ना गलत होता… तो हम इंजीनियर ही नहीं होते।

कबीर पास आकर उसकी पीठ सहलाता है।

कबीर बोला - 
श्रेया… तुम्हारा जनून, तुम्हारा डर, तुम्हारा सच—ये सब हमें और ज्यादा तुम्हारे करीब लाता है।

श्रेया की आँखों में हल्की नमी आ गई।
श्रेया ने धीरे-धीरे दोनों का हाथ पकड़ा।

श्रेया (धीमे, दिल से) बोली - 
पर मुझे अजीब लगता है… कि मैं आप दोनों को इतनी तकलीफ़ दे देती हूँ।


करण ने उसकी उंगलियाँ चूम लीं।

करण बोला - 
ये तकलीफ़ नहीं… यह ज़िम्मेदारी है, यह प्यार है।
कबीर उसके कंधे पर सिर रखकर बोला—

कबीर बोला - 
हम दो हैं, तुम एक… फिर भी हर बार तुम जीत जाती हो।

श्रेया खिलखिलाकर हंस पड़ी।
कमरा एकदम हल्का हो गया।

तीनों नीचे आए।
टेबल पर नाश्ता रखा था।
करण गुस्से का दिखावा करते हुए बोला—

करण बोला - 
आज से एक rule - श्रेया खुद से sting operation नहीं करेगी!

कबीर ने भी सिर हिलाया।

कबीर बोला - 
Yes. हम दोनों के बिना एक step भी नहीं।

श्रेया ने आँखें घुमाईं।
फिर मज़ाक में बोली—

श्रेया बोली - 
ठीक है… लेकिन बदले में आप दोनों को मेरी अगली story में hero बनना होगा।

करण और कबीर एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए।

करण बोला - 
Deal.

कबीर बोला - 
Double hero… और तुम heroine.

श्रेया शरमाकर रह गई।
तीनों एकसाथ नाश्ता करते हैं…
और पहली बार, रात के डर के बाद—
सुबह इतनी हल्की, इतनी प्यारी और इतनी शांत होती है।