Radhe... A Unique Tale of Love (Season 2) - 5 in Hindi Love Stories by Soni shakya books and stories PDF | राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 5

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राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 5

मायादेवी घर पहुंच कर अपने कामों में व्यस्त हो गयी।

रात गहरी हो गई थी , राधा अपने कमरे में बैठी दीवार की और निहार रही थी । तभी..

उसकी निगाह कैलेंडर पर पड़ी ,

तारीख देख उसे याद आया आज के दिन देव के भाई की शादी थी और फिर...वो पल

देव के घर शादी के कामों में सब लोग व्यस्त थे। दोपहर हो चली थी।

खाने के बाद सब लोग थोड़ा आराम करने के लिए दोपहर में लेट गए थे।

राधा भी एक कमरे में पलंग पर सो रही थी कि तभी देव कमरे में आता है और शरारती अंदाज से राधा को जगा देता है।

राधा देव पर चिल्लाने वाली थी कि तभी देव उसके मुंह पर हाथ रख देता है ।

चिल्लाना मत राधे प्लीज कोई सुन लेगा ।

मै,,मैं चला जाता हूं तुम आराम करो।

राधा ने मुस्कुरा दिया और देव का हाथ मुंह से हटाने लगी ।

पर अब ..देव की उंगलियां राधा के होठों पर थी। 

और राधा चाहते हुए भी उन्हें अपने होठों से हटा ना सकी।

देव की उंगलियां राधा के होठों को सहला रही थी ।

राधा ने  अपनी आंखें बंद कर ली उसकी धड़कने कुछ तेज हो गई थी।

सहसा राधा ने महसूस किया कि देव का हाथ उसकी धड़कनें सुन रहे है और फिर ..

कान भी ,अपना सर राधा के सीने पर रख दिया देव ने

अब तो राधा की धड़कनें और भी तेज हो गई थी।

राधा देव को अपने वक्ष से हटाना चाहती थी पर उसके दिल ने साथ नहीं दिया ।

राधा के दिल को देव की मोजुदगी  अच्छी लग रही थी। उसने आंखें बंद ही रहने दी ।

कुछ ही पल में देव के होठ राधा के होठों पर थे।

देव प्यासे भावरे की तरह राधा के होठों का रस पीने लगा।

राधा ने भी नहीं रोका बस डूब गई देव के प्रेम में और सिमट गई देव की बाहों में।

कितना सुकून मिल रहा था देव की बाहों में वह अपनी सारी उम्र यु ही देव की बाहों में  बिता देना चाहती थी।

देव ने राधा को थोड़ा और कस दिया था अपनी बाहों में और बड़ी शिद्दत से कभी  होंठों को चुम रहा था, कभी गालों पर चुम्बन ले रहा था।

डुब गये दोनों एक दूसरे में,

दोनों नहीं चाहते थे कि ये पल कभी खत्म हो पर ..

जल्द ही दोनों अलग हो गए उन्होंने किसी के आने की आहट सुनी थी।

राधा वापस पलंग पर आंखें बंद करके लेट गई और देव जैसे कुछ ढुंढ रहा हो और तभी दीदी कमरे में आती है ।

आते ही बोली- तुम यहां क्या कर रहे हो देव?

कुछ नहीं दीदी मैं अपनी शर्ट ढूंढ रहा था कहते हुए देव कमरे से बाहर निकल गया।

राधा ने आंखें खोली तो देखा -कमरा खाली था और कमरे मे टंगा वो कैलैंडर वो तारीख जैसे.. राधा को चिड़ा रही हो,

राधा के यु अकेले होने पर हंस रही हो।

राधा की आंखों में आंसु भर‌ गये तभी...

देव की आवाज आती है ,,

राधे यूं अकेले कमरे में क्यों बैठीं हो नीचे सबके साथ क्यों नहीं रहती हो।

राधा ने देखा_सामने देव खड़ा था ।

देखते ही राधा  गुस्से से बोली__तुम फिर आ गए तुम चले क्यों नहीं जाते देव मेरी ख्यालों से ,

मेरी जिंदगी से ..

क्यों आ जाते हो बार-बार मेरी जिंदगी को और कठिन बनाने?

क्यों मरने भी नहीं देते देव मुझे चैन से ??

देव राधा की हालत देखकर तड़प गया और बोला-- ऐसा क्यों कहती हो राधे।

मैं तुम्हें छोड़कर कहां जाऊंगा राधे और मैं तुमसे दूर कहा और 

कब हूं मैं तो तुम्हारे भीतर ही छुपा हुं।

बस तुमने हीं मुझे पराया कर दिया है।

तुम जाओ देव मैं कुछ नहीं सुनना चाहती दूर हो जाओ मेरे ख्यालों से ।

पर मैं ख्याल नहीं हूं राधे ,,,

कहते हुए देव राधा के करीब गया और उसके माथे को चूमते हुए बोला __मे हुं ‌राधे 

मैं सच में हुं।

एक पल के लिए राधा को यकीन ना हुआ उसने तुरंत ही देव को छूकर देखा ‌

देव सच में था।

राधा बोली --क्या तुम सच में हो  देव या मैं फिर सपना देख रही हूं ?

नहीं राधे मैं सच में हुं।

राधा के समीप पलंग पर बैठते हुए देव बोला।

राधा ने अपने दोनों हाथों से देव को छुआ..

फिर छुआ..

फिर छुआ ...

और तब तक छुती रहीं ,जब तक उसे यकीन ना हो गया कि देव है सच में है। 

अब... देव राधा के सामने बैठा था।

देव ने देखा -राधा की आंखों में एक उदासी,

एक खालीपन,

एक निरसता,

और राधा ने देखा -देव की आंखों में बहुत से प्रश्न थे ।

इससे पहले की दोनों कुछ भी कहते देव ने राधा को गले लगा लिया और फिर ...

राधा की आंखों से बह निकले आंसू जो उसने बरसों से रोक रखे थे गंगा जमुना की तरह बहने लगे ।

राधा देव से लिपटकर बस रोती रही ‌और देव...

उसे बस चुपचाप रोने दे रहा था ताकि राधा का मन हल्का हो जाए ‌‌।

दरवाजे पर खड़ी माया देवी चुपचाप सब देखती रही और फिर लौट आई उनकी आंखों में भी आंसू थे मगर संतोष के ।

काफी टाइम तक जब राधा रोती रही तो फिर देव बोला -अब चुप भी हो जाओ राधे ।

देखो मेरा पूरा शर्ट गिला हो गया अब इसे कौन धोएगा ?

राधा के चेहरे पर स्माइल थी फिर बोली -तुम्हारी रमा से ना।

देव बोला -राधे तुम रोते हुए बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती तुम तो मुस्कुराते हुए ही अच्छी लगती हो..

   अच्छा!! मुस्कुराते हुए बोली राधा 

वैसे तुम  यहां अचानक कैसे आ गए देव ??

                                    ..........