Khooni Murda in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | Khooni Murda

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Khooni Murda

सन 1923 की बात है। उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव भैरवपुर में लोग सूरज ढलते ही अपने दरवाजे बंद कर लेते थे। उस गाँव के बाहर एक पुराना कब्रिस्तान था, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ दफन एक लाश जिंदा हो चुकी है। लोग उसे “खूनी मुर्दा” कहते थे। कोई उसे देख नहीं पाया था, लेकिन हर अमावस्या की रात किसी न किसी के गायब होने की खबर जरूर मिलती थी।

गाँव में एक नौजवान था, नाम था रघु। वह इन बातों पर यकीन नहीं करता था। उसे लगता था कि यह सब डर फैलाने की बातें हैं। एक दिन उसने अपने दोस्तों से कहा, “अगर सच में कोई मुर्दा जिंदा है, तो मैं उसे खुद देख कर आऊँगा।” गाँव वाले उसे रोकते रहे, लेकिन जिद्दी रघु नहीं माना।

अमावस्या की रात आई। आसमान में चाँद का एक टुकड़ा भी नहीं था। चारों तरफ गहरा अंधेरा फैला हुआ था। रघु एक लालटेन लेकर कब्रिस्तान की ओर चल पड़ा। जैसे जैसे वह पास पहुँचता गया, हवा ठंडी और भारी होती गई। पेड़ों की टहनियाँ ऐसे हिल रही थीं जैसे कोई उन्हें पकड़ कर झकझोर रहा हो।

कब्रिस्तान के अंदर कदम रखते ही उसे अजीब सी बदबू महसूस हुई, जैसे सड़ी हुई लाश की गंध। जमीन पर पुरानी कब्रें टूटी हुई थीं और कुछ जगहों पर मिट्टी उखड़ी हुई थी। रघु ने खुद को संभालते हुए आगे बढ़ना शुरू किया। तभी उसे लगा कि उसके पीछे कोई चल रहा है। उसने पलट कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

अचानक उसकी लालटेन बुझ गई। अब चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था। रघु का दिल तेज धड़कने लगा। तभी उसे कहीं पास से धीमी आवाज सुनाई दी, जैसे कोई जमीन के नीचे से खुरच रहा हो। वह डर के बावजूद उस आवाज की तरफ बढ़ा। उसने देखा कि एक पुरानी कब्र की मिट्टी हिल रही है।

उसका गला सूख गया। मिट्टी धीरे धीरे हटने लगी और उसमें से एक हाथ बाहर निकला। वह हाथ काला और सड़ा हुआ था। रघु पीछे हटने लगा, लेकिन उसके पैर जैसे जमीन में जम गए थे। कुछ ही पलों में पूरी लाश बाहर आ गई। उसकी आँखें खाली थीं, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे वह सीधे रघु को देख रही हो।

वह मुर्दा धीरे धीरे खड़ा हुआ और उसकी तरफ बढ़ने लगा। उसके शरीर से खून टपक रहा था, और हर कदम के साथ जमीन पर निशान बन रहे थे। रघु डर के मारे चीख पड़ा और भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन तभी उसका पैर फिसला और वह गिर पड़ा।

मुर्दा उसके बिल्कुल पास आ गया। उसने अपना ठंडा हाथ रघु के गले पर रख दिया। रघु की साँसें रुकने लगीं। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। फिर अचानक सब शांत हो गया।

अगली सुबह गाँव वालों को रघु की लाश कब्रिस्तान के बाहर मिली। उसके गले पर उंगलियों के गहरे निशान थे। गाँव में डर और भी बढ़ गया। लोगों ने यकीन कर लिया कि खूनी मुर्दा सच में मौजूद है।

लेकिन असली डर तब सामने आया जब गाँव के एक बूढ़े आदमी ने रघु की लाश को ध्यान से देखा। उसने धीरे से कहा, “ये निशान… ये तो इंसान के हाथ के हैं… किसी मुर्दे के नहीं।”

गाँव वाले चौंक गए। अगर यह किसी इंसान ने किया था, तो वह कौन था जो हर अमावस्या को लोगों को मार रहा था और खुद को मुर्दा दिखा रहा था। उसी रात, एक और आदमी गायब हो गया।

और सबसे डरावनी बात यह थी कि उस रात कई लोगों ने अपने घरों के बाहर किसी को चलते हुए देखा। वह इंसान था, लेकिन उसके कदमों की चाल बिलकुल वैसी थी जैसे किसी कब्र से निकली लाश की हो।