Ishq aur Ashq - 32 in Hindi Love Stories by Aradhana books and stories PDF | इश्क और अश्क - 32

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इश्क और अश्क - 32



एवी पीछे से बोलता है:
"चल मेरी करतूत तो जाने दे, पर उसे तेरी करतूत याद आ गई तो......?"

अगस्त्य ने अपने बाल ठीक किए, हल्का सा मुस्कुराया और पलट कर एवी के कपड़े साफ करते हुए बोला:
"छै...... कितना भोला है तू...... तुझे सच में लगता है कि मुझे इससे फर्क भी पड़ता है? चल जा आराम कर।"

एवी:
"जब तुझे इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि वो तेरे बारे में क्या सोचती है, तो इस बात से क्या फर्क पड़ता है कि वो किसके साथ है? छोड़, तू उसे और आगे बढ़।"

अगस्त्य:
"इस दुनिया में किसी भी लड़के को वो चुनकर लाएगी, किसी भी मतलब किसी भी लड़के को...... हर लड़के को एक्सेप्ट कर लूंगा... पर तू???? न...ना... न... ना..."

एवी:
"तेरी दिक्कत क्या है?"

अगस्त्य:
"वो तेरे साथ कभी खुश नहीं रहेगी... और ना मैं रहने दूंगा।"

एवी:
"तेरी तो..."
(बोलकर एवी ने उसका हाथ झटका)

अगस्त्य का फोन अभी भी बज रहा है... उसने फोन देखा और फिर घड़ी में टाइम — ये 9:15 हो रहे हैं।

अगस्त्य ने कॉल पिक की:
"हेलो...?"

वेदिका:
"सर, गेस्ट वापस चले गए... एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हमारे हाथ से चला गया।"

अगस्त्य गुस्से में:
"You don’t need to tell me कि ये कितना बड़ा प्रोजेक्ट था!"
(और उसने कॉल कट कर दी)

अगस्त्य बाहर आया:
"Not again..."
(उसे गुस्से में बाहर आकर मीडिया को देख कर बोला)

मीडिया:
"सर... सर... सर... अभी कुछ दिन पहले ही आपके और एवी सर की फाइटिंग चर्चे में आई थी और अब फिर ये...?"

(अगस्त्य उन्हें इग्नोर करके जाने लगा)

न्यूज रिपोर्टर:
"जैसा कि आप देख सकते हैं कि मान प्रोडक्शन और सुपरस्टार एवी के रिश्ते कुछ खास अच्छे नहीं लग रहे, कुछ ही हफ्तों में दो-दो फाइटिंग कांड... क्या है इन फाइट्स की वजह?"

(अगस्त्य किसी तरह बचकर अपनी कार तक पहुंचा)
"ये इन लोगों की मुझसे ज्यादा मेरी खबर है..."
(उसने गुस्से में गाड़ी के स्टीयरिंग पर हाथ मारा और कार लेकर घर पहुंचा)


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– Agastya’s Home – Night

वो बहुत थका हुआ है। बस अब उसे रूम में जाकर सोना है। जैसे ही उसने घर में कदम रखा, अर्जुन ने उसे पकड़ लिया।

अर्जुन:
"भाई, आप कहां से आ रहे हो?"

अगस्त्य (इरिटेट होकर):
"अभी नहीं, प्लीज़... सुबह बात करना।"
(और उसे साइड करके जाने लगा)

अर्जुन:
"आपने फिर एवी से रात्रि के लिए लड़ाई की न?"

अगस्त्य:
"लड़ाई हुई है पर रात्रि उसकी वजह नहीं है। पूरी बात पता न हो तो जज मत किया कर।"

अर्जुन:
"पर आपको एयरपोर्ट जाना था... ये बात तो पूरी है ना? तो क्यों नहीं गए?"

अगस्त्य:
"थोड़ा काम आ गया था।"

अर्जुन:
"भाई, look at you... ये आप नहीं हो। कहां है वो अगस्त्य जो काम के लिए पागल था? कहां गया वो अगस्त्य जिसने मान प्रोडक्शन को बनाया?"

अगस्त्य गुस्से से अचानक शांत हो गया:
"अर्जुन... मेरे भाई, सॉरी। तेरी इस मूवी के लिए वो गेस्ट इंपॉर्टेंट थे, मैं नहीं पहुंच पाया।"

अर्जुन:
"जब आपने फोन नहीं पिक किया तो वेदिका ने मुझे फोन किया और मैंने उन गेस्ट्स को होटल छोड़ दिया।"

अगस्त्य:
"ओह... ये तूने अच्छा किया।"

अर्जुन:
"बट अभी जो हेडलाइंस हैं उसकी वजह से हमारी फिल्म बनने से पहले ही नेगेटिव हो रही है..."

(अर्जुन ने टीवी ऑन किया)

न्यूज़:
"सुपर स्टार एवी और बॉलीवुड का अब बड़ा प्रोडक्शन हाउस — मान प्रोडक्शन — की खटास की चर्चा हर जगह है। पर सवाल ये है कि इन दुश्मनी में कैसे पूरी होगी इनकी ये फिल्म...? और क्या होने वाला है कल की पर...!"

(मीडिया की ऐसी बातें सुन कर अगस्त्य का मूड और खराब हो गया। उसने टीवी का स्विच ऑफ किया)

अगस्त्य:
"तू टेंशन मत ले, दो दिन बाद सब भूल जाएंगे।"

(अर्जुन कुछ नहीं बोला)


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Next Morning – Agastya’s Office – Cabin

(अगस्त्य जल्दी तैयार होकर ऑफिस पहुंचा, जहां रात्रि पहले से ही उसके केबिन में वेट कर रही है)

(अगस्त्य ने केबिन का डोर ओपन किया और रात्रि को देख कर माथा पकड़ लिया)

अगस्त्य:
"अबे यार... अभी नहीं... अब इसको क्या जवाब दूं?"

(रात्रि ने उसकी फुसफुसाहट सुन ली)

रात्रि:
"वही जवाब दो जो सच हो।"

अगस्त्य:
"देखो अभी तुम जाओ, मेरा बहस करने का मूड नहीं है।"

रात्रि:
"क्यों अगस्त्य?"

अगस्त्य:
"क्यों क्या?"

रात्रि:
"टीम मुझसे और एवी से क्या चाहते हो, आखिर प्रॉब्लम क्या है तुम्हारी?"

अगस्त्य:
"वो तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।"

रात्रि:
"क्या...? और तुम्हें ये कैसे पता?"

अगस्त्य:
"बस बोल दिया न?"

रात्रि:
"क्योंकि तुम मुझे पसंद करते हो?"

(अगस्त्य चुप हो गया, उसके पास कोई जवाब नहीं था)

रात्रि:
"क्या हुआ...? तुम मुझे हर बार बचाते हो, मेरी फिक्र करते हो और किसी और को मेरे पास आने नहीं देते। तो इसका क्या मतलब है?"

अगस्त्य:
"दुनिया का कोई भी लड़का चलेगा, पर ये नहीं।"

रात्रि:
"क्यों? एवी में क्या प्रॉब्लम है?"

अगस्त्य:
"क्योंकि वो..." (बोलते-बोलते रुका)

रात्रि:
"बोलो... अगस्त्य... तुम मुझे पसंद नहीं करते तो न सही, पर तुम मुझसे नफरत भी नहीं करते, है ना?"

(अगस्त्य ने उसे ऊपर से नीचे तक घूरा, और हंसा)

रात्रि:
"ये क्या कर रहे हो?"

अगस्त्य:
"बस देख रहा हूं कि तुम्हें इतनी बड़ी गलतफहमी कैसे हो गई... कि मैं तुम्हें...? मतलब अगस्त्य मान और तुम?"

(रात्रि उसके शब्द सुनकर हक्की-बक्की रह गई)

रात्रि:
"क्या...?"

अगस्त्य (शातिर मुस्कान देकर):
"तुम तो मुझे attract भी नहीं कर सकती!"

(रात्रि ने अपने हाथ उठाया अगस्त्य के लिए...)


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