JANVI - Rakh Se Uthti Loa - 3 in Hindi Motivational Stories by Luqman Gangohi books and stories PDF | JANVI - राख से उठती लौ - 3

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JANVI - राख से उठती लौ - 3

✨जहां रिश्ते टूटे, वहां एक रिश्ता बना✨

"कुछ रिश्ते खून से नहीं, समय और समझ से बनते हैं... और वो सबसे गहरे होते हैं।"

जानवी उस दिन पंकज से मिलकर लौटी थी। बाहर से शांत, लेकिन अंदर से जैसे पूरी कायनात रो रही थी। जिस इंसान पर उसने पहली बार भरोसा करना सीखा, उसने वही भरोसा शर्तों में तोल दिया था। उस रात वो देर तक छत पर बैठी रही। आंखों में आंसू नहीं थे, बस खालीपन था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों होता है। क्या एक लड़की सिर्फ तब तक ही प्यारी लगती है, जब तक वो "सक्सेसफुल" नहीं बनती?

रूटीन टूट्टा, लक्ष्य नहीं

अगले कुछ दिनों तक उसकी पढ़ाई पर असर पड़ा। न कोई मोटिवेशन, न इच्छा। फोन की स्क्रीन देखती -पंकज ऑनलाइन होता, लेकिन कोई मैसेज नहीं।

पर उसने खुद को टूटने से पहले ही रोक लिया। उसने डायरी निकाली, जिसमें उसका टाइमटेबल लिखा था। पन्ने पलटे... और एक कोने में लिखा मिला -

"अगर थक जाओ, तो थोड़ा आराम करना... पर हार कभी मत मानना।"

खुद जानवी की लिखी हुई लाइन थी। वहीं से उसने फिर से खुद को समेटना शुरू किया। लेकिन एक चीज़ अब भी अधूरी थी - कोई ऐसा, जिससे वो खुलकर सब कह सके।

शौकीन की एंटी - स्क्रीन के उस पार से

फिर एक और अजनबी इंसान ने जानवी की जिंदगी में दस्तक दी, जो जानवी का ऑनलाइन क्लासमेट था। लेकिन ये कोई झूठे सपने दिखाने नहीं आया था। हालांकि उनका रिश्ता खून का तो नहीं था लेकिन रूह से जुड़ चुका था, जिसका नाम शौकीन था। जानवी उसको भाई बोलती और वह जानवी को बहना कह कर पुकारता था। जो दूर किसी दूसरे राज्य में रहकर भी, उसके सवालों का सबसे सटीक जवाब देता था।

धीरे-धीरे दोनों के बीच सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, सोच और आत्मीयता का रिश्ता बन गया। वो दिन भी आया जब जानवी ने पहली बार किसी से अपने दिल की बात कही -
"भैया, मैं शायद टूट गई थी..."

शौकीन ने उसकी बातों को न केवल सुना, बल्कि महसूस भी किया। उसने कोई सलाह नहीं दी, कोई फालतू दिलासा नहीं दिया- बस एक लाइन कही:

"बहना, दुनिया में बहुत से लोग तुम्हारी हार का इंतजार कर रहे हैं। क्या तुम उन्हें ये मौका देना चाहती हो?"

उस एक वाक्य ने जानवी को जैसे फिर से जिंदा कर दिया।

भाई का सहारा, खुद पर भरोसा

शौकीन ने उसे याद दिलाया कि तुम केवल एक सामान्य लड़की नहीं हो, बल्कि सैकड़ों लड़कियों के लिए उम्मीद बन सकती।

"जो तुम्हें आज इग्नोर कर रहे हैं, कल वही तुम्हारी तस्वीर देख कर अफसोस करेंगे।"

अब जानवी की आंखों में आंसू नहीं, बल्कि चिंगारी थी। उसने पंकज के मैसेज ब्लॉक नहीं किए, न ही उसे कोई सफाई दी बस जवाब देना बंद कर दिया।

अब उसकी दुनिया में ऐसे सिर्फ दो ही रिश्ते बचे थे जिनसे वो खुलकर अपने मन की बात करती थी -

एक तो खुद से, और दूसरा उस मुंहबोले भाई से।

फिर होती है पढ़ाई में वापसी एक तपस्विनी की तरह

अब जानवी का स्टडी टेबल मंदिर जैसा बन चुका था। हर किताब, हर नोट्स, हर मॉक टेस्ट - उसके लिए ध्यान जैसा था। वो अब सिर्फ पढ़ नहीं रही थी, बल्कि हर जवाब में अपना भविष्य गढ़ रही थी।

उसका रूटीन था -
 सुबह 5 बजे उठना, 1 घंटे मेडिटेशन, 8 घंटे स्टडी, डेली मॉक टेस्ट, रात को शौकीन से बात करना दिनभर की समीक्षा।

फिर आया एक और नया तूफान

कुछ महीने बीते ही थे कि एक दिन जानवी को फिर से एक खबर मिली कि पंकज की शादी फिक्स हो गई है, किसी और लड़की से।

एक पल के लिए जैसे फिर सब रुक गया। क्योंकि इतना सब होने के बाद भी, दिल के किसी कोने में एक नर्म कोना था, जो अब भी उम्मीद करता था।

उसने खुद को रोका नहीं, शौकीन को फोन मिलाया। और सब परिस्थिति से भाई को अवगत कराया। शौकीन ने गहरी सांस लेते हुए कहा -

"बहना, अगर कोई तुम्हारे दुख में साथ नहीं था, तो अब उसकी खुशी में खुद को शामिल मत करो। वो बस एक चेहरा था, तुम्हारी कहानी का नहीं- तुम्हारी परीक्षा का हिस्सा था।"

अब की बार, पत्थर नहीं लौह बन चुकी थी जानवी

भाई की बातों ने जैसे उसको हिम्मत से भर दिया हो, अब जानवी शेरनी की तरह निडरता से बोली कि अब मुझे ऐसे किसी इंसान की कोई जरूरत नहीं है जो मुझे समझ ही नहीं सका हो। अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आए या जाए, मुझे अब ऐसे इंसान का कोई इंतज़ार नहीं है।

उसने पंकज के नाम को अपने दिमाग से नहीं, दिल से मिटा दिया। अब वो जान गई थी कि -
✅प्यार की तलाश करनी है, पर सबसे पहले खुद से प्यार करना है।
✅जो सिर्फ 'सफलता' से प्यार करे, वो 'साथ निभाने लायक नहीं होता।
✅और सबसे जरूरी एक भाई जैसा रिश्ता वो दौलत है, जो वक्त आने पर जिंदगी बदल सकता है।