मैं सिंगापुर के गृह मंत्रालय के कार्यालय में गया तो वहाँ पहुँचते ही बाबू ने बताया कि आपका रिकार्ड मिल गया है। उसने मुझे रिकार्ड की फोटीकापी दी। मैंने उससे अनुरोघ किया कि इसकी एक प्रति और दे दें। वह तुरन्त दूसरी फोटो प्रति भी ले आया और मुझे दे दिया। रिकार्ड पाते ही मेरी खुशी लौट आयी। मेरे साथ सेवानिवृत तमिल प्राचार्य भी थे। सीधे हम लोग भारतीय दूतावास पहुँचे। वहाँ बताया गया कि आप फोटो भी लाकर जमा करें। आपको अस्थायी पासपोर्ट मिल जाएगा। मैंने तुरन्त भागकर फोटो खिंचवाई और उसे लाकर जमा कर दिया। अस्थायी पासपोर्ट मिल जाने पर हम दोनों तुरन्त मलेशियन एयरलाइन्स के आफिस पहुँचे।
वहाँ लौटने के टिकट की द्वितीय प्रति भी मिल गई। फिर मैं भागकर अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक पहुँचा। मैनेजर मिस लिंडा ने कहा कि आप अभी तक कहाँ थे। अपना पैसा नहीं ले गये। उसने तुरन्त आदेश किया और मुझे तीन सौ यूएस डालर मिल गये। अब सीट बुक करानी थी। मलेशियन एयरलाइन्स ने कहा कि आप फ्रांसीसी एयरलाइन्स से भी सम्पर्क कर लें। वहाँ जाकर पता चला कि मेरा टिकट पैंतीस दिन का ही था और उसके अन्दर फ्रेंच एयरलाइन्स में कोई सीट खाली नहीं थी। मैंने अगले दिन सुबह के लिए मलेशियन एयरलाइन्स से बुकिंग करा दी। सोचा बैंकाक जाकर प्रयास करूँगा। तमिल प्राचार्य ने कहा कि मैं सुबह हवाई अड्डे पर आपको मिलूँगा।
वे अपने घर गये और मैं आर्य समाज लौट आया। संयोग से उसी दिन शाम को दिल्ली से चचेरे भाई ने एक्सचेंज में जाकर आर्य समाज सिंगापुर के फोन पर काल किया। उनको मैंने बताया कि कल सुबह बैंकाक के लिए निकलूँगा। वहाँ जाकर जब दिल्ली के लिए बुकिंग हो जाएगी तो तुम्हें सूचित करूँगा। सबेरे हवाई अड्डे पर मेरे पहुँचने के पहले ही तमिल प्राचार्य आ चुके थे। मिलते ही अपनी जेब से कुछ भारतीय रुपये निकाले और मुझे देकर कहा कि मैं जब भारत गया था तो यह रुपये बच गये थे।
उनको राम राम करके मैं चेकिंग के लिए अन्दर चला गया। चेकिंग करते समय कर्मचारी ने कहा कि आप सिंगापुर लौट तो नहीं आएँगे। जब मैं हवाई अड्डे पर था तो एक आस्ट्रेलियन अध्यापक ने मुझसे पूछा कि दिल्ली जाने वाले लोग अक्सर टीवी और वीसीआर क्यों लेकर जाते हैं? मैंने उन्हें बताया कि भारत में दोनों चीजें यहाँ से काफी मँहगी हैं। उस समय वहाँ दस हजार के अन्दर ही रंगीन टीवी और वीसीआर मिल जाती थी जबकि भारत में उस समय यही दोनों लगभग पच्चीस हजार रुपये में बिकती थी।
इसलिए दिल्ली के बहुत से दुकानदार सिंगापुर से टीवी वीसीआर मँगा लिया करते थे। मुझसे भी एक सरदार जी ने टीवी व वीसीआर लाने को कहा था लेकिन उसने जो नम्बर बताया था सिंगापुर में पूछने पर पता चला कि यह पिछले साल का मॉडल है और इस साल नया मॉडल आ गया है। मैंने कोई खरीददारी नहीं की। सिंगापुर से बैंकाक के लिए जिस उड़ान से मैं चला उसको बीच में पेनांग में रुकना था। हवाई जहाज जब पेनांग में रुका उस समय हल्की हल्की बारिश हो रही थी। कुछ लोग हवाई जहाज से बाहर निकले लेकिन मैं अपनी सीट पर ही बैठा रहा। पचास मिनट ठहरने के बाद हवाई जहाज बैंकाक के लिए रवाना हुआ। बैंकाक पहुँचने पर मैं देव मंदिर गया।
वहाँ के चौकीदार ने बताया कि आप रुकिए और शाम को अध्यक्ष जी आएंगे तो उनसे बात कर लीजिएगा। चौकीदार गोरखपुर का निवासी था। मंदिर का प्रबन्धन दिल्ली और हरियाणा के लोगां के हाथ में था। शाम को अध्यक्ष जी के आने पर मैंने उन्हें अपनी कठिनाई बताई। उन्होंने कहा कि ठीक है आप रुकिए और जब लौटने की व्यवस्था हो जाए तब चले जाइएगा। वहाँ रुकने पर मुझे किराया नहीं देना था। भोजन मैं बाहर कर लेता था। मेरे पास बैंकाक के एक सज्जन का पता था। वे रहने वाले गोरखपुर के थे लेकिन काफी दिनों से बैंकाक में रहते हुए व्यवसाय कर रहे थे। देव मंदिर से ही मैंने उन्हें फोन मिलाया तो आए और कहा-ठीक है, मैं कोशिश करूँगा कि समय से आपको फ्रेंच एयरलाइन्स का आरक्षण मिल जाए। फ्रेंच एयरलाइन्स की उड़ान हफ्ते में एक ही दिन थी।
पैंतीस दिन के अन्दर एक ही उड़ान बची थी लेकिन उसमें एकोनामी क्लास में कोई सीट खाली नहीं थी। देव मंदिर में रहते हुए मुझे एक शास्त्री जी मिले जो मानस पर प्रवचन के लिए बुलाए गए थे। उनका नाम कुछ और था लेकिल मानस शास्त्री कहे जाते थे। इतवार के दिन एक घंटे मंदिर में उनका प्रवचन होता था। और मंदिर में जो दस-बीस लोग आते थे उनका प्रवचन सुनते थे। मैंने उनसे पूछा कि आपका आगमन यहाँ कैसे हुआ। उन्होंने कहा कि मेरा एक शिष्य यहाँ आया था, यहाँ से उसको अच्छी आमदनी हुई। लौटकर गया तो मुझे भी यहाँ का पता दिया। मैंने भी सम्पर्क किया तो मुझे भी यहाँ आने का निमन्त्रण मिल गया।
मंदिर के मुख्य पुजारी हरियाणा के थे किन्तु उनका सहायक खलीलाबाद का था। मुझसे अक्सर उससे बात होती रहती थी। देव मंदिर में ही हफ्ते में एक दिन हिन्दी की कक्षा भी चलती थी जो हिन्दी सीखना चाहते थे, वे वहाँ पढ़ते थे। मेरे वहाँ रहते ही जन्माष्टमी पड़ गई। उस दिन देव मंदिर में कुछ कार्यक्रम भी आयोजित हुआ जिसमें भारतीय परिवारों के बच्चों ने भाग लिया। एक सिन्धी परिवार की शादी भी हुई। मुझे बताया गया कि सिन्धी को शादी से मतलब है। चाहे मौलवी निकाह पढ़ा दे चाहे पंडित विवाह करा दे। देव मंदिर के अध्यक्ष ने बताया कि मैं इन्हें बुलाकर लाया हूँ जिससे भारतीय पद्धति से शादी हो सके।
जब एक दिन रह गया फ्रांसीसी फ्लाइट के लिए तब मेरे परिचित ने फोन किया कि आप तैयार रहें मैं कोशिश करूँगा कि आपको सीट मिल जाए। मैं फाउराट गया जिसे इंडियन सिटी भी कहते हैं उस बाजार में भारतीय लोगो की ही दुकानें हैं। वहाँ मैंने सफारी सूट के कपड़े लिए और घर के छोटे बच्चों के लिए सिले हुए कपड़े। शाम को देव मंदिर लौटकर आया तो ठाकुर साहब ने एक बैग में अपने नातियों के लिए कुछ कपड़े दिए। देव मंदिर के जो सहायक पुजारी थे उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के लिए एक घड़ी दी। अगले दिन ये सब लेकर शाम को हवाई अड्डे पहुँचा। वहाँ गोरखपुर के सिंह साहब मिले। उन्होंने फ्रैंच अधिकारी से मेरी बात करायी।
मेरा परिचय कराया और उसने एक्जीक्यूटिव क्लास में मेरी सीट बुक कर दी। मैंने धन्यवाद कहा और सिंह साहब से हाथ मिला कर चेकिंग की ओर बढ़ गया। चेकिंग कराकर मैं फ्रैंच एयरलाइन्स के हवाई जहाज की ओर बढ़ गया। उसका गेट खुला और हम लोग अपनी अपनी सीट पर अन्दर जाकर बैठ गये। हमने बैंकाक से ही अपने चचेरे भाई को फोन कर दिया था। इसलिए वे हवाई अड्डे पर आ गए थे। जैसे ही एयर फ्रांस का जहाज दिल्ली पर मँडराया, मन खुशी से भर उठा।
जहाज से निकल कर मैं चला तो दो चैनल थे। एक रेड, एक ग्रीन। मेरे पास कोई ऐसा सामान नहीं था जिसमें कस्टम ड्यूटी देनी हो। इसलिए मैं ग्रीन चैनल की ओर बढ़ गया। चेकिंग अधिकारी ने मेरे बैग को देखा तो कहा कि आप तो कोई सामान लाये ही नहीं हैं। जैसे ही मैं बाहर आया, मेरा भाई इंतजार में बैठा था। उसने मेरा बैग लिया और हम दोनो बस में बैठकर यमुना विहार के ‘सी’ ब्लाक की ओर बढ़ चले। घर पहुँचने पर परिवार के सभी सदस्य प्रसन्न हो गए। थोड़ी बातचीत के बाद भोजन किया और यात्रा की थकान के कारण शीघ्र सो गए। अगले दिन शाम की ट्रेन से गोण्डा जाने का कार्यक्रम बना उसके लिए टिकट की व्यवस्था की गई। दिन में गाँव के जो लोग दिल्ली में रहते थे उनसे सम्पर्क किया। सिंगापुर में फँस जाने पर सभी लोग दुःखी थे।
कई तो यह कहते थे कि भाई पैसा भेज दिया जाए जिससे जल्दी लौट सकें। मेरे मिलने पर वे सभी बहुत प्रसन्न हुए। शाम को मैं वैशाली एक्सप्रेस से गोण्डा के लिए चल पड़ा। सुबह गोण्डा पहुँच कर घर गया। सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए क्योंकि एक चिट्ठी मैंने पिताजी के नाम भी अपनी कठिनाइयों को लेकर लिखी थी। घर पर नहा धोकर कुछ जल-पान करने के बाद मैं शास्त्री कालेज गया। स्टाफ से मिला। प्राचार्य जी भी बहुत खुश हुए। वर्माजी ने बताया कि मैं लखनऊ गया था। पासपोर्ट अधिकारी की मेज पर आपका टेलेक्स लगा हुआ था किन्तु तब तक उसका उत्तर भेजा नहीं गया था। दूसरे दिन प्राचार्य जी ने कहा कि अपने अनुभवों को आप स्टाफ के बीच में साझा कीजिए। कक्षाओं का समय समाप्त हो जाने के बाद सभी लोग स्टाफ रूम में बैठे।
मैंने अपने अनुभवों को सबके साथ साझा किया। एशिया के नक्शे में पूरे रूट को दिखाया। मिस लिंडा के बारे में जब मैंने बताया तो सभी लोग कहने लगे कि ऐसा व्यवहार यदि बैंक के मैनेजर यहाँ भी करने लगें तो कितनी अच्छी बात हो। तमिल प्राचार्य के बारे में भी जानकर लोग बहुत खुश हुए। जब कोई व्यक्ति भारत के बाहर जाता है तो वह भारतीय ही जाना जाता है। इसलिए उसके शुभ और अशुभ कामों से भारत की पहचान बनती है। अपने देश का क्या अर्थ होता है यह देश के बाहर जाने पर ही पता चलता है। इस यात्रा में मैंने थाइलैंड, मलेशिया और सिंगापुर के जन जीवन को समझने की कोशिश की।
थाइलैंड के शासक अपने को राम का वंशज मानते हैं और बहुत से लोग अपने को किन्नर संस्कृति से जोड़ते हैं। थाइलैंड में महिलाएँ अधिक सक्रिय हैं। घर-बाजार में महिलाएँ आपको काम करते दिखेंगी। भारतीय लोगों का बाजार फाउराट कहलाता है। मुझे चीन से भागकर आए हुए बच्चे भी थाइलैंड में दिखे। मलेशिया में मैं एक ही दिन रुका। वहाँ के बाजारों में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखी। सिंगापुर की सफाई देखकर किसी को भी प्रसन्नता हो सकती है। वहाँ आप सड़क पर कोई गन्दगी नहीं कर सकते। कागज-वगैरह भी नहीं फेंक सकते। पुरानी आबादी में भी सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यद्यपि सिंगापुर विषवत् रेखा पर बसा हुआ है, पर कहीं भी आपको मच्छर, मक्खी आदि नहीं दिखेगी। बाजार में मछली और तरोई एक साथ लटके दिखेंगे। लेकिन कहीं भी आपको गन्दगी के निशान नही मिलेंगे। सिंगापुर एक ऐसा देश है जहाँ सभी लोग कहते हैं कि सिंगापुर के लोग चोरी नहीं करते। किसी भी कार्यालय में रिश्वत देने की जरूरत नहीं पड़ती। भ्रष्टाचार मुक्त देशों में सिंगापुर नम्बर एक पर है। काश दूसरे देश भी ऐसा कर पाते!