serial Kaal Darshi- Sharma Uncle in Hindi Thriller by Vijay Erry books and stories PDF | धारावाहिक काल दर्शी-शर्मा अंकल

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धारावाहिक काल दर्शी-शर्मा अंकल

अध्याय 9: शर्मा अंकल का रहस्य
एक शुक्रवार की शाम, तारा work से थकी-हारी घर लौट रही थी। building की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उसने देखा कि शर्मा अंकल अपने flat के बाहर खड़े थे, phone पर किसी से बात कर रहे थे।
तारा को उस दिन की बात याद आई जब उसने पहली बार शर्मा अंकल के विचार सुने थे - "कल रात वाला काम पूरा करना होगा... किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"
उसने हिम्मत करके उनकी ओर ध्यान से देखा।
"हाँ, सब arrange हो गया है। रात में दस बजे। कोई देखेगा नहीं। बस thoda careful रहना होगा।"
तारा का दिल डूब गया। क्या शर्मा अंकल कोई गलत काम कर रहे थे? उन्हें तो वह बचपन से जानती थी - हमेशा भले और मददगार।
उसने decide किया कि आज रात उसे पता लगाना होगा कि matter क्या है।
रात के करीब नौ बजे, तारा ने balcony में खड़े होकर शर्मा अंकल के flat की ओर नज़र रखी। उनका flat उसके ठीक नीचे था। करीब साढ़े नौ बजे उन्हें flat से बाहर निकलते देखा - एक बड़े से bag के साथ।
तारा के मन में हज़ारों आशंकाएं उठने लगीं। क्या वह कोई illegal काम कर रहे थे? ड्रग्स? चोरी का सामान? उसने जल्दी से अपनी jacket पहनी और चुपके से उनके पीछे जाने का फैसला किया।
शर्मा अंकल building से बाहर निकले और पैदल ही किसी दिशा में चल पड़े। तारा थोड़ी दूरी बनाकर उनके पीछे चलने लगी। दिल तेज़ी से धड़क रहा था। अगर पकड़ी गई तो?
करीब पंद्रह मिनट की walk के बाद शर्मा अंकल एक पुराने park के पास रुके। यह park दिन में तो काफी भीड़-भाड़ वाला होता था, लेकिन रात में यहाँ कोई नहीं आता था। बस कुछ बेघर लोग यहाँ-वहाँ सो रहे होते थे।
तारा ने एक पेड़ के पीछे छुपकर देखा। शर्मा अंकल park के अंदर गए और एक बेंच के पास रुके। वहाँ दो-तीन लोग पहले से मौजूद थे - उनमें से एक middle-aged औरत और दो युवक।
तारा ने हिम्मत करके थोड़ा और पास जाने की कोशिश की। उसे सुनना था कि वे क्या बात कर रहे हैं।
"शर्मा जी, आप आ गए! हम wait कर रहे थे," औरत ने कहा।
"हाँ, लेकिन ध्यान रखना, किसी को पता नहीं चलना चाहिए। Police वाले पकड़ लेंगे तो problem हो जाएगी," शर्मा अंकल ने कहा।
तारा का दिल और तेज़ धड़कने लगा। तो सच में कुछ गड़बड़ था!
शर्मा अंकल ने अपना bag खोला और उसमें से... खाने के packets निकालने लगे? रोटी, सब्ज़ी, दाल के डिब्बे?
"आज biryani भी बनाई है। सोचा कि weekend है, तो कुछ special बना दूं," शर्मा अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा।
तारा confusion में थी। यह क्या हो रहा था?
औरत ने thankful होते हुए कहा, "शर्मा जी, आप हर हफ्ते हमारे लिए इतना कुछ करते हैं। भगवान आपको बहुत खुश रखे।"
"अरे, यह तो मेरा फ़र्ज़ है। आप लोग इतनी मुश्किल में हो, मैं कैसे चुप बैठ सकता हूँ?" शर्मा अंकल ने कहा।
तभी तारा को एहसास हुआ - ये लोग बेघर थे। और शर्मा अंकल उनके लिए खाना ला रहे थे!
उसने ध्यान से शर्मा अंकल को देखा, उनकी आँखों में focus किया...
"काश मैं इनके लिए और कर पाता। लेकिन अगर घर वालों को पता चल गया कि मैं pension का पैसा इस काम में लगा रहा हूँ, तो बहुत नाराज़ होंगे। इसलिए secretly करना पड़ता है।"
तारा की आँखों में आँसू आ गए। उसने शर्मा अंकल को गलत समझा था। वह कोई criminal नहीं थे - वह तो एक फरिश्ते थे।
वह चुपचाप वहाँ से वापस चल पड़ी। घर पहुंचकर उसने अपने गलत assumptions के लिए खुद को धिक्कारा। यही तो problem थी - लोगों के मन की बात सुनकर भी पूरी सच्चाई नहीं समझ पाती थी।
अध्याय 10: सबक
अगले दिन सुबह जब तारा building से बाहर निकल रही थी, तो शर्मा अंकल अपनी balcony में खड़े अखबार पढ़ रहे थे।
"नमस्ते अंकल," तारा ने मुस्कुराते हुए कहा।
"अरे तारा बेटा! नमस्ते। कैसी हो?"
"बस अच्छी हूँ। अंकल... मैं कुछ पूछना चाहती हूँ।"
शर्मा अंकल ने अखबार नीचे रखा। "हाँ बेटा, बोलो।"
"अगर... अगर किसी को किसी की मदद करनी हो, लेकिन secretly, तो क्या वह गलत है?"
शर्मा अंकल ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, "बेटा, मदद करना कभी गलत नहीं होता। हाँ, sometimes हमें अपने नेक कामों को छुपाना पड़ता है - लोग समझते नहीं हैं, या फिर हमारे अपने लोग नाराज़ हो जाते हैं। लेकिन अगर दिल साफ है, तो भगवान सब देख रहे हैं।"
तारा को लगा जैसे उन्हें पता हो कि वह कल रात वहाँ थी। "अंकल, अगर किसी को आपकी मदद चाहिए हो, तो मुझे बताइएगा। मैं भी help करना चाहूंगी।"
शर्मा अंकल की आँखें नम हो गईं। "तुम बहुत अच्छी लड़की हो, बेटा। तुम्हारे माता-पिता को तुम पर गर्व होगा।"
अध्याय 11: office में नया drama
सोमवार की सुबह office में एक अजीब सा tension था। जैसे ही तारा अपनी desk पर पहुंची, प्रिया ने उसे aside ले जाकर बताया, "तुझे पता है? रविकांत को कल late night एक emergency meeting के लिए बुलाया गया था।"
रविकांत उनके department का एक senior employee था। बहुत ही sincere और hardworking। सभी उसे respect करते थे।
"क्या हुआ?" तारा ने पूछा।
"पता नहीं, लेकिन सुना है कि कुछ financial irregularities का matter है। HR department investigate कर रही है।"
तारा को धक्का लगा। रविकांत और financial irregularities? यह possible नहीं लगता था।
दोपहर तक पूरे office में यह बात फैल गई। लोग whispers में बात कर रहे थे। कुछ तो यहाँ तक कह रहे थे कि रविकांत ने company के funds misuse किए हैं।
lunch break में जब तारा canteen में बैठी थी, तो उसने देखा कि रविकांत अकेले एक corner में बैठे हैं। उनका चेहरा उतरा हुआ था, और वह कुछ खा नहीं रहे थे, बस चाय के cup को घूर रहे थे।
तारा ने सोचा - क्या उसे उनके पास जाना चाहिए? लेकिन क्या वह सच में उनके विचार जानना चाहती थी?
आखिरकार उसकी humanity जीत गई। वह अपनी plate उठाकर रविकांत की table पर गई।
"Sir, क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ?"
रविकांत ने ऊपर देखा। एक पल के लिए उन्हें लगा जैसे वह मना कर देंगे, लेकिन फिर उन्होंने सिर हिला दिया।
"Sir, मैंने सुना कि कुछ... investigation चल रही है। क्या सब ठीक है?" तारा ने carefully पूछा।
रविकांत ने गहरी साँस ली। "तारा, कभी-कभी सच्चाई भी झूठ लगने लगती है। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी honestly काम किया है। लेकिन अब..."
उनकी आवाज़ भर आई।
तारा ने हिम्मत करके उनकी आँखों में देखा। Focus किया...
"मैंने कुछ गलत नहीं किया। यह सब राजीव की साज़िश है। उसे मेरी position चाहिए। उसने fake documents बनाए हैं। लेकिन मैं कैसे prove करूं? किसी को विश्वास नहीं होगा।"
तारा का खून खौल उठा। राजीव! फिर से वही।
"Sir, आप tension मत लीजिए। सच्चाई हमेशा सामने आती है," तारा ने कहा।
"काश ऐसा हो," रविकांत ने उदास मुस्कान के साथ कहा।
अध्याय 12: investigation शुरू
उस दिन office से निकलते ही तारा सीधे प्रिया के पास गई।
"प्रिया, मुझे तेरी help चाहिए।"
"क्या हुआ?"
तारा ने पूरी बात बताई - कैसे राजीव रविकांत को फंसाने की कोशिश कर रहा था।
"लेकिन Tara, तू इतना sure कैसे है? मतलब, हो सकता है रविकांत सच में guilty हों।"
"नहीं प्रिया। मुझे पता है। मैंने... मैंने उनके विचार सुने हैं।"
प्रिया ने एक पल सोचा। "ठीक है। मान लेती हूँ। लेकिन तू कर क्या सकती है? तेरे पास कोई proof नहीं है।"
"Proof ढूंढना होगा। राजीव ने fake documents बनाए होंगे। वे कहीं ना कहीं होंगे।"
"तू उसके cabin में घुसने की planning तो नहीं कर रही?" प्रिया ने shocked होकर पूछा।
"बस यही एक रास्ता है।"
"Tara! यह तो illegal है। अगर पकड़ी गई तो?"
"मैं risk लूंगी। रविकांत sir ने कुछ गलत नहीं किया। मैं उन्हें फंसते हुए नहीं देख सकती।"
अगले दो दिन तारा ने पूरी planning की। उसने observe किया कि राजीव कब office में होता है और कब नहीं। उसने देखा कि cleaning staff रात में कब आती है।
बुधवार की रात को करीब नौ बजे, जब सब लोग जा चुके थे, तारा office में वापस आई। उसने बहाना बनाया कि वह अपना laptop charger भूल गई थी।
Security guard ने उसे अंदर जाने दिया। तारा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसने elevator लेकर राजीव के floor पर गई।
राजीव का cabin खाली था और अंदर से locked। लेकिन तारा को पता था कि उसके एक colleague के पास master key थी - emergencies के लिए।
उसे वह key चाहिए थी। लेकिन कैसे?
तभी उसे याद आया - IT department में काम करने वाला अमित। वह हमेशा late तक रुकता था और उसके पास सभी cabins की access थी।
तारा ने अमित को ढूंढा। वह अपनी desk पर बैठा कुछ code लिख रहा था।
"अमित, hi!"
अमित ने चौंककर ऊपर देखा। "अरे तारा! तुम अभी तक?"
"हाँ, actually मुझे एक file चाहिए थी। राजीव sir के cabin में है। लेकिन वह lock है और sir phone नहीं उठा रहे।"
अमित ने suspicious नज़रों से देखा। "इतनी urgent file है?"
"हाँ, कल सुबह presentation है। बहुत ज़रूरी है।"
तारा ने ध्यान से अमित को देखा। उसके विचार सुनने की कोशिश की...
"यह लड़की झूठ तो नहीं बोल रही? लेकिन वैसे तारा बहुत genuine लगती है। और राजीव sir अक्सर files lock करके रख देते हैं। Help कर देता हूँ।"
"ठीक है, wait करो," अमित ने कहा और उठकर राजीव के cabin की ओर चल पड़ा।
उसने cabin खोला। "यहाँ। लेकिन जल्दी करो। मुझे lock करना है।"
"बस पाँच मिनट," तारा ने कहा और अंदर चली गई।
अध्याय 13: सबूत की तलाश
Cabin के अंदर अंधेरा था। तारा ने phone की flashlight on की और चारों ओर देखा। राजीव की desk पर कई files रखी हुई थीं। उसने एक-एक करके देखना शुरू किया।
पहली दो-तीन files में कुछ खास नहीं था - normal office documents, reports, presentations।
फिर उसने drawers खोलने शुरू किए। पहली drawer में stationery items थे। दूसरी में कुछ personal items - sunglasses, perfume, business cards।
तीसरी drawer locked थी। तारा ने हिम्मत करके उसे खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुली।
"Tara, कितना time लगेगा?" अमित ने बाहर से आवाज़ दी।
"बस दो मिनट और!"
तारा desperate हो रही थी। उसने desk के नीचे देखा, bookshelf को check किया, लेकिन कुछ नहीं मिला।
तभी उसकी नज़र राजीव की chair के पीछे लगी एक small cabinet पर पड़ी। वह भी locked थी, लेकिन lock बहुत simple था। तारा को याद आया कि उसके papa ने उसे बचपन में सिखाया था कि इस तरह के locks को कैसे खोलते हैं।
उसने एक paper clip उठाया और carefully lock में डाला। कुछ seconds बाद click की आवाज़ आई। Cabinet खुल गई!
अंदर कुछ files रखी थीं। तारा ने जल्दी-जल्दी उन्हें देखा। और तभी... उसे मिल गया! एक file जिस पर लिखा था "Confidential - Ravikant Case"।
उसने file खोली। उसमें कई documents थे - bank statements, transaction records, emails। लेकिन तारा ने गौर से देखा तो पाया कि कुछ documents में dates और signatures में छेड़छाड़ की गई थी। Photoshop किया हुआ लग रहा था।
और सबसे ज़रूरी - एक handwritten note जिसमें लिखा था: "These modified docs will be enough to frame Ravikant. Once he's out, the promotion is mine."
यह राजीव की handwriting थी!
तारा ने तुरंत अपने phone से सभी documents की photos खींच लीं। फिर file को वापस रख दिया और cabinet को lock कर दिया।
"Amित, निकल रहीहूँ!" उसने कहा और cabin से बाहर आ गई।
"File मिल गई?" अमित ने पूछा।
"हाँ, thank you so much! तुमने मेरी बहुत help की।"
अध्याय 14: अगला कदम
घर पहुंचकर तारा ने सारी photos को अपने laptop में transfer किया। उसने documents को carefully study किया। साफ़ था कि राजीव ने सब कुछ plan किया था।
लेकिन अब सवाल था - इन proofs को कैसे use करे? अगर वह सीधे HR को दिखा दे, तो सवाल उठेंगे कि उसे यह documents कैसे मिले। और फिर उस पर ही illegal entry और privacy breach का आरोप लग सकता था।
उसने प्रिया को call किया।
"प्रिया, मुझे proofs मिल गए। लेकिन problem है..."
उसने पूरी situation explain की।
"Hmm, tricky है। तुझे ऐसा करना होगा कि किसी को शक ना हो कि तूने राजीव के cabin में घुसकर यह सब निकाला है," प्रिया ने सोचते हुए कहा।
"क्या करूं?"
"एक minute... तूने कहा था कि वह handwritten note भी था, right?"
"हाँ।"
"तो यह कर - anonymously HR को एक email भेज। Proofs attach कर। लेकिन अपनी identity reveal मत कर। यह कह कि तू एक concerned employee है जिसे accidentally यह information मिली।"
तारा ने सोचा। यह idea ठीक लग रहा था।
अगले दिन सुबह, तारा ने एक नया email ID बनाया - concernedemployee2024@gmail.com। फिर उसने HR head को एक detailed email लिखा:
"Dear HR Team,
I am writing to you as a concerned employee of this organization. I have come across some information that suggests that Mr. Ravikant is being falsely accused of financial irregularities.
I have attached documents that prove that the evidence against Mr. Ravikant has been fabricated. These documents were found accidentally, and I believe it is my duty to bring this to your attention.
I am choosing to remain anonymous as I fear retaliation. However, I urge you to investigate this matter thoroughly.
A Concerned Employee"
उसने सभी documents attach किए और email send कर दिया।
अब बस wait करना था।
अध्याय 15: परिणाम
अगले दो दिन बहुत तनाव भरे रहे। Office में वही चर्चा चल रही थी - रविकांत के मामले की। लेकिन तारा ने किसी को कुछ नहीं बताया।
शुक्रवार की दोपहर को अचानक पूरे floor पर एक announcement हुआ - सभी employees को conference room में बुलाया गया।
तारा, प्रिया, अनन्या, और बाकी सब लोग confused होकर conference room में gather हुए। सामने HR head श्रीवास्तव साहब खड़े थे, और उनके साथ CEO भी थे।
"सबका धन्यवाद," श्रीवास्तव साहब ने शुरू किया। "मैं आप सबको एक important update देना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों से रविकांत sir के खिलाफ जो allegations लगे थे, उसकी thorough investigation की गई है।"
सभी लोग चुपचाप सुन रहे थे।
"Investigation में पता चला है कि यह allegations completely baseless थे। बल्कि, यह एक conspiracy थी - किसी ने deliberately रविकांत sir को फंसाने की कोशिश की थी।"
Conference room में एक हलचल मच गई।
"और उस व्यक्ति का नाम है... राजीव कुमार।"
सबकी निगाहें राजीव पर गईं, जो पीछे की row में बैठा था। उसका चेहरा पीला पड़ गया था।
"राजीव कुमार को immediate effect से suspend किया जाता है। उनके खिलाफ legal action भी लिया जाएगा। और रविकांत sir, हम आपसे माफी चाहते हैं इस पूरे ordeal के लिए।"
रविकांत खड़े हुए। उनकी आँखें नम थीं। "धन्यवाद। मुझे विश्वास था कि सच्चाई सामने आएगी।"
Meeting के बाद जब सब लोग निकल रहे थे, तारा ने देखा कि security guards राजीव को उसके cabin की ओर ले जा रहे थे - शायद उसका सामान pack करने के लिए।
प्रिया ने तारा का हाथ दबाया। "तूने सही किया।"
तारा ने मुस्कुराया। लेकिन अंदर से उसे थोड़ा अजीब लग रहा था। हाँ, उसने एक innocent आदमी को बचाया था। लेकिन राजीव की ज़िंदगी बर्बाद हो गई थी। क्या वह इसके लिए ज़िम्मेदार थी?
अध्याय 16: नैतिक द्वंद्व
उस रात तारा सो नहीं पाई। उसे राजीव की सूरत याद आ रही थी - जब वह security guards के साथ जा रहा था, तो कितना टूटा हुआ लग रहा था।
उसने खुद से सवाल किया - क्या उसने सही किया? हाँ, राजीव गलत था। उसने रविकांत sir को फंसाने की कोशिश की थी। लेकिन तारा ने भी तो गलत तरीका अपनाया था - किसी के cabin में unauthorized घुसना, documents चुराना।
और सबसे बड़ी बात - उसकी यह शक्ति। क्या वह सही था इसका इस तरह से इस्तेमाल करना?
सुबह उसने फिर से पंडित जी से मिलने का फैसला किया। उसे guidance चाहिए थी।
मंदिर पहुंचकर उसने देखा कि पंडित जी आरती कर रहे थे। आरती खत्म होने के बाद तारा ने उनसे बात की।
"पंडित जी, मैं confused हूँ। मैंने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके किसी की मदद की, लेकिन उस process में मुझे कुछ गलत काम भी करने पड़े।"
पंडित जी ने ध्यान से सुना। फिर बोले, "बेटी, यह बहुत पुराना philosophical question है - क्या end justify means करता है? क्या अच्छे result के लिए गलत रास्ता अपनाना सही है?"
"और आपका जवाब क्या है?"
"मेरा जवाब है - हर situation different होती है। कभी-कभी gray areas होते हैं जहाँ right और wrong clear नहीं होता। लेकिन important यह है कि तुम्हारी intention क्या थी। अगर तुमने किसी innocent को बचाने के लिए यह किया, तो यह एक बात है। लेकिन अगर revenge या jealousy से किया होता, तो दूसरी बात।"
तारा ने सिर हिलाया। "मेरी intention सिर्फ रविकांत sir को बचाना था।"
"तो फिर तुमने जो किया, वह गलत नहीं था। लेकिन हाँ, आगे से ध्यान रखना कि जब भी possible हो, legal और ethical रास्ता ही अपनाना।"
अध्याय 17: रविकांत sir का धन्यवाद
सोमवार को office में सबकुछ थोड़ा normal होने लगा था। राजीव का cabin खाली था। रविकांत sir को officially उनका नाम साफ़ कर दिया गया था।
Lunch break में जब तारा canteen जा रही थी, रविकांत sir ने उसे रोका।
"तारा, एक minute?"
"जी sir?"
रविकांत sir ने चारों ओर देखा, फिर धीरे से कहा, "मुझे पता है।"
तारा का दिल धक् से रह गया। "क्... क्या पता है, sir?"
"कि वह anonymous email तुमने भेजा था।"
"Sir, मैं..."
रविकांत sir ने हाथ उठाकर उसे रोका। "मुझे proof चाहिए नहीं। मैं बस यह कहना चाहता था - धन्यवाद। तुमने मेरी और मेरे परिवार की इज्ज़त बचाई। मैं हमेशा तुम्हारा आभारी रहूँगा।"
"Sir, मैंने बस वही किया जो सही था।"
"और वही तो सबसे मुश्किल होता है, बेटी। सही काम करना। खासकर जब उसमें risk हो।" रविकांत sir की आँखों में आँसू थे। "तुम बहुत brave हो।"
तारा को भी भावुक हो गई। "Sir, आप deserve करते थे justice।"
उस पल तारा को एहसास हुआ कि शायद यही उसकी शक्ति का मकसद था - justice दिलाना, सच्चाई को सामने लाना।
अध्याय 18: नया challenge
अगले कुछ हफ्ते relatively शांत रहे। तारा ने अपनी routine में settle हो गई। वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल carefully करती - सिर्फ जब बहुत ज़रूरी होता।
उसअपनी