एपिसोड 8: बिसात के मोहरे
नीली रोशनी की वह चमक माया की आँखों में स्थिर हो गई थी। अनाथालय के पुराने वॉर्ड नंबर 9 की दीवारों पर जमी काई और धूल अब उसे एक जीवित मानचित्र की तरह दिखाई दे रहे थे। उसे महसूस हो रहा था कि हवा की हर लहर में एक कहानी छिपी है।
नन अपनी धुंधली आँखों से माया को देख रही थी, लेकिन वह देख नहीं रही थी, वह पहचान रही थी। "तो खेल पूरा हुआ," नन ने बुदबुदाते हुए कहा। "नंदिनी ने सोचा था कि वह तुम्हें ताबीज देकर बचा रही है, पर उसे क्या पता था कि वह तुम्हें एक और बड़ी जेल के लिए तैयार कर रही थी।"
"कैसी जेल? यह शक्ति क्या है?" माया की आवाज़ में एक अजीब सी गूँज थी, जैसे उसके साथ कई और लोग भी बोल रहे हों।
विश्वासघात की गूँज
तभी अनाथालय के बाहर टायर रगड़ने की आवाज़ सुनाई दी। इशान की गाड़ी वहाँ रुकी। वह बदहवास होकर अंदर भागा, उसके हाथ में वही पुरानी फाइल और एक पिस्तौल थी। लेकिन जैसे ही उसने माया को देखा, उसके कदम ठिठक गए।
माया के चारों ओर एक सूक्ष्म नीला आभामंडल (aura) तैर रहा था। उसकी त्वचा पारभासी (translucent) सी लग रही थी, जिसके नीचे नीली नसें चमक रही थीं।
"माया... तुम..." इशान की आवाज़ कांपी।
"इशान, तुमने कहा था कि 'अमरत्व' संगठन के पीछे तुम सालों से हो," माया उसकी ओर बढ़ी। उसके हर कदम के साथ फर्श पर जमे धूल के कण हवा में नाचने लगते। "लेकिन तुमने यह नहीं बताया कि तुम उस संगठन के 'क्यूरेटर' के बेटे हो। तुमने यह नहीं बताया कि आर्यन को बलि के लिए तुमने ही चुना था।"
इशान के चेहरे का रंग उड़ गया। "नहीं माया, तुम गलत समझ रही हो। मुझे मजबूर किया गया था। मैंने सोचा था कि अगर मैं तुम्हें उस सराय तक ले जाऊँगा और तुम उस ताबीज को नष्ट कर दोगी, तो वह 'ऊर्जा' हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। मुझे नहीं पता था कि वह ऊर्जा अपना नया ठिकाना ढूंढ लेगी।"
"झूठ!" माया चिल्लाई। उसके चिल्लाते ही कमरे की खिड़कियों के शीशे चटक गए। "तुम जानते थे कि ताबीज एक 'फिल्टर' था। उसने 50 सालों तक उस शक्ति को शुद्ध किया, उसे मानवीय भावनाओं से सींचा, ताकि वह मेरे जैसे किसी शरीर को पूरी तरह से नियंत्रित कर सके। मैं तुम्हारी कोई खोज नहीं हूँ, इशान... मैं तुम्हारा 'प्रोजेक्ट' हूँ।"
'माया' का आगमन
इससे पहले कि इशान कुछ सफाई देता, अनाथालय का भारी दरवाजा अपने आप खुल गया। बाहर से काली सूट पहने तीन लोग अंदर आए। उनके बीच में एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति था, जिसकी चाल में एक अजीब सा ठहराव था। उसके हाथ में एक चांदी की छड़ी थी जिस पर वही नीलकमल का चिन्ह बना था।
इशान उसे देखते ही घुटनों के बल बैठ गया। "पिताजी... मैंने इसे संभाल लिया था।"
माया को झटका लगा। इशान का पिता—वही आदमी जो 1974 की तस्वीरों में विमला के बगल में खड़ा एक युवा डॉक्टर था। उसका नाम डॉक्टर अविनाश था, लेकिन संगठन में उसे 'द आर्किटेक्ट' कहा जाता था।
"तुमने अच्छा काम किया इशान," अविनाश की आवाज़ ठंडी और यांत्रिक थी। उसने माया की ओर देखा। "स्वागत है, माया। या मुझे तुम्हें 'सब्जेक्ट 0' कहना चाहिए? 50 साल पहले हमने सराय में जो बोया था, आज वह पूरी तरह खिल चुका है।"
माया ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। "विमला कहाँ है? उसने क्या किया उन मासूमों के साथ?"
अविनाश मुस्कुराया। "विमला? वह तो बस एक माध्यम थी। वह अपनी मृत बेटी को वापस पाने की लालसा में थी, और हमने उसकी उस ममता का इस्तेमाल अपनी प्रयोगशाला के लिए किया। वह बच्ची, जिसे तुमने कल रात 'आजाद' होते देखा, वह कोई आत्मा नहीं थी। वह उस नीली ऊर्जा का शुद्ध रूप थी। ताबीज टूटने पर उसने तुम्हें नहीं चुना, तुमने उसे अपनी नफरत और प्रतिशोध से आकर्षित किया।"
रूहों का संग्राम
डॉक्टर अविनाश ने अपनी छड़ी ज़मीन पर पटकी। अचानक, माया को अपने दिमाग के अंदर हज़ारों चीखें सुनाई देने लगीं। वे उन लोगों की थीं जो 1974 में सराय में गायब हो गए थे। आर्यन, विमला की बेटी, और वे तमाम मुसाफिर—उन सबकी स्मृतियाँ माया के मस्तिष्क में एक विस्फोट की तरह फटने लगीं।
"तुम इसे संभाल नहीं पाओगी, माया," अविनाश आगे बढ़ा। "यह शक्ति एक इंसान के लिए बहुत भारी है। हमें सौंप दो, हम तुम्हें इस दर्द से मुक्ति दिला देंगे।"
माया का शरीर कांपने लगा। उसकी आँखों से खून के आंसू बहने लगे, लेकिन वे लाल नहीं, बल्कि चमकदार नीले थे। उसे महसूस हुआ कि उसका अस्तित्व मिट रहा है। तभी, उसकी चेतना के किसी कोने से एक जानी-पहचानी मोगरे की खुशबू आई।
नंदिनी।
"माया... डरो मत," एक ममतामयी आवाज़ उसके भीतर गूँजी। "वे तुम्हें डराकर तुम्हारी शक्ति छीनना चाहते हैं। तुम उनकी बिसात का मोहरा नहीं, तुम उस बिसात को पलटने वाली आग हो। अपनी आँखों को बंद करो और उस अंधेरे को देखो जिसे तुमने सराय में देखा था।"
माया ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने अविनाश की बातों को सुनना बंद कर दिया। उसने उस नीली ऊर्जा को अपने भीतर दबाने के बजाय, उसे फैलने दिया। उसने उसे स्वीकार कर लिया।
जब उसने आँखें खोलीं, तो पूरा कमरा जम चुका था। इशान और उसके पिता पत्थर की तरह अपनी जगह पर ठिठक गए थे। समय जैसे रुक गया था।
विरासत का अंत या नया अध्याय?
माया धीरे से उठी। वह अब डर नहीं रही थी। उसने देखा कि अविनाश के सीने के अंदर एक छोटा सा यंत्र धड़क रहा था—यही उसकी अमरता का राज था।
उसने अपना हाथ हवा में लहराया और कमरे में रुकी हुई धूल के कणों से एक आकृति बनने लगी। वह आर्यन था। लेकिन इस बार वह कोई डरावना साया नहीं था। वह एक रक्षक की तरह माया के पीछे खड़ा था।
"इशान," माया ने ठहरे हुए समय के बीच कहा। "तुमने अपनी भाई की रूह का सौदा किया था। अब उसकी मुक्ति का समय है।"
माया ने अपनी हथेली अविनाश की ओर की। एक तीव्र नीली लहर उससे निकली और पूरे अनाथालय को अपनी चपेट में ले लिया। वह कोई विनाशकारी लहर नहीं थी, बल्कि एक 'शुद्धिकरण' (cleansing) था।
अविनाश का वह चांदी का यंत्र काला पड़कर टूट गया। उसकी उम्र के 50 साल एक ही पल में उसके चेहरे पर उतर आए। वह अचानक एक बूढ़ा, असहाय आदमी बनकर गिर पड़ा। इशान चिल्लाया, लेकिन उसकी आवाज़ माया तक नहीं पहुँच रही थी।
जैसे ही ऊर्जा शांत हुई, माया ने देखा कि अनाथालय की दीवारें अब पारदर्शी हो रही थीं। उसे शहर के नीचे दबे हुए वे सारे राज दिखने लगे जिन्हें 'माया' संगठन ने छिपाया था—अस्पतालों के नीचे बनी गुप्त प्रयोगशालाएं, राजनेताओं के तहखाने और उन फाइलों के ढेर जहाँ मासूमों की ज़िंदगी के सौदे होते थे।
"यह सिर्फ शुरुआत है," माया ने इशान की ओर देखते हुए कहा, जो अब फर्श पर सिसक रहा था। "तुमने मुझे वह बनाया है जो तुम कभी नहीं बन सके। तुमने एक रक्षक को जन्म दिया है जिसे अब कोई ताबीज नहीं रोक सकता।"
माया अनाथालय से बाहर निकल गई। सूरज अब पूरी तरह उग चुका था, लेकिन उसकी रोशनी माया की नीली चमक के सामने फीकी थी। वह जानती थी कि उसे अब कहाँ जाना है। शहर के बीचों-बीच वह ऊंची इमारत, जहाँ 'माया' संगठन का मुख्यालय था, उसकी अगली मंजिल थी।
पीछे मलबे में, नन ने अपना अंतिम सांस ली। उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। उसे पता था कि अब हिसाब बराबर होगा।
अगले एपिसोड में:
माया 'माया' संगठन के मुख्यालय में प्रवेश करती है। क्या वह अपने भीतर के इस 'दानव' को नियंत्रित कर पाएगी या वह खुद वही बन जाएगी जिससे वह लड़ रही है? और इशान के पास अब भी एक ऐसा राज है जो माया की पूरी दुनिया उजाड़ सकता है