सुनीति अपने घर में टहल रही है। बेचैन नज़रें, कांपते हाथ। अचानक दरवाज़े पर घंटी बजती है।
सुनीति (दरवाज़ा खोलते हुए) बोली -
तरुण… अंदर आओ।
तरुण अंदर आता है। सुनीति उसे बैठने का इशारा करती है।
सुनीति (गंभीर आवाज़ में) बोली -
तरुण… अब मैं तुमसे वो बात कहने जा रही हूँ, जो शायद कोई विश्वास नहीं करेगा।
ये कमरा… ये जगह… ये सिर्फ़ मेरी नहीं है। यहाँ कोई और भी है… कौशिक ठाकुर।
तरुण थोड़ी देर चुप रहता है, फिर हंसकर कहता है।
तरुण बोला -
मतलब वही लड़का जो गायब हो गया था?
सुनीति (तेज़ी से सिर हिलाकर) बोली -
हाँ… वो यहीं है। अदृश्य। मैंने उसे महसूस किया है, उसकी साँसे, उसका स्पर्श… सब।
सुनीति धीरे से डायरी निकालकर टेबल पर रखती है। पेन अपने आप हिलता है और शब्द बनने लगते हैं। तरुण की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं।
पेन पर लिखावट (कौशिक) बोला -
तरुण… मैं यहीं हूँ। बस दिखाई नहीं देता।
तरुण खड़ा होकर इधर-उधर देखता है, फिर हल्की हंसी में भावुक हो जाता है।
तरुण बोला -
वाह भाई! तू तो सच में ज़िंदा है।
टेंशन मत ले… अब तू अकेला नहीं है।
ये तरुण चौधरी सबके साथ खड़ा है। और ये मेरी मुंहबोली बहन भी।
सुनीति की आँखें भर आती हैं। तरुण उसके कंधे पर हाथ रखता है।
सुनीति, तरुण और अदृश्य कौशिक जैसे एक ही फ्रेम में महसूस होते हैं। पेन फिर से चलता है।)
कौशिक (लिखता है) -
तरुण… तुम सच्चे दोस्त हो।
सुनीति और तुम दोनों मिलकर मुझे इस हाल से बाहर निकाल सकते हो।
तरुण मुस्कुराकर डायरी को छूता है।
तरुण बोला
भाई, अब चाहे साइंस हो या साज़िश… तुझे फिर से दुनिया के सामने लाना ही होगा।
ये वादा रहा।
सुनीति धीरे से गीता उठाती है और अपने दिल पर रखती है।
सुनीति (धीरे से) बोली -
हम तीनों… अब एक साथ हैं।
अब खेल बदल चुका था।
सुनीति अकेली नहीं रही। तरुण भी इस मिशन का हिस्सा बन चुका था।
अब अदृश्य प्रेम कहानी एक नए सफ़र की ओर बढ़ रही थी…
जहाँ दोस्ती, प्यार और सच्चाई मिलकर अंधेरे का सामना करने वाले थे।
सुनीति, राकेश, राधिका और गुंजन ड्रॉइंग रूम में बैठे हैं। ये थे सुनीति के सगे भाई बहन। सामने कौशिक की डायरी और नक्शा फैला हुआ है।
राकेश (गंभीर होकर) बोला -
ये लैब शहर के बाहर पुराने इंडस्ट्रियल एरिया में है।
अंदर घुसना आसान नहीं होगा। वहाँ सिक्योरिटी कैमरे, गार्ड और खास पास कोड्स हैं।
राधिका (सोचते हुए) बोली -
लेकिन अगर कौशिक हमारे साथ है… तो शायद हमें फायदा मिल सकता है।
वो अदृश्य है, वो हमें रास्ता दिखा सकता है।
गुंजन (डरी हुई) बोली -
लेकिन सुनीति बेटा… अगर पकड़े गए तो? हमें जेल भी हो सकती है।
सुनीति उसका हाथ पकड़कर दिलासा देती है।
सुनीति (नरम आवाज़ में) बोली -
गुंजन, ये सिर्फ़ हमारे लिए नहीं है।
ये कौशिक की ज़िंदगी का सवाल है।
हमें उसे उसकी असली पहचान लौटानी ही होगी।
टेबल पर रखा पेन अपने आप चलता है।
पेन पर लिखावट (कौशिक) बोला -
राकेश भैया, आप नक्शा बनाओ।
राधिका दीदी, आप लैब की सिक्योरिटी शिफ्ट्स पता करो।
गुंजन दीदी, आप कंप्यूटर से सिक्योरिटी कोड हैक कर सकती हो।
सुनीति… तुम सबको जोड़कर लीड करोगी।
सब चौंककर एक-दूसरे को देखते हैं।
राधिका (मुस्कुराकर) बोली -
लगता है हमारे पास अब एक इनविज़िबल कमांडर भी है।
राकेश दीवार पर चार्ट लगाता है। उस पर लैब का नक्शा बनाता है। राधिका अपने नोट्स चिपकाती है। गुंजन लैपटॉप खोलकर टाइप करने लगती है।
गुंजन बोली -
सिक्योरिटी कोड हर 12 घंटे में बदलता है।
लेकिन मैं सिस्टम को ट्रेस करके 2 घंटे की विंडो में फिक्स कर सकती हूँ।
राकेश बोला -
अगर हमें अंदर जाना है, तो आधी रात सबसे सही वक्त होगा।
सुनीति (दृढ़ता से) बोली -
ठीक है। तो तय रहा।
कल रात 12 बजे… मिशन शुरू होगा।
कमरे में हल्की हवा चलती है। अचानक सुनीति को अपने कंधे पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस होता है। वो मुस्कुराती है।
सुनीति (धीरे से, हवा से बातें करते हुए) बोली -
कौशिक… मुझे भरोसा है, तुम हमारे साथ हो।
अब जंग तय हो चुकी थी।
चार इंसान और एक अदृश्य आत्मा…
वो सच जानने निकलने वाले थे, जो अब तक अंधेरे में छुपा था।
सुनीति, राकेश, राधिका और गुंजन प्लानिंग में व्यस्त हैं। दीवार पर नक्शा टंगा है, टेबल पर डायरी और लैपटॉप खुले हैं। तभी दरवाज़ा धड़ाम से खुलता है।
तरुण (मुस्कुराते हुए, थोड़ी शरारत से) बोला -
वाह! तो ये सब गुपचुप मिशन चल रहा है और मुझे बताया भी नहीं?
क्या समझा है तुम लोगों ने, मैं पीछे रह जाऊँगा?
सब चौंककर उसकी तरफ़ देखते हैं। सुनीति माथे पर हाथ रख लेती है।
सुनीति (झुंझलाकर) बोली -
तरुण! तुम यहाँ क्या कर रहे हो? ये बहुत सीरियस मामला है।
तरुण (हाथ बाँधकर) बोला -
तो मुझे भी सीरियस बना लो।
वैसे भी मुझे एडवेंचर का बड़ा शौक है।
और सुन लो—अगर तुम लोगों ने मुझे साथ नहीं लिया, तो मैं खुद ही लैब चला जाऊँगा।
राधिका (धीरे से हँसकर) बोली -
“लगता है हमें एक और साथी मिल गया है।”
गुंजन (हिचकिचाकर) बोली -
पर… तरुण, ये खेल नहीं है। ये खतरनाक मिशन है।
तरुण (मुस्कुराकर) बोला -
तो और मज़ा आएगा। मैं तुम्हारा ‘कमांडो’ बन जाऊँगा।
सब हल्की हंसी में ढीले पड़ जाते हैं। तभी टेबल पर रखा पेन अपने आप हिलता है।
पेन पर लिखावट (कौशिक) बोला -
तरुण… तुम्हारी हिम्मत काबिल-ए-तारीफ है।
अब तुम भी हमारी टीम का हिस्सा हो।
तरुण (मुस्कुराकर, हवा में देखते हुए) बोला -
धन्यवाद भाई! अदृश्य हो, लेकिन दिल से ज़रूर बड़े हो।
सुनीता सबको देखती है। उसकी आँखों में चमक और हिम्मत दोनों हैं।
सुनीति(दृढ़ स्वर में) बोली -
ठीक है। अब हमारी टीम पूरी हो गई है।
राकेश भैया– नक्शे का मास्टर।
राधिका दीदी– सिक्योरिटी शिफ्ट्स की एक्सपर्ट।
गुंजन – टेक्निकल हैकर।
तरुण – हमारा फील्ड कमांडो।
और… कौशिक – अदृश्य रक्षक।
सबके चेहरे पर आत्मविश्वास झलकता है। कौशिक की मौजूदगी की हल्की हवा सबको छूती है।
अब पाँच इंसान और एक अदृश्य आत्मा,
एक ऐसे मिशन के लिए तैयार थे,
जो उनकी ज़िंदगियाँ हमेशा के लिए बदल देगा।
घड़ी में 12 बजते ही सब घर से निकलते हैं। राकेश नक्शा लेकर सबसे आगे है। सुनीति उसके पीछे, राधिका और गुंजन दोनों बैग लेकर साथ चल रही हैं। तरुण मज़ाकिया मूड में है, पर चेहरे पर जोश भी है।
तरुण (धीरे से फुसफुसाकर) बोला -
ये तो किसी मूवी का सीन लग रहा है… बस कैमरा और बैकग्राउंड म्यूज़िक की कमी है।
सब हल्का-सा मुस्कुराते हैं। तभी हवा का झोंका आता है। सुनीति को कंधे पर स्पर्श महसूस होता है। वो समझ जाती है कि कौशिक साथ है।
सुनीति (धीरे से) बोली -
धन्यवाद… तुम हमारे साथ हो।
टीम पुराने इंडस्ट्रियल एरिया पहुँचती है। चारों तरफ़ अंधेरा और टूटी-फूटी बिल्डिंग्स। दूर एक इमारत पर लाल लाइट जल रही है – वही लैब है।
राकेश (नक्शे की ओर इशारा करके) बोला -
वो सामने देख रहे हो? यही है असली जगह।
लेकिन यहाँ से अंदर घुसना आसान नहीं होगा।
चारों तरफ़ सिक्योरिटी गार्ड्स हैं।
गुंजन (लैपटॉप खोलकर) बोली -
अगर मुझे पाँच मिनट मिल जाएँ, तो मैं सिक्योरिटी कैमरे बंद कर सकती हूँ।
टीम धीरे-धीरे दीवार के पास पहुँचती है। अचानक टॉर्च की रोशनी उन पर पड़ने लगती है। गार्ड चिल्लाता है -
गार्ड बोला -
कौन है वहाँ?
सब घबरा जाते हैं। तभी कौशिक आगे बढ़ता है। अचानक गार्ड के हाथ से टॉर्च छूटकर गिर जाती है और उसका हेलमेट लुढ़ककर दूर चला जाता है। गार्ड चौंककर इधर-उधर देखने लगता है।
गार्ड (घबराकर) बोला -
क…कौन है? हवा में किसने धक्का दिया?
गार्ड डरकर पीछे हट जाता है। टीम को मौका मिल जाता है और वो तेजी से दीवार के पीछे छुप जाते हैं।
तरुण (हंसते हुए फुसफुसाकर) बोला -
भाई… हमारा अदृश्य हीरो वाकई कमाल है।
गुंजन लैपटॉप खोलकर तेजी से टाइप करती है।
गुंजन बोली -
कैमरे 2 मिनट के लिए ऑफ हो जाएंगे… बस इसी दौरान हमें अंदर जाना होगा।
सब तैयार हो जाते हैं। सुनीता सबकी तरफ़ देखती है।
सुनीति (दृढ़ता से) बोली -
ठीक है। अब वापस लौटने का रास्ता नहीं है।
आज रात हम सच जानकर रहेंगे।
आधी रात का वो सफ़र अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका था।
टीम ने पहला खतरा पार कर लिया था…
लेकिन असली जंग अभी लैब के अंदर उनका इंतज़ार कर रही थी।