एपिसोड: 'शतरंज के मोहरे और अदृश्य हाथ'
1. जेल की सलाखें और सुलगती साज़िश
शहर की सेंट्रल जेल में, जहाँ सिंघानिया और सोमनाथ अपनी सज़ा काट रहे थे, वहां माहौल कुछ अलग था। सिंघानिया की आँखों में हार की हताशा नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी।
सलाखों के पीछे खड़ा सोमनाथ घबराया हुआ था। "सिंघानिया, रणवीर वापस आ गया है। अगर उसने आर्यन से हाथ मिला लिया, तो हम कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे।"
सिंघानिया ठंडे स्वर में हंसा। "रणवीर? वह एक ज़ख्मी शेर है, सोमनाथ। और ज़ख्मी शेर कभी पालतू नहीं होते। उसे मैंने ही उकसाया था कि वह वापस आए, लेकिन मेरा असली 'ट्रम्प कार्ड' तो कोई और है।"
तभी एक पुलिस कॉन्स्टेबल चुपके से सिंघानिया के पास एक पर्ची फेंक गया। उस पर लिखा था: "काम शुरू हो चुका है। खन्ना एंटरप्राइज़ेस की नीव हिलने वाली है।"
2. कॉर्पोरेट स्ट्राइक: 'द ब्लैक मंडे'
अगली सुबह जब आर्यन और राधिका ऑफिस पहुँचे, तो वहां अफ़रा-तफ़री मची थी। कंपनी के शेयर्स अचानक गिरने लगे थे। कोई अज्ञात शक्ति बाज़ार से भारी मात्रा में शेयर्स बेच रही थी।
"आर्यन, यह सामान्य गिरावट नहीं है," राधिका ने तेज़ी से कीबोर्ड पर उंगलियाँ चलाते हुए कहा। "कोई 'शॉर्ट सेलिंग' कर रहा है। अगर यह नहीं रुका, तो शाम तक हमारी कंपनी की वैल्यू आधी रह जाएगी।"
तभी बोर्ड रूम का दरवाज़ा खुला और एक लंबा, सूट-बूट में सुसज्जित युवक अंदर आया। उसके पीछे वकीलों की एक पूरी फौज थी।
"नमस्ते, मिस्टर खन्ना। मैं हूँ ऋषभ मल्होत्रा, 'मल्होत्रा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज' का सीईओ।" उसने एक फाइल मेज़ पर पटकी। "मैंने खन्ना एंटरप्राइज़ेस के ३०% शेयर्स खरीद लिए हैं। अब से, इस कंपनी के हर बड़े फैसले में मेरा वीटो (Veto) होगा।"
आर्यन खड़ा हो गया। "ऋषभ? मल्होत्रा ग्रुप तो हमारे पार्टनर्स थे। यह धोखा क्यों?"
ऋषभ मुस्कुराया, "बिज़नेस में कोई पार्टनर नहीं होता, आर्यन। सिर्फ़ फायदा होता है। और मुझे फायदा तब दिख रहा है जब खन्ना मेंशन की ईंट से ईंट बज जाए।"
3. देब का सुराग: वह 'तीसरा व्यक्ति'
देब उस रात की सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहा था जब रणवीर मेंशन में आया था। उसने गौर किया कि रणवीर जिस गाड़ी से आया था, उसका नंबर प्लेट फर्जी था। लेकिन गाड़ी के शीशे पर एक खास लोगो (Logo) बना था—एक 'सांप और खंजर' का निशान।
यह निशान किसी बिज़नेस घराने का नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड के एक पुराने सिंडिकेट का था।
देब ने तुरंत अपने पुराने मुखबिर को फोन किया। "चाचा, 'सांप और खंजर' का निशान किसका है?"
दूसरी तरफ़ से आवाज़ कांपी। "बेटा, उस रास्ते मत जाओ। यह 'निशान' उसका है जिसे लोग 'द घोस्ट' (The Ghost) कहते हैं। वह कोई और नहीं, बल्कि वह इंसान है जिसने सालों पहले रणवीर को मरने के लिए छोड़ा था।"
देब को समझ आ गया कि रणवीर सिर्फ़ बदला लेने नहीं आया था, बल्कि उसे भी कोई और कंट्रोल कर रहा था।
4. राधिका की जासूसी और एक खतरनाक मोड़
राधिका ने ऋषभ मल्होत्रा के पेपर्स की जांच करते हुए एक ऐसी चीज़ पकड़ ली जो किसी की नज़र में नहीं आई थी। ऋषभ को फंडिंग एक ऐसी शेल कंपनी (Shell Company) से मिल रही थी जिसका मालिकाना हक किसी 'आर.के.' के पास था।
"आर.के.? क्या यह रणवीर खन्ना है?" राधिका ने खुद से सवाल किया।
तभी उसे उसके फोन पर एक मैसेज मिला। एक लोकेशन और एक संदेश: "अगर सच जानना चाहती हो, तो अकेले आओ। तुम्हारे ससुर की मौत का राज़ यहाँ है।"
बिना आर्यन को बताए, राधिका उस पुरानी फैक्ट्री की ओर निकल गई जहाँ २५ साल पहले आग लगी थी।
5. क्लाइमैक्स: आग की लपटें और पुरानी यादें
फैक्ट्री के खंडहर में राधिका पहुँची, तो वहां सन्नाटा था। अचानक पीछे से एक आवाज़ आई।
"तुम बहुत बहादुर हो, राधिका। बिल्कुल आर्यन की माँ की तरह।"
राधिका पलटी। सामने रणवीर खड़ा था, लेकिन इस बार उसके हाथ में बंदूक थी। पर उसकी आँखों में राधिका के लिए नफरत नहीं, बल्कि बेबसी थी।
"बड़े पापा? आपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया?" राधिका ने हिम्मत जुटाकर पूछा।
"मैंने नहीं बुलाया," रणवीर ने फुसफुसाते हुए कहा। "हमें यहाँ फँसाया गया है।"
तभी फैक्ट्री के सारे दरवाज़े अपने आप बंद हो गए और चारों तरफ़ से पेट्रोल की महक आने लगी। ऊपर की बालकनी पर एक साया खड़ा हुआ। वह कोई और नहीं, बल्कि आर्यन का सबसे वफ़ादार मैनेजर, मिस्टर खन्ना का पुराना सेक्रेटरी—खन्ना अंकल (जिन्हें सब मृत मान चुके थे) था।
"२५ साल पहले जो काम अधूरा रह गया था, वह आज पूरा होगा," खन्ना अंकल की आवाज़ गूँजी। "रणवीर और खन्ना खानदान की होने वाली बहू... दोनों आज इसी आग में राख हो जाएंगे।"