Vashikarini - 4 in Hindi Horror Stories by Pooja Singh books and stories PDF | वाशिकारिणी - 4

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वाशिकारिणी - 4

सच का पहला दरवाज़ा
उस आदमी की आवाज़ में अजीब सी ठंडक थी।
शक्ति उसकी तरफ देखता रहा, जैसे शब्द उसके कानों तक पहुँच ही नहीं रहे हों।
“सच…?”
शक्ति की आवाज़ काँप गई।
“तुम कौन हो? और तुम्हें ये सब कैसे पता?”
आदमी हल्की मुस्कान के साथ बोला—
“मेरा नाम जानना अभी ज़रूरी नहीं है। ज़रूरी ये है कि जो तुमने अभी देखा… वो सिर्फ़ शुरुआत थी।”
शक्ति के दिमाग़ में रति का चेहरा घूम गया—
उसकी आँखें, आँसू, और अचानक गायब हो जाना।
“वो सच में थी या… कोई परछाईं?”
आदमी ने धीमे स्वर में कहा—
“वो ज़िंदा है… और नहीं भी।”
“ये कैसी बकवास है?”
शक्ति गुस्से में चिल्लाया।
आदमी ने ज़मीन पर पड़ा एक पुराना लॉकेट उठाया और उसकी ओर बढ़ा दिया।
“इसे पहचानते हो?”
शक्ति के हाथ काँप गए।
“ये… ये तो इच्छा का है। उसने कभी इसे उतारा नहीं…”
“क्योंकि ये सिर्फ़ लॉकेट नहीं है,”
आदमी की आँखें गहरी हो गईं,
“ये एक कड़ी है—ज़िंदा और मरे हुए संसार के बीच।”
शक्ति के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
“इच्छा कहाँ है?”
आदमी ने आसमान की ओर देखा—
“जहाँ जाने के बाद इंसान या तो सब कुछ खो देता है… या फिर खुद को।”
“मुझे वहाँ ले चलो,”
शक्ति बिना रुके बोला।
“अगर इच्छा ज़िंदा है… तो मैं उसे हर हाल में वापस लाऊँगा।”
आदमी ने पहली बार उसकी आँखों में देखा।
“तो फिर सुनो… पाँच साल पहले, जिस रात तुमने शहर छोड़ा था… उसी रात इच्छा ने एक ऐसा रास्ता चुना, जहाँ से वापसी आसान नहीं होती।”
हवा तेज़ हो गई।
पास के पेड़ सरसराने लगे।
शक्ति के कानों में जैसे किसी बच्चे की धीमी आवाज़ गूँज उठी—
“भैया…”
वो पीछे मुड़ा।
वहाँ कोई नहीं था।
“ये जगह तुम्हें पहचान चुकी है,”
आदमी बोला।
“और जब कोई जगह तुम्हें पहचान ले… तो वो तुम्हें जाने नहीं देती।”
शक्ति ने मुट्ठियाँ भींच लीं।
“मुझे डर नहीं लगता।”
आदमी ने ठंडी हँसी हँसी—
“डर लगेगा… जब तुम्हें पता चलेगा कि प्रिया अब वो प्रिया नहीं रही।”
शक्ति के दिल की धड़कन रुक सी गई।
“तुम क्या कहना चाहते हो?”
आदमी ने एक दिशा में इशारा किया—
“अगर सच्चाई चाहिए… तो सूरज उगने से पहले वहाँ पहुँचना होगा।”
“कहाँ?”
आदमी की आवाज़ भारी हो गई—
“उस किले में… जहाँ से इच्छा कभी लौटी ही नहीं।”
शक्ति की आँखों के सामने अंधेरा और रोशनी एक साथ नाचने लगे।
उसे एहसास हो गया—
ये सिर्फ़ तलाश नहीं थी…
सूरज डूब चुका था।
आसमान पर चाँद नहीं था… जैसे अंधेरे ने उसे निगल लिया हो।
शक्ति किले के सामने खड़ा था।
सदियों पुरानी दीवारें, जिन पर काई और खून जैसे दाग जमे थे।
हवा जब उन दरारों से टकराती, तो ऐसा लगता जैसे कोई कराह रहा हो।
“यही है वो जगह…”
उस अजनबी आदमी की आवाज़ उसके कानों में गूँजी,
लेकिन जब शक्ति ने पीछे देखा—
वहाँ कोई नहीं था।
किले का दरवाज़ा अपने आप चरमराता हुआ खुल गया।
शक्ति का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
हर क़दम के साथ फर्श से ठक… ठक… की आवाज़ गूँजती।
तभी…
छप… छप…
उसने नीचे देखा।
फर्श गीला था।
लेकिन पानी नहीं था।
खून।
अचानक दीवारों पर हाथों के निशान उभरने लगे।
सैकड़ों… हज़ारों हाथ—
जो बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।
“कोई है…?”
शक्ति की आवाज़ खुद उसे अजनबी लगी।
पीछे से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।
वो मुड़ा—
एक साया उसकी तरफ़ भाग रहा था।
शक्ति पीछे हटने लगा, तभी साया उसके आर-पार निकल गया।
कान के पास फुसफुसाहट हुई—
“वापस जाओ…”
शक्ति चीख पड़ा।
तभी सामने एक कमरा दिखाई दिया।
अंदर लाल रोशनी जल रही थी।
दीवारों पर लटकी थीं…
जंजीरें।
और बीच में—
एक लड़की।
उसकी पीठ शक्ति की तरफ थी।
सफ़ेद कपड़े खून से सने थे।
“प्रिया…?”
शक्ति काँपते हुए बोला।
लड़की ने धीरे-धीरे गर्दन घुमाई।
उसका चेहरा…
आँखें नहीं थीं।
खाली गड्ढे।
उसके मुँह से काली धुंआ निकलने लगा।
“भैया…”
आवाज़ एक साथ कई लोगों की थी।
शक्ति ज़मीन पर गिर पड़ा।
तभी पूरे किले में घंटियाँ बजने लगीं।
दीवारें हिलने लगीं।
छत से लाशें टपकने लगीं।
कुछ अधजली, कुछ सड़ी हुई।
शक्ति घिसटते हुए पीछे हट रहा था तभी
उसके पैर किसी चीज़ से टकराए।
उसने देखा—
इच्छा का लॉकेट।
लेकिन लॉकेट खुला हुआ था।
अंदर फोटो नहीं था।
बल्कि…
एक आँख।
ज़िंदा।
वो आँख पलक झपकाने लगी।
अचानक किसी ने उसके बाल पकड़ लिए।
पीछे से वही आवाज़ आई—
“अब बहुत देर हो चुकी है, शक्ति…”
शक्ति ने डर से चीख मारी—
और पूरा किला एक साथ चीख उठा।ये एक श्राप की शुरुआत थी।