भाग–1 (Part–A)
शैतान से टकराई एक मासूम ज़िंदगी
मुंबई की रातें अक्सर रौशनी से चमकती हैं,
लेकिन उस रात अँधेरा ज़्यादा भारी था।
समंदर के पास खड़ी उस आलीशान बिल्डिंग की सबसे ऊँची मंज़िल पर
एक आदमी खड़ा था—
हाथ में व्हिस्की का ग्लास, आँखों में बेरहमी।
रिहान अज़ीम ख़ान।
बिज़नेस वर्ल्ड का अनक्राउन्ड किंग।
माफ़िया वर्ल्ड का बेताज बादशाह।
उसके नाम से शेयर मार्केट हिल जाता था,
और अंडरवर्ल्ड में मौत का ऑर्डर निकल जाता था।
“सर, लड़की मिल गई है,”
पीछे खड़े आदमी ने डरते हुए कहा।
रिहान ने बिना पीछे देखे पूछा,
“ज़िंदा है?”
“जी… अभी तक।”
रिहान के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई—
जो मुस्कान नहीं, खतरे का संकेत थी।
इरा की दुनिया
इरा खान—
मिडल क्लास ज़िंदगी, छोटे सपने, और बहुत सारी मजबूरियाँ।
वो एक एनजीओ में काम करती थी,
जहाँ उसने कभी सोचा भी नहीं था
कि एक दिन उसका नाम माफ़िया की लिस्ट में आ जाएगा।
उसका कसूर सिर्फ़ इतना था
कि उसने एक ग़लत डील के काग़ज़ देख लिए थे।
और अब…
वो उसी गलती की सज़ा भुगतने वाली थी।
रात के करीब 11 बजे,
जब इरा घर लौट रही थी,
एक काली SUV उसके सामने आकर रुकी।
चार दरवाज़े खुले।
चार हथियारबंद आदमी।
इरा पीछे हट भी नहीं पाई कि
किसी ने उसके मुँह पर रुमाल रख दिया।
अगली चीज़ जो उसने महसूस की—
अँधेरा।
शैतान के सामने
जब इरा की आँख खुली,
तो सामने शीशे की दीवार थी—
जिसके उस पार पूरा शहर चमक रहा था।
और उसके सामने…
एक आदमी कुर्सी पर बैठा था।
सफेद शर्ट, स्लीव्स फोल्डेड,
कलाई पर महँगी घड़ी,
और आँखों में ऐसी ठंडक
जो इंसान को जड़ कर दे।
“नाम?”
उसकी आवाज़ गहरी थी।
“इ… इरा,”
वो काँपते हुए बोली।
“डरना बंद करो,”
रिहान उठा और उसके करीब आया।
“मैं तुम्हें मारने नहीं बुलाया।”
इरा की आँखों में आँसू आ गए।
“तो… फिर?”
रिहान ने सीधा जवाब दिया—
“शादी के लिए।”
इरा को लगा
ज़मीन उसके पैरों के नीचे से खिसक गई।
“ये मज़ाक है?”
उसने चीखते हुए कहा।
रिहान की आँखें सख़्त हो गईं।
“मेरी दुनिया में मज़ाक नहीं होते।”
सीक्रेट डील
रिहान ने टेबल पर फाइल फेंकी।
“तुमने जो देखा, वो मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ है।”
“मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी,”
इरा गिड़गिड़ाई।
“मुझे भरोसा नहीं,”
रिहान बोला।
“मुझे कंट्रोल चाहिए।”
“शादी…
नाम मेरे साथ जुड़ेगा,
और मेरे दुश्मन तुम्हें छू नहीं पाएँगे।”
इरा की आँखों में डर था,
लेकिन उससे ज़्यादा था—
ज़िंदा रहने की चाह।
“अगर मैंने मना किया?”
उसने धीमे से पूछा।
रिहान झुका,
उसके कान के पास फुसफुसाया—
“तो तुम अगली सुबह नहीं देखोगी।”
इरा टूट गई।
सीक्रेट शादी
कोई रिश्तेदार नहीं।
कोई शोर नहीं।
बस एक पुराना फार्महाउस,
एक डरा हुआ पंडित
और चार हथियारबंद गार्ड।
इरा के हाथ काँप रहे थे
जब रिहान ने उसकी माँग में सिंदूर भरा।
उस पल,
उसकी ज़िंदगी खत्म नहीं हुई…
बदल गई।
“आज से तुम मेरी बीवी हो,”
रिहान ने ठंडे लहजे में कहा।
“दुनिया के लिए… तुम मौजूद ही नहीं हो।”
इरा की आँख से आँसू गिरा।
भाग–1 (Part–B)
एक खतरनाक पति, एक कैद सी ज़िंदगी
रिहान का बंगला
किसी महल से कम नहीं था—
लेकिन इरा के लिए
वो एक सोने का पिंजरा था।
हर जगह कैमरे।
हर कोने में हथियार।
“बाहर जाना मना है,”
रिहान ने पहले ही दिन साफ़ कह दिया।
“और मेरे काम में सवाल भी।”
इरा चुप रही।
क्योंकि उसे पता था—
यहाँ चुप्पी ही सुरक्षा है।
पहली रात… बिना प्यार
कमरा महँगे फूलों से सजा था,
लेकिन हवा में ठंडक थी।
इरा पलंग के कोने पर बैठी थी
जब रिहान अंदर आया।
उसने कोट उतारा और कहा—
“घबराओ मत।
मैं तुम्हें तब तक नहीं छुऊँगा
जब तक तुम खुद न चाहो।”
इरा हैरान रह गई।
“पर ये मत भूलना,”
रिहान ने जोड़ा,
“तुम मेरी हो।
और मेरी चीज़ पर कोई नज़र भी नहीं डाल सकता।”
वो रात
बिना किसी स्पर्श के बीत गई,
लेकिन इरा की नींद
हमेशा के लिए उड़ चुकी थी।
धीरे-धीरे बदलता शैतान
दिन बीतने लगे
।
रिहान बाहर की दुनिया में
आज भी उतना ही खतरनाक था,
लेकिन इरा के सामने
वो थोड़ा… कम राक्षस लगने लगा।
एक दिन
उसने देखा
रिहान के हाथ में चोट लगी है।
“ये…”
इरा ने बिना सोचे
उसका हाथ थाम लिया।
रिहान चौंक गया।
किसी ने उसे
सालों से ऐसे नहीं छुआ था।
“डर नहीं लगता?”
उसने पूछा।
इरा ने सिर झुका लिया।
“बहुत लगता है…
लेकिन आपसे ज़्यादा
इस अकेलेपन से।”
उस पल
रिहान के दिल में
कुछ दरक गया।
ख़तरा क़रीब है
लेकिन माफ़िया की दुनिया
कभी किसी को चैन से जीने नहीं देती।
एक रात
बंगले पर हमला हुआ।
गोलियों की आवाज़।
चीखें।
खून।
रिहान ने इरा को ढाल बनाकर
बचाने की कोशिश की।
और तभी—
एक गोली उसके सीने में लगी।
वो इरा के सामने गिर पड़ा।
इरा चीख पड़ी—
“रिहान!!!”
रिहान ने उसका हाथ कसकर पकड़ा
और धीमे से कहा—
“अगर मुझे कुछ हो गया…
तो याद रखना…
तुम सिर्फ़ मेरी मजबूरी नहीं थीं…”
उसकी आँखें बंद होने लगी
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