कमरे में हल्की रोशनी थी। बाहर शाम ढल रही थी।
नियति काउच पर बैठी थी। रोने की वजह से उसकी आँखें लाल थीं और चेहरा थका हुआ लग रहा था। सामने रिहान बैठा था। दोनों के बीच चुप्पी पसरी हुई थी।
कुछ देर बाद रिहान ने पानी का ग्लास उसकी तरफ बढ़ाया।
“लो पानी पी लो।”
नियति ने कुछ पल ग्लास को देखा, फिर धीरे से उसे पकड़कर पानी पी लिया।
बिना उसकी तरफ देखे उसने कहा,
“आपको परेशान करने के लिए सॉरी।”
रिहान ने शांत स्वर में कहा,
“तुम सॉरी क्यों बोल रही हो? तुम्हें मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं है। तुमने कुछ भी नहीं किया है।”
नियति ने कुछ नहीं कहा।
थोड़ी देर बाद उसने पूछा,
“हम हॉस्पिटल कब जा रहे है?”
रिहान ने सीधा जवाब दिया,
“तुम्हें हॉस्पिटल जाने की जरूरत नहीं है। अब से तुम यहीं रहोगी।”
नियति ने तुरंत कहा,
“पर क्यों? मुझे आपके साथ नहीं रहना है।”
रिहान ने हल्की सख्ती के साथ कहा,
“क्यों नहीं रहना? मैं तुम्हें ऐसे ही अकेले नहीं छोड़ सकता, ये जानते हुए भी...
खैर, तुम कहीं नहीं जाओगी। तुम फ्रेश हो जाओ और डिनर के लिए आ जाना।”
वो बिना उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार किए कमरे से बाहर चला गया।
नियति कुछ पल तक दरवाज़े की तरफ देखती रही। उसकी आँखों में फिर से नमी आ गई।
डाइनिंग टेबल पर खाना लगा था। रिहान कुर्सी पर बैठा था, लेकिन उसकी नज़र बार-बार खाली कुर्सी पर जा रही थी।
उसने मेड से कहा,
“वो जो रूम में है, उन्हें बुलाकर ले आओ।”
मेड ने धीरे से जवाब दिया,
“सर, मैंने कहा था, पर उन्होंने आने से मना कर दिया... ये कहकर कि उन्हें भूख नहीं है।”
रिहान ने गहरी साँस ली और उठकर उसके कमरे की तरफ चला गया।
में हल्की हवा आ रही थी। बालकनी का दरवाज़ा खुला था।
नियति फर्श पर बैठी थी। उसे आते देख वो तुरंत खड़ी हो गई।
रिहान ने पूछा,
“तुम खाना खाने क्यों नहीं आई?”
“मुझे भूख नहीं है।”
उसने नज़रें चुराते हुए कहा।
कुछ क्षण बाद उसने सीधा पूछा,
“आप मुझे यहाँ से जाने क्यों नहीं देना चाहते? मेरा यहाँ रहना सही नहीं है। आप समझ क्यों नहीं रहे है?”
रिहान ने शांत लेकिन दृढ़ आवाज़ में कहा,
“तुम्हें क्या लगता है कि मैं तुम्हें इस हालत में जाने दूंगा? समझने की कोशिश करो, तुम्हारी हालत अभी सही नहीं है।”
नियति की आवाज़ अचानक तेज़ हो गई —
“और क्या? कि मैं अनाथ हूँ? मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है? है न, मैंने सही कहा न? इसलिए आप मुझ पर दया कर रहे हो।”
वो मुड़ गई।
रिहान ने उलझन में कहा,
“किट्टू, ये क्या कह रही हो?”
फिर बोला,
“और प्लीज मुझे ये आप-आप कहना बंद करो। क्या तुम भूल चुकी हो कि हम एक दूसरे को पसंद करते थे?”
उसने धीमे स्वर में जोड़ा,
“मुझे तुम्हें अपने पास रखने के लिए तुम पर दया करने की जरूरत नहीं है।”
नियति ने संयमित आवाज़ में कहा,
“मुझे ऐसा कुछ याद नहीं है। और रही बात पसंद करने की, तो तब हम छोटे थे। शायद वो सिर्फ आकर्षण होगा... और कुछ नहीं।”
रिहान की आवाज़ हल्की टूट गई,
“तुम झूठ बोल रही हो।”
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर उसने गंभीरता से कहा,
“ठीक है, पर मैं ये जानना चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ हुआ क्या था? अंकल-आंटी के साथ क्या हुआ था? तुम पिछले 10 सालों से कहाँ थी? और तुम यहाँ इटली कैसे आई? आई वांट टू नो एवरीथिंग, नियति।”
वो उसके सामने आकर खड़ा हो गया।