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"मां..... एक सागर है।" ना जाने कितना दर्द सा होगा माँ ने, जब मुझे इस दुनिया में लाया था, कहती है भूल गई थी सारा दर्द, जब तुझे गोद में उठाया था। कैसे वह बिना रुके, घर का सारा काम कर लेती है, उठ जाती है सबसे पहले, जबकि आखिर में वह सोती है। भूख भी नहीं लगती क्या उसे? सबको खिला कर फिर कहती है, कहती है तुमको प्यार से खाता देख, मेरी भूख मिट जाती है। वह मां है, बेटी भी,पत्नी भी, और बहू भी, इतना सिर्फ इतना सब ना जाने कैसे वह संभालती है, सबके मुंह से सिर्फ तुम्हारे नाम निकलता, जब घर में कोई चीज गुम हो जाती है। चोट तो मुझे लगती पर, रोना मां को आता है, सुकून की नींद मुझे आती है, भूल जाती हूं सारा दुख, जब वह मुझे प्यार से सहलाती है। हम कितने ही बड़े हो जाएंगे पर, मां का दुलार कभी कम ना होगा, कुछ गलतियां भी हमसे होंगी, जिनका हमें पता भी होगा, फिर भी ना कभी वह शिकायत करेगी, ना उसे कोई गम होगा। क्योंकि कहते हैं ना मां... वो सागर है, जिसकी गहराई नापना बहुत मुश्किल है, पर वादा है मेरा एक दिन तुम घर से कहोगी, मेरी बेटी भी काबिल है। - आँचल नलवाया #kavyotsav2 .0
"गुमराह" - रोजमर्रा की भागदौड़ के बाद आज कुछ पर ठहरने का मन किया, पहले मन में उठ रहे हैं हजारों सवालों को शांत किया, फिर उठाई यह कलम और डायरी, बड़े अरसे बाद आज कुछ लिखने का मन किया ! क्या मैं खुश हूं? मैंने अपने दिल से सवाल किया.. फिर दिल ने दिमाग से सलाह कर मुझे गुमराह किया, हैरानी मुझे इस बात की है, यह फैसला मैंने अपने लिए किया, या मेरे अपनों के लिए किया! क्या मैं आजाद हूं? फिर उठा दूसरा, सवाल सब कुछ तो अच्छा है जीवन में, फिर किस चीज का गम है और किस बात का मलाल, ये चार दीवारें यह गलियां मेरी ही तो है, फिर क्यों इस घुटन की वजह से हर रोज होता बवाल. पहले अपनों से दूर थे अब उनके पास रहते हैं, जिन पलों को छोड़ आए उनकी फरियाद करते हैं, दिन में हजार बार बीती बातों का जिक्र करते हैं, उस खुले आसमान में अपने आज आंखों को याद करते हैं! क्या कमी थी उस समय और क्या अब है? खुद से पूछो- घर, काम, पैसा क्या जिंदगी में अब यही सब है? मत हो गुमराह मेरे साथी, नहीं तो जिंदगी इसी सोच में खत्म हो जाएगी, कि हंसना कब है और रोना कब है, जीना कब है, और मरना कब है! #kavyotsav2 .0 -आँचल नलवाया
"छोटू की पुकार" अरे छोटू चाय ला, चल छोटू बैग उठा.. ठीक से साफ कर छोटू, चल सामान खाली कर... कौन है यह छोटू? हां कौन है यह छोटू? कभी चाय की टपरी पर, तो कभी खाने की होटल में, लंबी चौड़ी दुकानों पर, तो कभी आलीशान मकानों में, गंदे फटे कपड़े पहने, वह छोटू काम करता है। वह नन्हे-नन्हे हाथों वाला, चेहरे पर मुस्कान लिए, कभी गर्म चाय के साथ, तो कभी हाथ में झाड़ू लिए, उस पर कोई गुस्से में चिल्लाए , तो कभी कोई प्यार से बतियाए। अपने मालिक की डांट से सहमें... सब के काम वो आता है। कैसे वह इतना बोझ सर कंधे पर उठाता है। दिन रात वो काम करें पर थोड़ा सा ही कमाता है। मन करता है उसका भी, मैं मखमली गद्दो पर बैठू, पर मै तो नौकर हू ना.... किसी कोने में बैठ वह, अपना मन बहलाता है। आंखें उसकी बड़े सपने है देखती, बस जरूरत है एक सहारे की, वह काबिल है और मजबूत भी, इस छोटी नाव को तलाश है.. अपने एक किनारे की। अब किसी बच्चे को कभी,तुम वो छोटू ना बनाना, ये नन्हें हाथ अगर मदद मांगे, तूम अपने कदम जरूर बढाना। - आँचल नलवाया #kavyotsav2 .0
🇮🇳यह लड़ता हिंदुस्तान है!!🇮🇳 (कोरोना) आज इस कलम को उठाते हुए रूह काँप रही थी! मान को झंझोरने वाली इन हालातों को डायरी में लिखने का मन किया! साथियों गौर से सुनिए गा- यह सड़के यह चोराहे हर गली गली सुनसान है; आज हवा में उड़ रहे पंछी और पिंजरे में बंद इंसान है! मत घबराओ मेरे साथियों; यह उगता हिंदुस्तान है यह बढ़ता हिंदुस्तान है यह लड़ता हिंदुस्तान है! आज ना मंदिर में ना मस्जिद में ना गुरुद्वारे में भगवान है; श्वेत लिबास में दर्द मिटा रहा वह मेरा भगवान है देखो तुम्हारे लिए युद्ध लड़ रहे हमारे वीर जवान हैं; अपनी भूख प्यास को छोड़ ऐसे भारत के वीर महान हैं! यह कैसी महामारी विचित्र बीमारी काली घटा बनकर छाई है; दर्द में तड़प कर मर जाए मनुष्य ऐसी पीड़ा लाई है! क्या अमेरिका क्या इटली पूरे विश्व पर शामत आई है; सब मिलकर लड़ो साथियों यह नर्क की परछाई है! आज हमारी जन्मभूमि पर ना कमल ना हाथ है; बन गया यह देश कुटुंबकम हर बच्चा बच्चा साथ है! हम सिर्फ एक नहीं हर दिन थाली शंख बजाएंगे.. इस दुख की घड़ी को भूल खुशियों के गीत गाएंगे.... जल्द खत्म हो जाएगा यह दिन मिलकर जश्न मनाएंगे उठो साथियों हम योद्धा बनकर इस मिट्टी को बचाएंगे! हाथ जोड़कर विनती है लक्ष्मण रेखा पार ना करना वक्त लगेगा थोड़ा तब तक अपने घर में रहना; घर के अच्छे मुखिया बनना नहीं तो पड़ेगा सबको सहना! सब लड़ेंगे तुम मत डरना जड़ से मिट जाएगी यह बीमारी विचित्र करोना! क्योंकि मुझे इस देश पर अभिमान है मत डरो साथियों.... यह उठता हिंदुस्तान है! यह बढ़ता हिंदुस्तान है! ये लड़ता हिंदुस्तान है! #kavyotsav2 .0 - आँचल नलवाया
https://youtu.be/uB_CuANKTkw
https://youtu.be/b-WuI58TjRo
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