"छोटू की पुकार"
अरे छोटू चाय ला, चल छोटू बैग उठा..
ठीक से साफ कर छोटू, चल सामान खाली कर...
कौन है यह छोटू?
हां कौन है यह छोटू?
कभी चाय की टपरी पर, तो कभी खाने की होटल में,
लंबी चौड़ी दुकानों पर, तो कभी आलीशान मकानों में,
गंदे फटे कपड़े पहने, वह छोटू काम करता है।
वह नन्हे-नन्हे हाथों वाला, चेहरे पर मुस्कान लिए,
कभी गर्म चाय के साथ, तो कभी हाथ में झाड़ू लिए,
उस पर कोई गुस्से में चिल्लाए , तो कभी कोई प्यार से बतियाए।
अपने मालिक की डांट से सहमें...
सब के काम वो आता है।
कैसे वह इतना बोझ सर कंधे पर उठाता है।
दिन रात वो काम करें पर थोड़ा सा ही कमाता है।
मन करता है उसका भी,
मैं मखमली गद्दो पर बैठू,
पर मै तो नौकर हू ना....
किसी कोने में बैठ वह, अपना मन बहलाता है।
आंखें उसकी बड़े सपने है देखती,
बस जरूरत है एक सहारे की,
वह काबिल है और मजबूत भी,
इस छोटी नाव को तलाश है..
अपने एक किनारे की।
अब किसी बच्चे को कभी,तुम वो छोटू ना बनाना,
ये नन्हें हाथ अगर मदद मांगे, तूम अपने कदम जरूर बढाना।
- आँचल नलवाया
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