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antima

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@antima4823
(433)

भरी महफिल में लोग बड़ी आसानी से बोल देते है
" क्या हुआ तुम्हारे रिजल्ट का हुआ की नहीं फलाने की लड़की, फलाने के लड़के का तो सलेक्शन हो गया"
कभी सोचा है आजकल के बच्चे फैमिली प्रोग्राम में जाना क्यों पसंद नहीं करते....
उन्हें डर लगता है तुम्हारे इन सवालों का
भरी महफिल में उसके जीवन की बोली लगा दी जाती है
जिसका सेक्शन हो गया उसे समाज की नजरों में महान बना दिया जाता है
और जिसके संघर्ष के दिन चल रहे है उसके चरित्र पर अनगिनत दाग लगा दिया जाता है
फोटो फ्रेम के साथ कैरेक्टर लेस का सर्टिफिकेट पकड़ा दिया जाता है
क्या कभी किसी विद्यार्थी से पूछा है
बेटा इस सफर में थक कितने गए हो तुमने कितना संघर्ष किया है बस मेहनत करो एक दिन जरूर सफल होंगे
क्यों नहीं पूछते तुम ऐसा
यकीन मानो जिस दिन तुमने किसी भी विद्यार्थी से उसकी पीड़ा जानने की कोशिश की....
मै दावे के साथ कह सकती हु
उसके संघर्ष की कहानी आंसुओं के रूप में निकलेगी
तुम्हारे इस प्रश्न से कितने विद्यार्थी समाज के सामने जाने से भी डरते है।।




✍️ अंतिमा 😊

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मोहब्बत परवान चढ़ती है तब भोली भाली लड़की से क्या क्या नहीं करवा देती।

जब दिल को कोई भा जाता है
बिन वजह चेहरे पर मुस्कान ला देती है
सुहागिन रहना सीखा देती है
चेहरे का नूर बढ़ जाता है
झूठ बोलना सीखा देती है
जो नहीं करना था ..........
वो भी करना सीखा देती है
बार बार आईना देखना, थोड़ा शर्माना, खुशियां हजार हो जाती है
दिल के आँगन में तरह तरह के फूल खिला देती है
धडकनों में युद्ध छिड़ जाता है
ख्वाबों की एक नई दुनिया सज जाती है
फोन की घंटी से सांसे अटक जाती है
बस एक मैसेज से जिन्दा लाश में जान आ जाती है
दिल के मौसम में बसंत ऋतु ला देती है
मोहब्ब्त इतनी नादान बना देती है
घरवालों को दुश्मन, पराए को अपना बना देती है।



✍️ अंतिमा 😊

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लोग कहते है सच हमेशा कड़वा होता है
मेरा मानना है सच को कहने का तरीका कड़वा बना देता है
सब कहने के तरीके पर निर्भर करता है
तानों के रूप में की गई तारीफे भी चाशनी लगती है
- antima

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कैसा होगा वो दिन.........
जब में किसी PDF में अपना नाम देखूंगी
मेरे नाम के पीछे पापा का नाम जुड़ा होगा
आंखों में जीत के आंसू , होंठो पर हँसी होगी
या मुंह खोले, आंखे फाड़ कर परिणाम देखती रहूंगी।
कैसा होगा वो दिन........
क्या में अपने भाव छुपा पाऊंगी घर में बता पाऊंगी
या सीधा मिठाई लाकर घरवालों को अचंभित कर दूंगी ।
कैसा होगा वो दिन.......
थोड़ी देर के लिए घर का वातावरण कॉल सेंटर बन जायेगा
बधाईयों की बारिश, तानों के ओले गिरेंगे
या मैं धन्यवाद कहते कहते सांस लेना भूल जाऊंगी।
कैसा होगा वो दिन........
हमें तो पहले ही पता था ये पक्का सलेक्शन लेकर रहेगी
या अरे इसकी तो किस्मत ही बहुत अच्छी है सारा श्रेय मेरी किस्मत को दे दिया जायेगा ।
कैसा होगा वो दिन.......
मां के आंखों से खुशी के आंसू, गर्व से पापा खुशी से फूले नहीं समाएंगे
उस दिन मेरा हाल कुछ ऐसा होगा शब्दों में अपनी खुशी बयान नहीं कर पाऊंगी
क्या मैं अपने सारे संघर्षों पर पूर्ण विराम लगा पाऊंगी।
कैसा होगा वो दिन।



✍️ अंतिमा 😊

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कौन होते है वो लोग जो पढ़ाई ओर जिंदगी के सारे मजे ले लेते है।


मैं परीक्षाओं के समय बिन ब्याही विधवा बन जाती हूं....
घर का माहौल बदल रहा है, मातम सा छा रहा है।
परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आ रही है
मेरे सारे श्रृंगार मुझ से छीने जा रहे है
घर के प्रत्येक व्यक्ति को चुप रहने की हिदायत दी जा रही है
" बच्चों आवाज मत करो दीदी पढ़ रही है" यह कह कर गली मोहले में सन्नाटा किया जा रहा है
खाना पानी कमरे में ही पहुंचाया जा रहा है
मुझे पूरा महसूस करवाया जा रहा है में बिन ब्याही विधवा बन गई हू
मां की आंखों में परीक्षा की चिंता पापा के मन में परिणाम का डर खाए जा रहा है
मैने अपनाया खाली कमरा जहां से किसी सुहागिन पर मेरी परछाई भी ना पड़े।
मैं ढूंढती हु किताबों में अपना भविष्य मुझे फिर से सुहागिन होने का मौका मिले।।



✍️ अंतिमा 😊

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मैं पहली बार कह सकती हूं इनका काल्पनिक घटनाओं से कोई लेना देना नहीं है......

खोल क्यों नहीं देते न्याय देवी के आंखों से पटी
बचपन से सुना था वर्दी धारी करते अपनी हिफाजत
थाने की चौखट पर बिकता सच
ईमान बेच कर लोग करते मर्यादा की बाते
मैने देखा ऐसा सच जहां महिला पुलिस कर्मी कह रही "बुलाओ उस रं**डी को"
एक मिनट किसने कानून के रखवालों को रं**डी कहने का हक है दिया
उसी क्षण मेरे मन में आया क्या इन मैडम को पता है जिसको अपमानजनक शब्द से बुला रही है उसने सच में जुर्म किया है या नहीं अगर किया भी है तो उसके लिए न्यायलय बैठा है
हा मैं यहां भूल गई न्याय देवी के आंखों में पटी जो बंधी है....
मैने देखा ऐसा सच न्याय के द्वार पर खड़े होकर हाथ फैलाए हुए कह रहा एक नौजवान " मैने शादी करके गुनाह थोड़े कर दिया"
एक मिनट उसका गुनाह देखेगा कौन...
मैं फिर से भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।
मैने देखा ऐसा सच जहां जन्म मरण है चलता
भगवान का दूसरा रूप कहने वाले ने कि ऐसी बात " पहले पैसे जमा करवाओ फिर ही इलाज होगा"
एक मिनट रुको डॉक्टर साहब आप जिस अस्पताल में खड़े हो वहां की सरकार ने निःशुल्क इलाज है किया
मैं फिर भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।।


✍️ अंतिमा 😊

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लड़कियों का सशक्त होना कितना जरूरी है......
यह उन लड़कियों से पूछिए जिनके घर में मर्द ना हो।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ......
मैं खुशनसीब हूं मेरे पापा ने मेरे हाथों से झाड़ू, बेलन को कलम में स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ......
मैं खुशनसीब हूं पापा में नहीं सीख पाऊंगी अरे कैसे नहीं सीखेगी लड़किया हवाईजहाज उड़ा लेती है यह कह कर पीछे की सीट से आगे स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ.....
लोग कहते थे बेटी है घर संभालेगी पापा ने कहा बेटी दुनिया संभलेगी पापा ने घर को दुनिया में स्थानांतरित कर दिया।
हा में बहुत खुशनसीब हूँ......
मेरी पहचान पापा से अपनी पहचान को पापा ने मेरी पहचान में स्थानांतरित कर दिया।
हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ ।।

✍️ अंतिमा 😊

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महाभारत महाभारत महाभारत.......
अब होगा मेरे घर में महाभारत का युद्ध शुरू
आ गया गर्मी का मौसम लोगो के बीच होने लगी तमतम
घर का आँगन बना कुरुक्षेत्र का मैदान
AC, TV रिमोड, पानी की बोतले बने है मेरे अस्त्र शस्त्र
"लाइट कहा मर गई" से होता युद्ध का प्रारम्भ
रणघोष सुनते ही योद्धा कूदे रणभूमि में
कोई अर्जुन सा तीर कमान लिए अपने कार्यों को अंजाम दिया
कोई बना कृष्ण सा सारथी जिसने वायु शीतलक यंत्र में शीतल जल की आवश्यकता है पार्थ का उपदेश है दिया
कोई बना कर्ण सा ज़िदी जिसने कार्य ना करने की सौगंध है खाई..
तो कोई बना भीष्म सा शांत जिसने बाणों की शय्या पर भी प्रतिज्ञा निभाई।
शाम हुई युद्ध भी थमा आमरस संग रोटी से पेट भरा
आज का महाभारत का युद्ध यही समाप्त हुआ
कल फिर योद्धा रणभूमि में आएंगे
अपने साहस मनोबल का परिचय देते हुए दुश्मन सेना को धूल चटाएंगे......

✍️ अंतिमा 😊

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जी हां मैं हूं कलयुग की नारी......
स्कूटी चलाने पर पापा की परी बन जाती हूं
मेकअप करने पर हीरोइन बन जाती हूं
अपनी राय देने पर ज्ञान की देवी बन जाती हूं
सिंपल रहने पर बहनजी बन जाती हूं
चुप रहने पर गूंगी बन जाती हूं
बात करने पर चालक बन जाती हूं
बाएं ओर का इंडीकेटर देकर दाएं की मूड जाने पर ahh वूमेन बन जाती हूं
अपनी मनपसंद जिंदगी जीने पर बतमीज बन जाती हूं
चमड़ी काली होने पर काली माता बन जाती हूं
हा में कलयुग की नारी सब पर भारी बन जाती हूं।।

✍️ अंतिमा 😊

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अब पहले जैसी बात कहां.......
बचपन वाला इतवार कहां
सावन की बरसात कहां
कागज वाली नाव कहां
अब पहले जैसी बात कहां......

मिठाइयों में मिठास कहां
दिवाली के पटाखों में तेज आवाज कहां
होली के रंगों की छाप कहां
अब पहले जैसी बात कहां.....

टीचर की वो फटकार कहां
दादा की वो डांट कहां
बस्ते का अब बोझ कहां
गर्मी की वो रात कहां
अब पहले जैसी बात कहां....

मॉडल खिलौनों में मिट्ठी वाली बात कहां
पतंग ना पकड़ने का पछतावा कहां
बिन आंसू रोने का बहाना कहां
होठों पर बचपन वाली मुस्कान कहां
अब पहले जैसी बात कहां.......

पापा की नजरों में वो डर कहां
मां के आंचल में सुकून कहां
बचपन वाली बात कहां
अब पहले जैसी बात कहां।।

✍️ अंतिमा 😊

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