मैं भी गलत आदतों की शिकार हुईं हूं
मैने भी जुआ खेला है अपनी जिंदगी का
सरकारी मैडम बनने के लिए अपनी जिंदगी दाँव पर लगा दी।
युधिष्ठिर के समान एक के बाद एक बाजी हारती गई
पहला दाँव मेरे बचपने पर लगा परिपक्वता इतना जल्दी आई कि मैं ये दाँव हार गई।
दाँव मेरे चरित्र पर लगा असफलता ने उसको ओर उजागर कर दिया ये दाँव भी में हार गई।
दाँव मेरी खुशियों पर लगा ओर मुझे इस बाजी पर भी हार का सामना करना पड़ा।
दाँव मेरी जवानी पर लगा किताबों में भटके हुए वो भी निकल गई और में हार गई।
अन्ततः दाँव मेरे सम्पूर्ण अस्तित्व पर लगाया गया
जब विपक्ष में अपने ही खेल रहे हो तो ये बाजी भी मैं कैसे जीत सकती हूं।
अब बस भरी सभा में मेरी अपमानित होने की बारी आ गई।
मुझे पूरा विश्वास है मेरी लाज बचाने कृष्ण जरूर जायेंगे।।
✍️ अंतिमा 😊