Quotes by Jigar Ashok Pandya in Bitesapp read free

Jigar Ashok Pandya

Jigar Ashok Pandya

@pandyajigar


એક નાનકડું છમકલું:

શીર્ષક:- વ્યથા એક તૂટેલા હૃદયની

કંઈક થવાનું હતું ને, કંઈક થઈ ગયું,
એક જ ક્ષણમાં હૃદય ભસ્મીભૂત બની ગયું.

પ્રેમનો સ્વાદ ચાખવા, જે સપનાઓમાં ખોવાતું ગયું,
આંખ બંધ કરી જ્યારે, ત્યારે દીવાસ્વપ્ન ઓલવાઈ ગયું.

એક તારા નામનું ટીપું આંખમાં વસી ગયું,
હૃદયમાં ફાટ પડી જ્યારે,
તો એ પણ ‘માં સીતા’ બની ધરતી મા
વિલિન થઈ ગયું.

પ્રેમના અથાગ સાગરમાં લોકોને ડૂબતા જોવાઈ ગયું,
અમે રહી ગયા તરતા, કારણ કે મન ખારાશથી ભરાઈ ગયું.

શી હતી ભૂલ અમારી, કે અમારું જ દર્પણ ખોવાઈ ગયું,
એક નુ એક હતું આ હૃદય, હવે કેટલાય ભાગમાં વહેંચાઈ ગયું.

— જિગર અશોક પંડ્યા

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💌दिल का Notification #12 –

शीर्षक : पापा की चप्पल

एक दिन
गलती से पापा की चप्पल पहन ली।
दो कदम चला ही था कि...
समझ आ गया,
वो चप्पल मेरे नाप की नहीं थी।

उसमें सिर्फ़ पैर नहीं समाते थे...
ज़िम्मेदारियाँ भी समाई हुई थीं।
हर घिसा हुआ कोना...
घर के लिए किया गया एक समझौता था।


तब एहसास हुआ...

बचपन में लगता था,
पापा की चप्पल बस पुरानी हो गई है।
आज समझ आया...
घिसी सिर्फ़ चप्पल नहीं थी,
पापा की उम्र थी।

❤️ धड़कते रहिए...
जिगर अशोक पंड्या

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💌Dil ka notification#11 –

शीर्षक : वो घर 🏡

आज कई सालों बाद...
उस घर का दरवाज़ा खोला,
जहाँ कभी मेरा बचपन रहा करता था।
सब कुछ वहीं रखा था...
बस, लौटने वाला इंसान बदल चुका था।

आँगन आज भी वैसा ही था,
दीवारों पर टंगी तस्वीरों पर बस धूल की परत चढ़ गई थी।
मगर बचपन की वो आवाज़ें...
आज भी हर कमरे में गूंज रही थीं।

रसोई से आती माँ की पुकार,
पापा की भारी आवाज़ में डाँट,
भाई-बहनों की वो नोकझोंक...
जैसे समय ने सब कुछ एक पुराने संदूक में सहेज रखा हो।

तब समझ आया...

घर ईंटों और दीवारों से नहीं बनता,
घर तो अपनों की साँसों से बसता है।
जब अपने ही दूर हो जाएँ...
मकान तो रह जाता है,
पर घर... कहीं खो जाता है।

❤️ धड़कते रहिए..
जिगर अशोक पंड्या.

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એક નાનકડું છમકલું...
શીર્ષક: પરબિડીયું

એક પરબીડિયું છે....
કોઈક ના પ્રેમ ને મથતો પત્ર છુપાવતું,
કહો તો તમારા સરનામે મોકલાવું..💌

જિગર અશોક પંડ્યા

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💌दिल का Notification #10
शीर्षक: ए अजनबी

शायद...

सफ़र में कहीं कोई ऐसा मिल जाता है...

कि निगाहें उसी पर ठहर जाती हैं...

और ज़माना...

बस यूँ ही चलता रहता है।

कुछ अदाएँ हैं...

कुछ नज़ाकत है...

न जाने तेरे चेहरे पर कौन-सी बात है।

जाने-पहचाने तो कई लोग हैं
आस-पास मेरे...

पर...

**ऐ अजनबी...**

तुमसे बार-बार मिलने की...

ये कैसी जुस्तजू है।



धड़कते रहिए... ❤️
जिगर अशोक पंड्या

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એક નાનકડું છમકલું...
શીર્ષક: સાંજ

તમને કહું છું કે પેલા ખિસ્સામાંથી એક સાંજ મઝા ની કાઢો,
મનગમતી વ્યક્તિ ની સાથે મઝા ની ક્ષણ તો માંણો
પછી પેલા ખીસ્સા ની પાછળ આવેલું હ્દય છે ને એ ભરી આવશે.

✍🏼 જિગર અશોક પંડ્યા

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💌 दिल का notification #09

शीर्षक=चाय

तुझसे इस कदर प्यारी सी यारी है,
तू हे तो महफिल जमती सारी है,
तेरी चार पांच चुस्कियां कीतनी भारी है,
होती अपनों से मन की बातें सारी है।

धड़क ते रहिए ❣️
जिगर अशोक पंड्या

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💌 दिल का notification: #08

शीर्षक: सपने vs दुनियां

वो सपने, जो कभी-कभी अपनों से भी ज़्यादा अपने लगते हैं।

फिर आती है हक़ीक़त... बनकर ज़िंदगी।

और सामने रख देती है रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियाँ, पैसों की दिक्कत और घर के खर्चे।

तेरे सपनों के खिलाफ होंगे कुछ गैर... और कुछ अपने भी।

पर अपने सपनों से मत पलट। रख बस थोड़ा-सा ही उससे फ़ासला...

माँग कर ज़िम्मेदारियों से थोड़ा-सा उधार, दे अपने सपनों को नई उड़ान।

क्योंकि...

सपनों को हक़ीक़त में बदलने का नाम ही... ज़िंदगी है। ❤️



धड़क ते रहिए ❣️
✍🏼 जिगर अशोक पंड्या

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એક નાનકડું છમકલું...

શીર્ષક: માં

માંના હાથની હૂંફમાં આખી દુનિયા સમાઈ જાય છે,
એની એક હાસ્યમાં થાકેલી સાંજ પણ ખીલી જાય છે,
ઉંમર ભલે જીવનની કેટલીય મંજિલો વટાવી જાય,
પણ માં પાસે પહોંચતાં જ વ્યક્તિ ફરી બાળક બની જાય છે. ❤️

✍🏼 જિગર અશોક પંડ્યા

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💌 दिल का Notification #07
शीर्षक : काँटे

कुछ यादें ऐसी होती हैं...

जो जाती नहीं...

बस घड़ी की हर टिक-टिक के साथ...

थोड़ा और चुभ जाती हैं।

तभी समझ आया...

सिर्फ़ गुलाब ही नहीं, जिसके काँटे चुभते हैं...

वक़्त दिखाने वाली सुइयों को भी...

काँटे ही कहा जाता है। 🌹⏰


धड़क ते रहिए ❣️
जिगर अशोक पंड्या

{💌अगला नोटिफिकेशन
सपने vs दुनियां }

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