Hindi Quote in Thought by Jigar Ashok Pandya

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दिल का Notification #14 –

शीर्षक :- आख़िरी बेंच**

शायद...

कुछ धूल जम गई है...
इन आख़िरी बेंचों पर...

जहाँ कभी...
किसी नुकीली चीज़ से
अपने नाम का पहला अक्षर
लिख दिया करते थे...

ये... मेरी बेंच है।

यहीं...
दोस्तों के साथ की गई शरारतों पर
टीचर की डाँट भी मिलती थी...

और जब सज़ा मिलती थी...

**"अंगूठे पकड़ो..."**

या...

**"मुर्गा बनो..."**

तो पूरी क्लास खिलखिलाकर हँस दिया करती थी...

ज़िंदगी की पहली दोस्ती भी...
यहीं से शुरू हुई...

और...
टिफ़िन बाँटकर खाने का
असली मज़ा भी
यहीं से शुरू हुआ...

हमारे स्कूल की
सबसे ख़ूबसूरत यादें...

शायद...

इन्हीं बेंचों के
ड्रॉअर में
छूट गई हैं...

**आज...**

बेंच तो अब भी
वहीं है...

**बस...**

मेरा कद
तीन फ़ुट से
छह फ़ुट हो गया है...

स्कूल भी आज वही है...

**बस...**

**बचपन हमेशा के लिए छुट्टी पर चला गया।**

धड़क ते रहिए ❣️
जिगर अशोक पंड्या

Hindi Thought by Jigar Ashok Pandya : 112038622
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