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Vikash Kumar

Vikash Kumar

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जीना कितना आसान है

घोड़े बैल कुल्हण अब नुमाइश का सामान है
इस रंग बदलती दुनिया में जीना कितना आसान है
भूसा वाला बखारी देखो सजावट का सामान है
इस रंग बदलती दुनिया में जीना कितना आसान है

सौवे निनाबे पढ़ायेंगा कौन इस हैन्ड्रेड वाली दुनिया में
कैप पहना के भेजा था टोपी पहना के भेजा है
कुछ मिट गया कुछ मिट जाएगा जरूरत का सिद्धांत है
इस रंग बदलती……

जेब काटने वाले पूछें जेब में कुछ है कि नहीं
ऐसे बदल रहीं है दुनिया शर्मों-हया है कि नहीं
कुछ लुट गया कुछ लुट जाएगा हाथ लगाने का विज्ञान है
इस रंग बदलती……….


चार दिन का बखेड़ा है फुटपाथ को जिलाना है
अगले चार दिनों में ही तय इसका मर जाना है
कुछ खप गया कुछ खप जाएगा अतिक्रमण का सिद्धांत है
इस रंग बदलती दुनिया में…….


- Vikash Kumar

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मच्छर मक्खी प्यारे

इस दूनिया में जितने है मच्छर मक्खी प्यारे
उससे ज्यादा देखो उसको भगाने वाले आये
कोई टाई लटकाए कोई बिना लटकाए
चूहे,छिपकली की भी देखो शामत आए
इस दुनिया में …..

एक ना भागे मच्छर ना एक ना भागे मक्खी
चूहे छिपकली की भी बढ़ती जाए सक्खी
कंधे पे बैग लटकाये पब्लिक को चूना लगाये
देखो गली में आए गले में टाई लटकाये
इस दुनिया में…..

कोई धूंआ से भगाये कोई लिक्विड से भगाये
कोई जाल में फंसाए जंजाल में कोई फसाये
कोई फसाए प्यार से कोई बहलाए-फुसलाए
टाई-बैग के बीचों-बीच देखो पीसता यौवन जाए
इस दुनिया में……


- Vikash Kumar

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टूटा बोतल

कौन पढ़ेगा किताबे इस भाग दौड़ की दुनिया में
टूटा बोतल देकर देखो है भेजे स्कूल में

खाके चाहे पी के ना आओ भिड़ जाओ स्कूल में
टूटा बचपन छूटा जवानी आपाधापी स्कूल में
कहां कहां से घुमा के मंजिल फिर लायी स्कूल में
छूट गया सो पाठ पढ़ाया घुमा-घुमा स्कूल में
टूटा बोतल…

अब ना ढूंढूंगा दुनिया को दुनिया को मुझे ढूंढने दो
सीकर कपड़ा करु गुजारा राम नाम में डूबने दो
जिसको ढूंढ़ा गली-गली वो अपने ही पास मिली
हेरत हेरत हे सखी पांव पंक में धंसी मिली
टूटा बोतल….

इतना पड़ों ना चक्कर में इस दुनिया के प्यारे
मधुशाला तक को ना पूछा जे प्याला ले के भागे
हर कली के भाग में है फूल ही हो जाना
महका के इस बगिया को चिर निद्रा सो जाना
टूटा बोतल….

चिट्ठा चढ़ा के भुट्टा खिलाना यहां आता सबको खूब है
ऐसे धीरे से खिसकना देखो कितना खूब है
गिट्टी से ना निकला पर पत्थर से हां निकलेगा
ठोक पीट कर गया तराशा मूरत बनके निकलेगा
टूटा बोतल…..

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हमको किसी से तो पटम्मर नहीं चाहिए
खुद की भुजाओं पर भरोसा रहना चाहिए

हमपे तो बस अपनी इतनी कृपा रखना
बल बुद्धि विवेक हमारे सलामत रहना चाहिए

कभी भी किसी के आगे मिन्नते करने की
जीवन में कभी भी ऐसी न नौबत आना चाहिए

सारे के सारे नियम कायदे और कानून
सब जनता पर ही केवल लागू रहना चाहिए

-Vikash Kumar

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आज ही तो हम मिले थे
मिलते ही एक दूजे के हो गये थे
आज ही तो हमने ताउम्र साथ-साथ
लड़ने-झगड़ने की कसमें खायी थी
कभी न बिछड़ने की कसमें खायी थी
कभी तो किसी बात पर कभी बिना किसी बात पर
रूठने मनाने की कसमें खायी थी
मुंह फूलाने की कसमें खायी थी

सुबह सुबह मेरा दफ्तर के लिए चिल्लाना
तुम्हारा पांच मिनट और समय बढा़ना
कि थोड़ी देर और रुक जाओ
चार रोटी और सेंक देती हूं
टिफिन पैक कर देती हूं
थोड़ा रुक जाना लेकर जाना
और मेरा मुंह फुलाकर चले जाना

मेरा रोज रोज जिद करना
तुम्हारा गाल इधर से उधर घुमाना
कि होंठो पर तो नहीं मिलेगी
मेरी लिपस्टिक खराब हो जाती है

वक्त भी कितना तेजी से गुजरता है
जैसे कल ही तो आयी थी तुम
ऐसा आज भी लगता है

-Vikash Kumar

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आंख से काजल चुराना मुंह से निवाला छीन लेना

हुनर है क्या कोई विशेष जग में बढ़ रही है मांग इन दिनों


सीखिए चमचागिरी और तेल लगाना

आजकल फैशन में है इसका चलन बढ़ रही है मांग इन दिनों


बिल्कुल नयी नयी बहाली आई है आजकल मार्केट में

आवश्यकता है पेपर लीक कराना बढ़ रही है मांग इन दिनों

हो रही अच्छे दिनों की शुरुआत है बेरोजगारी में भी स्कोप है अच्छा

आसमां छू रही है दिन प्रतिदिन बढ़ रही है मांग इन दिनों

-Vikash Kumar

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सारे जहां से अच्छा लगता और तुम्हारा अच्छा कहना

सबसे अच्छे तुम लगते थे और तुम्हारा अच्छा कहना


कट जाते थे हंसते गाते

निश दिन करते बाते

रात से कैसे भोर हुई

जाने कैसे कट गयी राते

प्रीत अमर जो था करना मिल कर था हमें बिछड़ना


कभी इस्माइली कभी इमोजी

हम दोनों होके मनमौजी

और भी कितना अच्छा लगता

अच्छा अच्छा अच्छा कहना

अश्कों का है अब बहाना दिन भर तेरे याद में गाना


बात बात पर जब तुम

अच्छा अच्छा कहते थे

रट रट के हम भी अच्छा

अच्छा अच्छा कहते थे

और भी कितना अच्छा लगता तुमसे ही बातें करना


पास न हो पर दूर नहीं

मन में मेरे ही रहते हो

मन से दूर कहां जाओगे

कहां नहीं हम रहते हैं

बस अच्छा अच्छा लगता है तुझमें ही डूबे रहना


सालती है आज भी

और तुम्हारा दोषी बनना

खुद पे कितना इतराऊ मैं

निर्दोषी तो तुम भी न थे

फिर भी कितना अच्छा लगता गीतों में तुझे पिरोना


अरुणोदय सी उदित हुयी

सूर्यास्त सी अस्त

गीत प्रीत के रीत के

रच बस गये मेरे संग

मस्तानों सा मस्ताना बनना दीवानों सा दीवाना

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दिल में तेरे प्यार की दुनिया दफन है
सो रहा किसी कोने ओढ़े कफन है
मेरे गीत उनको जिलाने का जतन है

दिल में तेरे प्यार की दुनिया दफन है

जुड़ना नहीं उसे घट जाना हीं था
घट को तो घट घट जाना हीं था
चरमरायेंगे कल चीखेगे भी
टूटने का आज तो प्रश्न हीं नहीं है
देखे कभी थे जो हाथों में हाथ हो
तो कड़ी धूप में भी सुनहरी बरसात हो
नींद से जगे तो फिर झूठे सपन है

-Vikash 'Bihari'

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दो रंग से ही वह रूठा था
क्या प्यार हमारा झूठा था

दो लफ्ज़ ही कहने में यह कितना डरता है
पानी से भी यह तो कितना डरता है
एक बूंद गिरे तन पे फिर बौछार भी सहता है
ताल में तो कई फूल खिले इक फूल ही टूटा था
क्या प्यार हमारा….

दुनिया में दो ही रंग बना राजा से वह रंक बना
जग के प्रश्नों से छला गया सत्य वचन का ढंग बना
दो रंग से ही मुझको को कोपभवन जा लूटा था
क्या प्यार हमारा

-Vikash 'Bihari'

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आज राम आए है

आज राम आए है

हमारे राम आए है

चारों धाम आए है

राजा राम आए है


अवध पुरी को आज सजा दो दीपों की मालाओ से

धरा से नभ तक गर्जन हो धनु की टंकारों से

तम न रहेगा जग में कहीं कहो दीप मालाओ से

तम मिटा आए है राजा राम आये है

आज राम आये है चारों धाम आए है


प्रीत अगर हो सच्ची तो रब भी मिलने आते है

मनुज हो या दनुज कोई दस शीष दे जाते है

पाप का घट भर जाए तो दस शीष कट जाते है

तारण हार आए है राजा राम आए है

आज राम आए है चारों धाम आए है


दीपो का दीपोत्सव ये हमें यहीं सिखाता है

सागर तक का भी दर्प तो चूर चूर हो जाता है

पत्थर तक तर जाते है राम सेतु बन जाता है

लेते नाम आए है सियाराम आए हैंं

आज राम आए है चारों धाम आए है

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