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कविता : राकेश सोहम्

भरोसा
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कलम का
कविता पर
और
कविता का
भरोसे पर अटक जाना,
समय की
विडंबना है !

कलम
कातिल है
और
कसाई भी ?

अब कलम की
ताकत
संदेहास्पद 
हो गई है !

# राकेश सोहम्

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