Free Hindi Blog Quotes by Priyan Sri | 111717677

घड़ी की सुईयों को कदम-दर-कदम चलना सिखाते- सिखाते मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि कब चंद्रमा अपने रथ की बागडोर सूरज के हाथों में थमा गया। पहले तो उस उजाले में फर्क ही नहीं कर पाई पर जब गर्माहट महसूस हुई तो एहसास हुआ कि दिन काफ़ी चढ़ आया है।

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