Free Hindi Poem Quotes by Pranava Bharti | 111761149

दीप ! तुम
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चाहे आएं कितनी आँधी चाहे हो बिजली घनघोर
चाहे आँसू की लड़ियाँ हों टूटे सपनों की कड़ियाँ हों
अपन

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