ये गहरी लालीमा शाम की
तेरीयादोंके
,,,,,,,,समंदर में पिघल रही है
रौशनी की कुछ बुँदे पानी में
गिरकर
,,,,,,,, चिँगारी सी जल रही है...@

Hindi Shayri by Abbas khan : 111902349

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