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ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

@loveguruaashiq.661810


🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
{{विवशता की रस्म}}

वो खामोश खड़ी थी मजबूरियों
                  के घेरे में,

अपना सूरज ढूंढ रही थी, रिवाजों
               के अंधेरे में,

उसने  ओढ़ी थी  जो  चुनरी, वो
     कफ़न था मेरी चाहत का,

अब रास्ता कोई बचा ही नहीं था
       हम दोनों की राहत का,

न वो बेवफा थी, न मैं बागी था बस
किस्मत का लिखा, कुछ दागी था,

वो सिसक  रही थी अंदर से, पर
       बाहर खुशियाँ जारी थीं,

वो हार  गई खुद से क्योंकि, उसे
  अपनों की खुशियाँ प्यारी थीं,

वो  मेहंदी  नहीं थी हाथों में, मेरे
        सपनों का जलना था,

उसे  फूलों  की राह पे चलना था
     मुझे काँटों पे संभलना था,

अब कोई गिला नहीं उससे न ही
              कोई मलाल है,

बिछड़ के जो मिला दर्द, बस वही
               एक सवाल है,

अधूरे रह गए हम दोनों, पर ये रूह
               का नाता है,

जो मिल न सके इस दुनिया में, वो
     रूह में बस जाता है…🥀🔥
╭─❀💔༻ 
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh
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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
{{अधूरी सी वो मुलाकात}}

अब डर सा लगता है सोने से, कि
        फिर वही मंज़र आएगा,

तू फिर थामेगी हाथ मेरा, और दिल
          फिर से बहल जाएगा,

सपनों की उस दहलीज़ पर” तू
        हँसकर गले लगाती है,

फिर सुबह की पहली धूप मुझे तेरी
           यादों से जलाती है,

यह कैसी मज़बूरी है.? की नींद में तू
मेरी है और हकीकत में कोसों दूरी है,

मैं अक्सर खुद से कहता हूँ, कि अब
           तुझे याद नहीं करना,

इन सूनी-सूनी रातों में, तेरी फरियाद
                 नहीं करना,

मगर ये कम्बख्त आँखें, तेरी झलक
                को तरसती हैं,

ये बादल बनकर यादों के, मुझ पर
                ही बरसती हैं,

तू खुशबू है तो महकती रह, तू तारा
             है तो चमकती रह,

पर मेरे इन सूखे जज़्बातों में यूँ बार
           बार मत आया कर,

थक चुका हूँ मैं ये खेल- खेलकर
    मिलने और बिछड़ जाने का,

अब हिम्मत नहीं बची मुझमें, इस
        टूटे दिल को सजाने का,

या तो लौट आ हकीकत बनकर, या
   फिर सपनों से भी नाता तोड़ दे,

मैं जैसा भी हूँ जिस हाल में हूँ, मुझे
  मेरे हाल पर छोड़ दे…🥀🖤🔥
╭─❀💔༻ 
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh
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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 न┤_★__
बड़ी हसरत थी उन्हें, कांच का
          घर सजाने की,

अब टुकड़ों में ढूंढते हैं वजह
           मुस्कुराने की,
_
कहते  थे  कि  इश्क़ रूह का
        इबादत- खाना है,

मालूम न था,  ये तो खुद को
       मिटाने का बहाना है,
_
बड़ी रौनक थी उनके चेहरे पर
             कल तलक,

आज  वफ़ा  की बस्ती में वो
        कंगाली देख आए,
_
जो सिखाते थे ज़माने को जीने
           का सलीका,

सुना है, आज वो खुद अपनी
    मय्यत सजा आए....🔥
╭─❀💔༻ 
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™••..✍️
उम्र भर की नेकी, बस एक लम्हे में
               खाक हो गई,

जैसे ही एक गलती हुई, शख्सियत
              नापाक हो गई,

हज़ार बार सँवारा था जिसे अपनी
                वफ़ाओं से,

वो  सारी  अच्छाइयाँ,  आज  चंद
   शिकायतों की खुराक हो गई,

नेकी करते रहिये, “क्योंकि इंसान
भूल जाता है, पर ईश्वर नहीं,,☝️

🙇‍♂️ जय श्री कृष्णा 🙇‍♂️
    🙏 सुप्रभात 🙏
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 #motivatforself
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       ==༆ ☆🇶ⁱʰˢɐ∀ ᭄==
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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
तमाम उम्र का हासिल था जो, वो
             हार आए हम,

तेरी इक मुस्कुराहट पर ख़ुद को
            वार आए हम,
━❥
लकीरें  हाथ  की,  मिटती  गईं
           सजदों में तेरे,

मगर  हर  ज़ख्म  को  अपना ही
   साज़-ओ-सिंगार आए हम,
━❥
ये दुनिया माँगती है रोशनी अपनी
               चरागों से,

मगर आँखों का सारा नूर, तुम पे
            वार आए हम,
━❥
सुना था! इश्क़ में अक्सर सँवर
           जाते हैं दीवाने,

मगर इस खेल में पाकर भी सब
         कुछ हार आए हम,
━❥
कहाँ  तक  ढूँढती  ये  तिश्नगी
        साहिल के नज़ारे,

तेरी आँखों के  दरिया में उतर
      उस पार आए हम…🔥
╭─❀💔༻ 
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सुकून की चाह में अब, दर-बदर
             नहीं फिरता,

बिखर गया हूँ मगर टूट कर नहीं
                 गिरता,
━❥
जो उलझने सताती  थीं कभी
        अब हमनवा हैं मेरी,

कि इनके बगैर अब, मेरा गुज़ारा
             नहीं होता…🔥
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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
वही है बेकली मेरी वही बेचैनियाँ
                   मेरी,

मुकम्मल  हो  गई  अब  तो,  ये
            वीरानियाँ  मेरी,
━❥
तसल्ली हार मान कर किनारे बैठ
                गई है अब,

सुकून  देने  लगी  हैं मुझको, ये
           हैरानियाँ मेरी…🔥
╭─❀💔༻ 
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™••..✍️      
सौदा बड़ा महँगा पड़ा उसकी झूठी
              मोहब्बत का,

जिसे मरहम समझा था वही सबसे
       गहरा ज़ख्म निकला,,🔥
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™••..✍️      
बदलते हुए वक़्त का इतना मलाल
                 न था हमें,

हमने तो खुद को हर हाल में ढाल
                 लिया था,

पर टूट गए हम उस मोड़ पर आकर
                  ज़ालिम,

जहाँ किसी अपने ने ही गैरों का
      लिबास पहन लिया था,,🔥
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      ↻ ◁ㅤㅤ❚❚ㅤㅤ▷  ↻
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         ==༆☆🇶ⁱʰˢɐ∀ ᭄==
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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
वक़्त की दहलीज पर खड़ा, आज भी
वहीं देखता हूँ,

जहाँ हाथ छूटा था तेरा, मैं आज भी
वहीं ठहरता हूँ,

लोग कहते हैं कि वक़्त हर ज़ख्म भर
देता है,

मगर मैं तो हर गुजरते दिन के साथ
तुझे और गहरा महसूस करता हूँ,

तुम तो मुड़ गए अपनी नई दुनिया की
रौशनी की तरफ,

पर मेरी शामें आज भी तेरे जिक्र की
मोहताज हैं,

वो जो हंसी हम बांटते थे कभी
बेपरवाह होकर,

अब वो बस मेरे तकिये के नीचे दबे
कुछ राज हैं,

कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या तुझे
भी हिचकियाँ आती हैं.?

क्या मेरी यादें कभी तेरी नींदों में
खलल डालती हैं.?

या तूने वाकई मुझे किसी पुराने ख़त
की तरह जला दिया,

और अब मेरी परछाइयाँ भी, तुझे
नहीं पहचानती हैं.?

अजीब कशमकश है__तुझे पाने की
हिम्मत नहीं रही,

और तुझे भूल जाने का हौसला, ये
दिल जुटा नहीं पाता,

तू खुश है अपने हाल में शायद यही
तसल्ली है मेरी,

पर ये कमबख्त दिल है कि अपनी
बर्बादी का जश्न मना नहीं पाता,

कभी सोचा न था कि ये ख़ामोशी
इतनी शोर करेगी,

कि तेरे बिना मेरी हर साँस एक बोझ
बनकर रह जाएगी…🔥
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