"क्यों ना ये भी कुबुल किया जाए,
मुझे भी इसकी सजा दी जाए क्योंकि..
मैंने भी कत्ल किए है,
अपनी ख्वाहिशों के, अपने सपनों के..
घुटने दिया अपने ख्यालों को मन के ही अंदर,
चाहें 'उसकी' खातिर पर,कत्ल तो किए हैं,
तो मुझे भी कातिल करार दिया जाए"..
- Soni shakya