पानी और जीवन
जाने कितने ही
आकार बदलता है
जब ये आसमान
से आता है तो
कई प्यासे मन
को खुशियाँ दे
कर जाता है
कभी ये पिघल
कर बह जाता हे
जब यह फुब्बारे
में सजता है
तो छोटी बूंदों
सा चमकता है
और जब जाता
है तो भाप सा
सूरज की किरणों
जा खोता है
गम गिन माहौल
पे यह तड़प सा
काला बदल बन
मंडराता है पर
जब ये बरसता है
तो खुशहाली की
खुसबूदार लता सी
बन कर फ़ैल जाता
जीवन और पानी
यही कहानी
कितनो को तरसाता
हा कितनो को तडपता
पर दुःख और खुशियाँ
सच ये हमे बरस
के दिखता है
आशीष जैन (श्रीचंद)