🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
मैं पागल हूँ, तो फिर ये कैसी शराफ़त
पाल बैठा हूँ,
कि ज़िल्लत सह रहा हूँ, और तुझको
टाल बैठा हूँ,
मेरा दिल साफ़ है, शायद इसीलिए
कमज़ोर हूँ मैं,
कि आस्तीन में अपनी, मैं अपना ही
काल बैठा हूँ,
मेरा बस चलता तो, अब तक उसे
मिट्टी में मिला देता,
मगर वो शख्स अच्छा है, ये कैसे
ढाल बैठा हूँ.?
हवस होती तो शायद कब का
तुझको छीन लेता मैं,
मगर इस पाकीज़ा उल्फ़त का
लेकर जाल बैठा हूँ,
वो मेरे सामने तेरा हाथ थामे
घूमता है अब,
और मैं कम्बख़्त उसकी नेकी का
मलाल बैठा हूँ,
बड़ी रुसवाई है इसमें बड़ी ज़िल्लत
की ये हद है,
कि एक शरीफ़ की खातिर अपना
कफ़न डाल बैठा हूँ…🔥
╭─❀💔༻
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
╨──────────━❥