Hindi Quote in Motivational by Rinki Singh

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दादी जब परेशान होती थीं, किसी बात से दुखी या किसी उलझन से चिढ़ी हुई, तो अक्सर ईश्वर से शिकायत करती थीं। कहती थीं कि मन ऊब गया है, अब जीने का मन नहीं करता, भगवान कब पूछेंगे और कब बुलाएँगे। तब उनकी बातों में हमें बस झुँझलाहट दिखती थी, थकान का मज़ाक उड़ाना आसान लगता था। जब वे खुश होतीं, तो हम जानबूझकर उन्हें चिढ़ाते थे कि आज भगवान से नहीं कहोगी क्या दादी कि बुला लें। तब दादी हँसकर कहती थीं कि अभी कहाँ, अभी तो सारे पोते-पोतियों की शादी देखनी है, इतनी जल्दी थोड़े ही मरना है। उस समय यह सब बहुत साधारण लगता था, जैसे बुज़ुर्गों की आदतें होती हैं।
आज वही बातें भीतर उतरकर अर्थ बनाती हैं। अब जब मैं धीरे-धीरे दादी की उम्र की तरफ़ बढ़ रही हूँ, तो उनकी उलझनें, उनका दुःख और उनकी चुप पीड़ा समझ आने लगी है। अब पता चलता है कि वे शब्द शिकायत नहीं थे, थकान की स्वीकृति थे। कितनी ही बार मैं भी सब छोड़ देने का ख़याल लेकर बिस्तर तक पहुँची हूँ। लगता है कि अब और नहीं, अब बस थम जाना चाहिए। पर हर सुबह कुछ न कुछ मुझे वापस खींच लाता है- बच्चे की टिफ़िन, बड़ों की चाय, घर की ज़िम्मेदारियाँ, रसोई के तेल और मसालों में उलझा हुआ जीवन और उस क्षण मरने का ख़याल टल जाता है, स्थगित हो जाता है, जैसे किसी ने भीतर से कह दिया हो..आज नहीं।
जीवन से ऊब जाना शायद मनुष्य के जीवन का एक निश्चित पड़ाव है। मरने का ख़याल भी शायद कभी न कभी सबके मन में दस्तक देता है । पर उससे भी पहले हर दिन थोड़ा-थोड़ा मरते चले जाना, ऊब में फँस जाना और वहाँ से बाहर निकलने की इच्छा खो देना..यह सबसे पीड़ादायक है। अब मैं समझती हूँ कि दादी क्यों हर दिन जीवन से समझौता करती थीं। उन्होंने जीना नहीं छोड़ा था, उन्होंने बस मरना टाल दिया था।
आज मैं भी वही कर रही हूँ। न जीवन से प्रेम पूरी तरह बचा है, न उसे छोड़ने का साहस। बस रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कारणों में उलझकर मरना स्थगित कर देती हूँ। शायद यही जीवन है जहाँ पूरी तरह जीना नहीं, पूरी तरह मरना भी नहीं, बल्कि हर दिन अपने ही मन से चुपचाप समझौता करते हुए आगे बढ़ते रहना।

यह जीवन मोह पर टिका है,इस भरोसे पर कि सब अच्छा हो जाएगा।
और शायद यही भरोसा है, जो बना रहना चाहिए।

राजेश रेड्डी साहब ने कितनी सधी हुई बात कही है...

अजब ये ज़िन्दगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसां
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है

~ रिंकी सिंह
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Hindi Motivational by Rinki Singh : 112014489
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