क्यों अपनी उस्तादी पर इतना इतराते हो
रख दूसरे को धोखे में अपनी पीठ थपथपाते हो
भूल गए क्या तुझसे ऊपर भी बैठा है एक उस्ताद
जो रखे हैं तेरे सारे अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब किताब
उसकी बेआवाज लाठी से तू भी कब तक बच पाएगा
आज नहीं तो कल तेरा किया तेरे आगे ही आएगा।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati