कभी खुद से भी मिल लिया करो,
थोड़ा अपने साथ भी जिया करो।
भीड़ की आवाज़ों में क्या रखा है,
कभी अपनी खामोशी भी सुना करो।
दुनिया को खुश करते-करते
थक सा जाता है ये दिल,
सबकी मुस्कान बनते-बनते
क्यों छुपा लेते हो अपना ही ग़म हर पल।
रुक जाओ कभी ज़रा,
आईने से बात कर लिया करो,
दुनिया बाद में भी मिल जाएगी,
पहले खुद को समझ लिया करो।
क्योंकि सच यही है—
जो इंसान खुद से दूर हो जाता है,
वो पूरी दुनिया के पास होकर भी
अंदर से बहुत अकेला रह जाता है।
- kajal jha