ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है?
आपने लोकसभा चुनावों में जब वोट किया तो VVPAT को पर्ची छापते और काटते देखा ?
क्या आपको याद है ?
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याद कीजिये, जब आपने Evm पर केले का बटन दबाया तो क्या आपने देखा कि — वीवीपेट ने केले की पर्ची छापी है, या वीवीपेट ने लाईट जला कर आपको पहले से पर्ची छपी हुयी पर्ची दिखाई और लाईट बुझा दी ? यदि आपने वीवीपेट को पर्ची छापते एवं काटते नहीं देखा तो क्या आप विश्वासपूर्वक कह सकते है कि वीवीपेट ने आपको पहले से छपी हुयी पर्ची नहीं दिखा दी है ?
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VVPAT वोट चुराने में इस मनोवैज्ञानिक हेक का इस्तेमाल करता है -- अक्सर लोग उन चीजो को नहीं देख पाते या उनकी अवहेलना कर देते है जो उनकी आँखों के ठीक सामने रख दी जाती है !!
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( यह जवाब प्रायोगिक किस्म का है, अत: इसे पूरी तरह से समझने के लिए आपको थोड़े तर्क एवं पूर्व स्मृति का इस्तेमाल करना पड़ेगा। हो सकता है आपको कॉपी पेन उठाना पड़े। किन्तु यदि आप इसे समझने की कोशिश करते है तो आपके द्वारा किया गया श्रम व्यर्थ नहीं जाएगा। क्योंकि आप तब वीवीपेट का एक बेहद आसान हेक पकड़ लेंगे, जिसे वीवीपेट को सामने रखे बिना समझना और समझाना काफी मुश्किल है !! जवाब में कुछ विवरण ऐसे भी है जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। अत: पुष्टि के लिए पाठक स्वतंत्र स्त्रोतों से इनकी पुष्टि करने के लिए प्रयास करें, या अपने विवेक का इस्तेमाल करे। )
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सेक्शन - A
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1. 2013 से अब तक VVPAT में क्या बदलाव आये ?
2013 में जब वीवीपेट आया था तो वीवीपेट की बॉडी पेक न होकर खुली हुयी थी। पर्ची छपने के बाद मतदाता खुद अपने हाथ से पर्ची लेकर डिब्बे में डालता था। कृपया इस वीडियो के शुरूआती 30 सेकेण्ड का हिस्सा देखें -
Hari Krishna Prasad Vemuru@vhkprasad#ElectionCommissionOfIndia i remember you planned this📷 during first VVPAT trial in Delhi, and I am also one of your invitees to witness, why the present model changed? Does 3sec & 7sec has a link to this con..iracy? You seem to be totally dumb for such questions
684:13 pm - 1 मई 2019
लिंक -
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2018 में केंचुआ ने वीवीपेट में एक और बहुत ही शानदार बदलाव किया। केंचुआ ने वीवीपेट के पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदल दिया !! यह One Way कांच है, और इस पर बाहर से कितनी भी रौशनी डाली जाए अंदर का कुछ भी दिखाई नहीं देता।
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बाद में केंचुआ ने लाखों Evm को कलेक्टर ऑफिस से ट्रको में लादकर मंगवाया और इनमे अंधे कांच लगवाकर इन्हें फिर से कलेक्टर कार्यालय भिजवा दिया !!
कृपया इस वीडियो में 30 से 60 सेकेण्ड तक का हिस्सा देखिये। क्या आप इसमें पर्ची छपते हुए देख पा रहे है या आपने सिर्फ छपी हुयी पर्ची देखी ? इसे ध्यान से देखने के लिए आपको इसे रिवाइंड करके ध्यान से देखना पड़ सकता है।
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लिंक --
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2. अहमदाबाद के राहुल मेहता जी जब 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले वीवीपेट का पब्लिक डेमोंस्ट्रेशन देखने गए तो उन्हें यह बात खटक गयी कि जब मतदाता वोट कर रहा है तो वह वीवीपेट पर्ची को छपते एवं कटते हुए नहीं देख पा रहा है। जो कुछ हो रहा था वह यूँ था :
वोटर Evm पर कुकर का बटन दबाता है।
वीवीपेट लाईट जलाता है।
वोटर कुकर की पर्ची देखता है।
वीवीपेट लाईट बुझा देता है।
राहुल मेहता जी सोफ्टवेयर लिखते है और उन्होंने IIT दिल्ली से 1990 में कम्प्यूटर साइंस शाखा से इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। बाद में उन्होंने अमेरिका से मास्टर ऑफ़ कम्प्यूटर साइंस किया। चूंकि वे पिछले 30 वर्षो से Evm पर काम कर रहे है, और इंजीनियरिंग में समझते है अत: उन्हें यह प्रक्रिया कुछ ठीक नहीं लग रही थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था जैसा कि वे पहले देखते थे वैसे वे इस बार पर्ची को छपते और कटते क्यों नहीं देख पा रहे है। और तब उन्होंने नोटिस किया कि वीवीपेट का कांच जो कि पारदर्शी होता था, अब पारदर्शी नहीं रह गया है । इसे अंधे कांच से बदल दिया गया है। वीवीपेट पर्ची "छापने के बाद" लाईट जलाता है, और "पर्ची काटने से पहले" बुझा देता है !!!
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मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि — क्या यह मशीन ख़राब है, क्योंकि जैसे कि मैं पहले देखता था वैसे मैं पर्ची छपते और कटते नहीं देख पा रहा हूँ ?
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निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नहीं मशीन एकदम ठीक है। लेकिन अब इसका कांच बदल दिया गया है। मेहता जी ने कहा कि, क्या मैं इसका वीडियो बना सकता हूँ ? अधिकारी ने इंकार कर दिया !! तब मेहता जी कई दिनों तक एक के बाद एक 8 डेमोंस्ट्रेशन स्टेशनों पर पहुंचे और पाया कि सभी मशीनों के कांच बदल दिए गए है।
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[ तब मैं भी चुनाव लड़ रहा था और चुनाव आयोग की नामांकन प्रक्रिया में काफी उलझा हुआ था। मैंने दो बार वीवीपेट का डेमो देखने के लिए 2 दिन तक 2-2 घंटे जाया किये किन्तु मुझे इसका डेमो देखने नहीं मिला। बाद में जब मैंने इसका डेमो देखा तो पाया कि ग्लास बदल दिया गया है, और टोर्च डालने से भी अंदर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।
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तब कार्यकर्ताओं ने अन्य शहरो एवं राज्यों के एक्टिविस्ट्स को भी सूचित किया कि वे वीवीपेट का डेमो देखें और वीडियो बनाए। कई शहरो में कार्यकर्ताओ ने जाकर डेमो देखा, और सब ने पाया कि ग्लास बदल दिया गया है। किन्तु किसी भी व्यक्ति को चुनाव अधिकारियो ने वीडियो नहीं बनाने दिया !! इसी दौरान जुंझुनू ( राजस्थान ) से जूरी सिस्टम के प्रत्याशी डॉ तेजपाल कटेवा जी ने डेमो देखा और वे इसका वीडियो भी लेने में सफल रहे। उन्होंने यह वीडियों सोशल मीडिया पर डाल दिया। ]
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तब मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि – यदि मुझे वीवीपेट का बिट मैप कोड लिखने दिया जाए तो मैं ऐसा कोड लिख सकता हूँ कि इच्छित उम्मीदवार को मनचाहे वोट मिलेंगे लेकिन प्रत्येक मतदाता को उसी निशान की पर्ची दिखाई देगी जिसे उसने वोट दिया है। और पर्चियों को गिनने से भी पर्चियां बराबर निकलेगी। निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वीवीपेट का बिट मेप कोड वोटिंग के 15 दिन पहले डाला जाता है, और यह हमें आगे से आता है । हम ये कोड खुद से नहीं डालते।
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3. VVPAT का बिट मेप कोड क्या है ?
Evm में 3 हिस्से होते है :
बेलेट यूनिट : जिस पर आप बटन दबाते है।
वीवीपेट : जो पर्ची छापता है।
कंट्रोल यूनिट : जहाँ अंतिम रूप में वोटिंग काउंट जाता है।
कृपया इस बात को नोट करें कि बेलेट यूनिट, वीवीपेट और कंट्रोल यूनिट तीनो अलग अलग डिवाइस है, और इन्हें आपस में कनेक्ट किया जाता है। ये एक ही डिवाइस नहीं है।
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दूसरा बिंदु यह है कि , ये पहले से तय नहीं होता कि कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ने वाले है और उनमे से किस उम्मीदवार को कौनसा चिन्ह एवं Evm पर कौनसा क्रम मिलने वाला है। यह सब आवंटन तो वोटिंग के 15 दिन पहले होता है।
उदाहरण के लिए मेरे संसदीय क्षेत्र में 28 मई को वोटिंग थी, और मुझे चिन्ह ( प्रेशर कुकर ) का आवंटन 15 तारीख को हुआ था। 15 तारीख से पहले तब Evm को पता नहीं है कि मुझे प्रेशर कुकर मिलने वाला है, और इसीलिए Evm मशीन के पास मेरे नाम एवं चिन्ह का डेटा नहीं है। और इसीलिए Evm मशीन वीवीपेट को यह संकेत नहीं भेज सकती कि 5 नंबर का बटन दबाने पर वीवीपेट पर्ची पर प्रेशर कुकर और मेरा नाम छापेगा।
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अब मान लीजिये किसी सीट पर 4 उम्मीदवारो नरेंद्र गाँधी, राहुल मोदी , अरविन्द यादव, और पिंटू सिंह ने नामांकन किया है, और जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें निम्नलिखित चिन्ह आवंटित किये है :
नरेंद्र गाँधी – केला
राहुल मोदी – संतरा
अरविन्द यादव – अंगूर
पिंटू सिंह – जामुन
तो अब अंतिम सूची जारी होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी उम्मीदवारों का Evm पर क्रम, उनका नाम, उनके चिन्ह आदि की सूचना निर्वाचन आयोग को भेजेगा। निर्वाचन आयोग अब उन्हें इसका बिट मेप भेजेगा। बिट मेप की कमांड वीवीपेट में डाली जायेगी ताकि बेलेट यूनिट पर जब आप पिंटू सिंह का बटन दबाए तो वीवीपेट पिंटू सिंह का नाम एवं उसके चिन्ह जामुन की पर्ची छापे।
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4. कैसे VVPAT का बिट मेप लिखकर वोटो में बड़े पैमाने पर हेरा फेरी की जा सकती है ?
कृपया निचे दिए गए विवरण को ध्यान से पढ़ें :
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यदि वीवीपेट में बिट मैप लिखने वाला कोडर संतरा छाप उम्मीदवार को जितवाना चाहता है तो वह बिट मेप इस तरह से लिख सकता है कि, जब मतदाता A1 केले का बटन दबाएगा तो Vvpat केले की पर्ची छापेगा → लाईट जलाएगा → मतदाता A1 केले की पर्ची देखेगा → और लाईट बुझ जायेगी।
इसके बाद वीवीपेट कंट्रोल यूनिट को केले का 1 वोट भेज देगा।
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अब यदि अगला मतदाता A2 भी केले का बटन दबाता है तो इस बार वीवीपेट केले की पर्ची नहीं छापेगा !! हाँ, वो फिर से केले की पर्ची नहीं छापेगा !! क्योंकि उसने केले की पुरानी वाली पर्ची काटी नहीं है। उसके पास केले की वह पर्ची रोल के बाहर मौजूद है, जो उसने मतदाता A1 के लिए छापी थी , और लाईट जला कर दिखाई थी।
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अत: यदि दूसरा मतदाता A2 भी केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट लाईट जलाएगा → A2 को वही पर्ची फिर से दिखा देगा जो पर्ची उसने A1 को दिखाई थी → अब वीवीपेट लाईट फिर से बुझा देगा !!
और वीवीपेट कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजेगा कि संतरे का एक वोट बढ़ा दिया जाए !! कृपया इस बात पर ध्यान दें कि वीवीपेट ने A2 को केले की पर्ची दिखायी है, किन्तु कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजा है कि संतरे का एक वोट बढ़ा दिया जाए।
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अब यदि तीसरा वोटर A3 भी केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट फिर से उसे वही छपी हुयी पर्ची दिखा देगा जो उसने A1 एवं A2 को दिखाई थी, और कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजेगा कि संतरे का वोट बढ़ा दिया जाए !!!
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और अब यदि मतदाता B1 आता है और संतरे का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले वाली पर्ची काट कर गिरा देगा और संतरे की पर्ची छाप कर B1 को दिखाएगा। और अब वीवीपेट बिना लाईट जलाए 2 अतिरिक्त पर्चिया संतरे की छापेगा और डब्बे में गिरा देगा !! ( ताकि डिब्बे में पर्चियों की काउंटिंग का साम्य बनाया जा सके )
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तो VVPAT को बिट मेप के कोड में यदि कमांड दी जाए तो वह इस तरह बर्ताव करेगा।
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(1) जितनी बार संतरे का बटन दबाया जाएगा उतनी बार वह संतरे की ही पर्ची छापेगा और काट कर डब्बे में गिराता जाएगा।
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(2) यदि पहला वोटर केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की पर्ची छापकर दिखाएगा।
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(3) यदि अगला ( यानी दुसरे नंबर का ) वोटर भी फिर से केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की पर्ची नहीं छापेगा बल्कि लाईट जलाकर पहले से छपी हुयी पर्ची ही दिखा देगा, और बिना पर्ची काटे लाईट बुझा देगा।
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(4) यदि तीसरा वोटर फिर से केले का बटन दबाता है तो फिर से लाईट जलाकर उसे वही पर्ची दिखा देगा, जो उसने पहले और दुसरे वोटर को दिखाई थी।
(4.1) यदि चौथा वोटर संतरे का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की वह एक पर्ची काटकर डिब्बे में गिरा देगा जो उसने पहले, दुसरे और तीसरे वोटर को दिखाई थी।
(4.2) अब वह संतरे की पर्ची छापकर चौथे वोटर को दिखायेगा और लाईट बुझा देगा ।
(4.3) लाईट बुझाने के बाद पर्चियों की काउंटिंग पूरी करने के लिए वीवीपेट दो अतिरिक्त संतरे की पर्चियां छापेगा, और डिब्बे में गिरा देगा ।
(5) लेकिन यदि चौथा वोटर भी फिर से केला दबाता है तो अबकी बार वीवीपेट वोट नहीं चुराएगा। क्योंकि उसे सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट चुराने की कमांड दी गयी है। तो इस बार वह केले की पर्ची छापेगा और साथ में 2 पर्चियां और भी केले की छाप कर 4 पर्चियां केले की डिब्बे में गिरा देगा। मतलब वीवीपेट सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट ही चुराएगा। यदि निरंतर केले का बटन दबाया जा रहा है तो वह वोट चुराना बंद कर देगा और एक भी वोट नहीं चुराएगा।
तो VVPAT की कोडिंग की सिक्वेंस इस तरह होगी :
A1केला → A2केला → A3केला → B1संतरा के क्रम में वोटिंग होती है तो पहला वोट केले को जाएगा, किन्तु बाद के दो वोट संतरे को जायेंगे। लेकिन A2 एवं A3 पर्ची केले की ही देखेंगे। और चूंकि वीवीपेट दो अतिरिक्त पर्ची संतरे की छाप कर डिब्बे भी गिराता है अत: पर्चियां भी बराबर निकेलेगी। मतलब कंट्रोल यूनिट में भी 1 केला एवं 3 संतरा का काउंट आएगा और वीवीपेट के डिब्बे में भी 1 पर्ची केले की और 3 पर्चियां संतरे की निकलेगी। और कमाल की बात यह है कि जब आप वोटर से पूछेंगे तो 3 वोटर कहेंगे कि हाँ हमने केला दबाया था और हमने केले की ही पर्ची देखी थी !!!
A1केला, B1संतरा, A2 केला, B2संतरा....... केला, संतरा, जामुन, अंगूर, संतरा, केला, जामुन के क्रम में वोटिंग होगी तो वीवीपेट कोई वोट नहीं चुरा सकेगा। क्योंकि वीवीपेट को हर बार नयी पर्ची छापनी होगी।
यदि केला1 , केला2 , केला3 , केला4 ....... केला7 या जामुन1 , जामुन2 , जामुन3 , जामुन4, ..... जामुन7 के क्रम में वोटिंग होगी तो भी वीवीपेट कोई वोट नहीं चुराएगा। क्योंकि वीवीपेट सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट ही चुराएगा। यदि किसी उम्मीदवार के पक्ष में भारी एवं निरंतर मतदान हो रहा है तो वीवीपेट वोट नही चुराएगा. क्योंकि इससे अस्वभाविक परिणाम आ सकते है।
यदि संतरे को 50% से अधिक वोट मिल जाते है तो वीवीपेट वोट चुराना बंद कर देगा, और स्वभाविक वोटिंग होने देगा।
दुसरे शब्दों में जो 6 आदमी दिल्ली के मुख्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर में बैठकर सभी सीटो के बिट मेप लिखकर भेज रहे है, चुनाव के नतीजे वे ही तय करेंगे। अलबत्ता वे आपको वे पर्चियां दिखाते रहेंगे जो बटन आपने दबाया है !!! कृपया इस बात को भी नोट करें कि कोडर यह कमांड भी दे सकता है कि वीवीपेट का यह कोड तब एक्टिव होगा जब किसी मशीन पर 50 वोट डाले जा चुके होंगे। मलतब जब वोटिंग से पहले मशीन चेक करने के लिए सेम्पल वोटिंग की जायेगी तो कंट्रोल यूनिट सही पर्ची काटेगी और सही संकेत ही कंट्रोल यूनिट को भेजेगी !!!
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सार यह है कि -- वीवीपेट का कोड केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे 4 इंजीनियर्स लिखते है, और ये लोग जैसा कोड लिखेंगे नतीजे वैसे ही आयेंगे !! और इस गड़बड़ी को कभी भी साबित नहीं किया जा सकेगा !!!
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5. तो मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि, यदि वीवीपेट का बिट मेप मुझे लिखने दिया जाए तो मैं ऐसा बिट मेप लिख सकता हूँ कि आप अगर केले का बटन दबायेंगे तो वीवीपेट पर भी आप केले की पर्ची देखेंगे, किन्तु कंट्रोल यूनिट में वोट संतरे को जाएगा , और यदि आप पर्चियां गिनेंगे तो वे भी बराबर निकलेगी !! मतलब उसी हिसाब से निकलेगी जितने वोट कंट्रोल यूनिट में है !!
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चुनाव आयोग ने उन्हें वीवीपेट दिखाने से इंकार कर दिया। मेहता जी ने उनसे कहा कि यदि मुझे 12 घंटे के लिए एक वीवीपेट दे दी जाए तो मैं आपको इसका डेमो देकर दिखा सकता हूँ । निर्वाचन अधिकारी ने इनकार कर दिया। निर्वाचन अधिकारी का कहना था कि वीवीपेट पूरी तरह से सुरक्षित है, और जो भी आप कह रहे हो वह बकवास है !! मेहता जी ने लिखित में उन्हें अर्जी दी कि मुझे एक वीवीपेट दी जाए ताकि मैं यह करके दिखा सकू। निर्वाचन अधिकारी ने इनकार कर दिया !!
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तब मेहता जी ने तारीख 7 अप्रेल 2019 को गुजरात के लीडिंग गुजराती दैनिक “गुजरात समाचार” के मुख्य पृष्ठ पर एक विज्ञापन दिया , जिसमे उन्होंने लिखा कि — " जो भी व्यक्ति VVPAT का कोड लिखेगा, वह चुनावी नतीजे तय करेगा। और यदि मुझे VVPAT दी जाए तो मैं ऐसा कर के दिखा सकता हूँ !! "
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विज्ञापन का लिंक :
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बदले में केंचुआ ने उन्हें नोटिस जारी किया कि आप एक संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाकर मतदाताओं को भ्रमित कर रहे हो, अत: अपने खर्चे पर फिर से एक विज्ञापन लगाओ कि – आपका दावा मनगड़ंत है..
नोटिस का हिन्दी अनुवाद :
“गुजरात समाचार” समाचार पत्र में, ता. 07/04/2019 को, “ राइट टू रिकॉल पार्टी ” नाम के तहत “शीर्ष के 4-5 प्रोग्रामर के लिए लाखों ईवीएम में वोट बदलना संभव !! कैसे ? और उपाय ?” इस हैडलाइन से मनमानी चीज़े बताए हुए पर्याप्त सबूत के बिना प्रथम नजर से ही जाली (भ्रामक) विज्ञापन दिया गया है, उस संबंध में आपको निम्नलिखित नोटिस दिया जाता है :
यह कि, आप अच्छी तरह से जानते है कि यानी चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से प्राप्त हुए अधिकारों और संसद द्वारा निर्मित R.P.Act-1951 और चुनाव प्रबंधन नियमों के अधीन काम करने वाला संगठन है। दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के चुनाव स्वतंत्र और न्यायिक तरीके से हो, इस तरह से चुनाव आयोग काम करता है। वर्ष 1999 से ई.वी.एम द्वारा चुनाव प्रक्रिया हो रही है, और इस तरह चुनाव आयोग के अधीन EVM द्वारा हो रही चुनाव प्रक्रिया में अविश्वश्नियता का एक भी किस्सा साबित नहीं हुआ है, और इस वजह से EVM का नि-संदेह बेहतरीन ट्रेक रिकॉर्ड रहा है।
आपकी पार्टी और नाम का उल्लेख सहित दिनांक 07.04.2019 को “गुजरात समाचार” दैनिक समाचार पत्र में चुनावी विज्ञापन ऊपर वर्णित शीर्षक से प्रसिद्ध किया गया है और इसमें चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर मनगडंत आरोप लगाया गया है। जिसके कारण साधारण मतदाता का निरर्थक भ्रमित होना संभव है, और आपकी इस कोशिश से अब तक के निष्कलंक चुनाव प्रक्रिया को बिना प्रमाण दूषित करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा की आम चुनाव प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। चुनाव आयोग की देखरेख में हमारा तंत्र चुनाव का संचालन कर रहा है। आपने 06-गांधीनगर संसदीय मत विस्तार से खुद को प्रत्याशी घोषित किया है, और नामांकन के समय आपने भारत के बंधारण का ''अनुच्छेद -84- (ए)'' के अनुसार भारत का संविधान और संविधान से स्थापित भारत की एकता और सप्रभुता की विश्वास की सौगंध उठायी है। फिर भी भारत की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था भारत के चुनाव आयोग द्वारा स्थापित कार्यप्रणाली के प्रति आधार विहीन टिप्पणी और भ्रामक विज्ञापन देकर चुनाव आयोग को कोई भी प्रमाण ( proof ) दिए बिना दुषित करने का प्रयत्न किया है। इस परिस्थिति में आपके द्वारा वर्तमान पत्र में प्रसिद्ध किया गया विज्ञापन निराधार आरोप चुनाव प्रक्रिया को आशंकित और विषयुक्त बना सकता है, ऐसा हमारा मानना है।
इसलिए आपके द्वारा प्रसिद्ध हुए “चुनाव विज्ञापन” के संदर्भ में आप प्रसिद्ध किये हुए विज्ञापन को प्रमाणित करे, ऐसा आधारशील पुरावा (proof) सहित 3-दिन में खुलासा दो या अपने दिए हुए EVM विज्ञापन के गलत होने का खुद के खर्चे से विज्ञापन देकर लोगो का संदेह दूर करने के लिए नोंध लीजिए।
अन्यथा आपके सामने उचित जोग्वाई में कानूनी कार्यवाही करने की हमे मजबूरी एवं शक्ति हो उसकी नोंध लीजिये।
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सेक्शन - B
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1. भारत में VVPAT क्यों लायी गयी थी ?
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भारत के नेताओं को पंजे में लेने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में Evm लेकर आये है, और इसे हैक किया जा सकता है --- यह जानकारी पहली बार मुझे सबसे पहले संघ=बीजेपी के नेताओं से 2009 में मिली थी। तब मैं संघ=बीजेपी में काम करता था, और मैंने जितना इसे समझा, मेरा Evm से भरोसा उठ गया था। यह उस दौर की बात है तब बीजेपी=संघ के नेता 2009 के चुनावी नतीजो के बाद पूरे देश में धरने दे रहे थे, और देश के नागरिको को यह बता रहे थे, कि Evm में रिमोट से वोट बदले जा सकते है और कोंग्रेस ने Evm का इस्तेमाल करके चुनाव जीता है। तब संघ की शाखाओ एवं बीजेपी की बैठको में वरिष्ठ नेताओ द्वारा हम कार्यकर्ताओ को हमेशा यही कहा जाता था कि, कोंग्रेस ने यदि Evm में हेराफेरी नहीं की होती तो हम सरकार बना लेते !!
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उस समय कोंग्रेस को 210 सीट मिली थी, और इस बात को मैंने भी नोट किया था कि देश के लोगो की एनर्जी 210 सीटो के साथ मैच नहीं हो रही थी। मेरा मतलब है नतीजो के बाद माहौल देखकर लग नहीं रहा था कि कोंग्रेस को 210 सीटो के लिए लोगो ने वोट किया है !! उस समय की खबरे एवं बीजेपी=संघ के नेताओं का तब का स्टेंड आप निचे दिए गए लिंक्स पर देख सकते है :
EC rejects BJP charge about EVM malfunction
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BJP to show EC how EVMs can be tampered
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तब लाल कृष्ण आडवाणी भारत में लगातार Evm को हटाकर बैलेट पेपर लाने की मुहीम चला रहे थे। इसी दौरान संघ=बीजेपी के सांसद GVL नरसिम्हा राव ने डेमोक्रेसी एट रिस्क नाम से एक पुस्तक लिखी जिसमे उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि Evm के रहते लोकतंत्र एक फ्रोड है !! इस पुस्तक का आमुख आडवाणी जी ने लिखा था। हालांकि संघ=बीजेपी के अन्य नेताओं की तरह ही आजकल ये भी Evm के समर्थन में है !!
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तब मेहता जी और इंजीनियर श्री हरि प्रसाद जी भी Evm को कैसे हैक किया जा सकता है, दर्शाने को लेकर काम कर रहे थे। किंतु सबसे बड़ी समस्या थी कि केंचुआ अवलोकन के लिए Evm देने को राजी नहीं था। और जब तक इंजीनियर्स के हाथ में मशीन नहीं लगे तब तक मतदाताओ को यह बात समझायी नहीं जा सकती कि Evm में रिमोट से वोट बदले जा सकते है !! इन लोगो ने केंचुआ से कई बार आग्रह किया कि यदि घंटे भर के लिए Evm दी जाए तो आपके सामने ही हम इसके वोट रिमोट से चेंज करके दिखा देंगे। हम इंजीनियर है, जादूगर नहीं है। किन्तु केंचुआ ने Evm देने से इंकार कर दिया।
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इसी समय मेहता जी ने इन्डियन एक्सप्रेस के मुख्य पृष्ठ पर इस आशय का विज्ञापन देने की कोशिस की कि, कैसे रिमोट से Evm के वोट बदले जा सकते है। किन्तु इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पेज पर यह विज्ञापन लगाने से इंकार कर दिया। तब उन्होंने यह विज्ञापन तीसरे पृष्ठ पर दिया। यह विज्ञापन 31 जुलाई 2009 को दिया गया था। विज्ञापन दिल्ली, मुंबई समेत कई महानगरो के एडिशन में प्रकाशित हुआ।
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विज्ञापन का लिंक :
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इसी समय इंजिनियर श्री हरि प्रसाद जी ने 2010 में जिला कलेक्टर कार्यालय से एक इवीएम चुराई एवं इसका डिस्प्ले बदल कर इसके वोटो को रिमोट से बदल कर दिखाया। हरि प्रसाद जी का यह वीडियो उन्होंने यू ट्यूब पर अपलोड किया था। बदले में चुनाव आयोग ने श्री हरि प्रसाद पर काफी मुकदमे डलवाकर उन्हें फिट कर दिया। उनकी कम्पनी के कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया और उन पर भी मुकदमे डाले गए !!
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श्री हरि प्रसाद जी द्वारा बनाया गया वीडियो यहाँ देखें - India's EVMs are Vulnerable to Fraud
( इस वीडियो के क्रेडिट में श्री राहुल मेहता जी एवं GVL नरसिम्हा राव का नाम भी देखा जा सकता है )
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तो इतना सब काण्ड होने के कारण यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी थी कि Evm विश्वसनीय नहीं है। लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक Evm हटाना नहीं चाहते थे। क्योंकि इसे हटाने के बाद नेताओ की नस दबाकर रखने का एक महत्तव्पूर्ण हथियार उनके हाथ से निकल जाएगा। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत की सभी पार्टियों एवं नेताओं को दो चीजो से कंट्रोल में रखते है - (1) मीडिया व (2) Evm
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मेक ओवर करने के लिए पहले चरण में चुनाव आयोग ने हर साल इवीएम चलेंज आयोजित करना शुरू किया जिसमे वह कहता है कि आकर Evm हैक करके दिखाओ। लेकिन चूंकि केंचुआ Evm किसी को भी छूने नहीं देता इसीलिए चुनाव आयोग के चेलेंज में कोई इंजिनियर नहीं जाता। और यह बात स्पष्ट है कि बिना खोले इसे हेक नहीं किया जा सकता।
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कृपया पाठक इस बात को नोट करे कि किसी भी व्यक्ति को इवीएम के साथ छेड़खानी करने का अवसर नहीं मिले तो इसे हेक नहीं किया जा सकता। इसे सिर्फ एक ही शर्त पर किया जा सकता है कि हेकर को इसे खोलने का अवसर मिले। तो केंचुआ किसी भी व्यक्ति को Evm छूने नहीं देता और अगले दिन सभी अखबारों में बड़े बड़े अक्षरों में खबर लगवा देता है कि कोई भी इंजीनियर Evm को हैक करके नहीं दिखा सका !!!
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मेरा पाठक से आग्रह है कि कृपया ऊपर दिए गए पेरेग्राफ को दुबारा पढ़े और ध्यान से पढ़ें। इससे आपको पेड मीडिया की ताकत का अंदाजा होगा। केंचुआ और पेड मीडिया ने पिछले 20 साल से सिर्फ एक गलत वाक्य का इस्तेमाल करके देश के 90 करोड़ मतदाताओ को बेवकूफ बना के रखा है। और केंचुआ यह अधुरा वाक्य हजारों बार दोहराता है।
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उसका अधुरा और गलत वाक्य है — Evm को हैक नहीं किया जा सकता !! ( यह झूठी बात है )
जबकि सही वाक्य है — Evm को बिना छुए हैक नहीं किया जा सकता !!! ( यह सही बात है )
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केंचुआ इतना भ्रष्ट और चालाक है कि वह हर साल Evm चेलेंज आयोजित करता है, किन्तु इंजीनियर्स को Evm छूने नहीं देता। लेकिन केंचुआ और पेड मीडिया अगले दिन यह बात छापते है कि कोई भी इंजीनियर इसे हैक करके नहीं दिखा सका !! जबकि कोई इंजीनियर वहां जाता ही नहीं है !!
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ऊपर मैंने दो कार्यकर्ताओ के विवरण दिए है। ये पिछले 15 साल से केंचुआ से Evm मांग रहे है। इनका कहना है कि हमें आप 2 घंटे के लिए लाइव Evm / Vvpat दे दो। हम इसे लाइव ही हैक करके दिखा देंगे !! और जब केंचुआ इन्हें Evm नहीं देता तो ये इसे चुराते है, और बदले में केंचुआ इन्हें खामोश कर देता है !! और ये लोग कोई परचून की दूकान नहीं चलाते है !! इंजीनियर्स है। और मेहता जी ने IIT दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस से तब इंजीनियरिंग की थी, जब भारत में कम्प्यूटर इक्का दुक्का हुआ करते थे। केंचुआ जानता है कि इन लोगो के हाथ में Evm दे दी गयी तो ये इसे हैक कर देंगे।
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मेरा बिंदु है कि, जो इंसान Evm / Vvpat का कोड लिखेगा Evm / Vvpat उसी के हिसाब से नतीजे देगी। Evm / Vvpat का कोड केंचुआ लिखता है !! मतलब यदि केंचुआ और उसके सभी अधिकारी 100% ईमानदार है तो Evm सेफ है वर्ना नहीं है !!
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और फिर आप सोशल मीडिया में आप ऐसे लोगो को बेहद बुद्धिमता पूर्ण डिबेट करते देखते है कि Evm सुरक्षित है !! कैसे सुरक्षित है ? क्योंकि उन्होंने यह अख़बार में पढ़ा है !!!
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Anti-Evm एक्टिविस्ट्स ने मतदाताओं तक यह जानकारी पहुंचानी जारी रखी कि केंचुआ मतदाताओ को अखबारों-टीवी के माध्यम से भ्रमित कर रहा है कि Evm को हैक नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया के ताकतवर हो जाने के कारण कार्यकर्ताओ की बात ज्यादा तेजी से मतदाताओं तक जा रही थी। चूंकि केंचुआ मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था, इसीलिए अखबारों में भी यह बात आना जरुरी था कि केंचुआ का Evm चेलेंज एक ढकोसला है।
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नवम्बर 2012 में मेहता जी ने Anti-Evm पर फिर से विज्ञापन दिया। यह विज्ञापन गुजरात समाचार के मुख्य पृष्ठ पर दिया गया था। विज्ञापनो का जिक्र इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि कोरा-फेसबुक पर लिखने का पैसा नहीं लगता, किन्तु इस स्तर के एक विज्ञापन पर लाखों का खर्च आता है। और विज्ञापन सिर्फ तब ही लगाए जाते है जब सूचना की गंभीरता एवं विश्वसनीयता का स्तर इतना उच्च हो कि लाखों रूपये इस पर खर्च किये जा सके।
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तो 12 साल की इतनी सब उठा पटक के बाद छोटे छोटे कार्यकर्ता नागरिको के सामने यह स्थापित करने में कामयाब रहे कि केंचुआ पूरे देश को Evm के माध्यम से पूरे देश के मतदाताओं से झूठ बोल रहा है। कृपया पाठक इस बात को नोट करें कि सरकार जब भी कोई सांकेतिक सकारात्मक बदलाव लाती है तो इसके पीछे हमेशा कई सारे छोटे छोटे कार्यकर्ताओ के प्रयास होते है। ऐसे कार्यकर्ता जो मीडिया के चपेट में नहीं रहते और इस बात को जानते है कि असली लड़ाई मीडिया के साथ ही है, और ब्रांडेड नेता, सरकारे आदि मीडिया की कठपुतली एवं प्रोडक्ट से ज्यादा कुछ नहीं है ।
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तब मतदाताओ को और भी बुत्ता देने के लिए केंचुआ 2012 में VVPAT लेकर आया। केंचुआ को यह बात पता थी कि देश के काफी सारे एक्टिविस्ट्स Evm के पीछे लगे हुए है, अत: उसने प्राथमिक डिजाइन में कांच नहीं लगाया। फिर 3 साल बाद इसमें कांच लगाया। लेकिन तब भी मतदाता पर्ची कटते और और छपते देखता था। फिर इसे ब्लेक कांच से बदला। इस ब्लेक कांच में टोर्च की लाईट डालने से अंदर का कुछ कुछ दिखाई देता था। और फिर लोकसभा चुनावों के पहले केंचुआ ने ब्लेक कांच को अंधे कांच से बदल दिया !!! one way कांच लगाने का क्या प्रभाव हुआ है यह ऊपर लिखा जा चुका है।
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तो वीवीपेट की यह लड़ाई अब शुरू हुयी है, और अगले चुनावों तक anti-evm कार्यकर्ताओ को यह प्रयास करने चाहिए कि वे वीवीपेट के फ्रोड की सूचना ज्यादा से ज्यादा मतदाताओ तक पहुंचाए। पेड मीडिया की चपेट में होने के कारण किसी मतदाता को यह बात लिखकर या बोलकर समझाना काफी मुश्किल है, अत: कार्यकर्ताओ को सभी मतदाताओ को यह सूचना देनी चाहिए कि आगामी चुनावों में जब भी वे वोट करने जाए तो इस बात को नोटिस करें कि उन्होंने वीवीपेट में पर्ची छपते या कटते देखी है या नहीं । जब वोटर खुद अपनी आँखों से इसे देखेगा तो स्वयं ही समझ जायेगा। वर्ना पेड मीडिया की गिरफ्त में रहने वाले किसी व्यक्ति को 1000 पेज लिखकर भी यह बात समझाई नहीं जा सकती।
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Evm के कारण बूथ स्तर के आंकड़े सामने आने लगे जिससे तुष्टिकरण एवं बदला भंजाने की राजनीती शुरू हुयी !!
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भारत में EVM का प्रयोग 1988 में उपचुनाव के दौरान प्रायोगिक तौर पे शुरू किया गया ,1996 के लोकसभा चुनावों में 12 सीट पर EVM के माध्यम से चुनाव हुए । ये वाजपेयी थे जिन्होंने बड़े पैमाने पर EVM के इस्तेमाल की वकालत की, फलस्वरूप 1998 के आम चुनाव में सभी 543 लोकसभा सीट पर EVM के माध्यम से मतदान हुआ ।
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1998 से पहले मतपत्रो के माध्यम से वोटिंग होती थी। गणना के दौरान अक्रमत: ढंग से किन्ही 3 मत पेटियों के मतपत्रो को मिलाने के उपरांत गणना की जाती थी । इस विधि से की गयी गणना से बूथ वाईज़ वोटिंग को चिन्हित करना मुमकिन नहीं था । लेकिन EVM के आने से स्थिति पलट गयी ।
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अब चूंकि हर बूथ पर एक EVM रखी जाती है अत: हर बूथ की वोटिंग के आंकड़े चिन्हित EVM में दर्ज़ रहते है। 2010 तक चुनाव आयोग बूथ वाइज़ आँकड़े अधिकृत रूप से ज़ाहिर नहीं करता था, किन्तु अनाधिकृत रूप से सभी पार्टियों और उम्मीदवारों के पास यह आंकड़े उपलब्ध हो जाते थे। वर्ष 2010 से RTI के अधीन चुनाव आयोग ने बूथ वाइज़ आंकड़ो का खुलासा करना शुरू किया, और आंकड़े सहज उपलब्ध होने लगे।
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बूथ वाइज़ आंकड़ो से अमुक पार्टी को यह सुनिश्चित जानकारी मिल जाती है कि अमुक क्षेत्र के नागरिको ने मुझे पर्याप्त मात्रा में वोट नही किया है, अत: तुष्टि करण और दमन के लिए इस पैमाने को आधार बनाया जाने लगा और राजनेतिक दलों ने कम वोट देने वाले क्षेत्रो के नागरिको से बदला भंजाना शुरू किया।
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सेक्शन - C
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1. कोंग्रेस-बीजेपी-सपा-बसपा-आपा का Evm पर स्टेंड क्या है ?
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1998 से ही सभी बड़ी पार्टियों एवं ब्रांडेड नेताओं का एक ही स्टेंड है --- जब चुनाव हार जाओ तो मजमा बनाने के लिए Evm को कोसना शुरू करो !! और जब सत्ता में आ जाओ तो Evm का समर्थन करने लगो !!
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सबूत ?
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भारत में पिछले 20 साल में आज तक किसी भी बड़ी पार्टी के किसी भी सांसद ने संसद में Evm को रद्द करके बेलेट पेपर लाने के लिए बिल नहीं रखा है। केजरीवाल जी और मायावती भी Evm के खिलाफ रहे है। मायावती के पास लोकसभा में दर्जनों सांसद रहे है। और आम आदमी पार्टी के पास भी पिछली लोकसभा में 4 सांसद थे। किन्तु इनमे से किसी भी पार्टी के किसी भी सांसद ने संसद में कोई बिल नहीं रखा !! और कोंग्रेस ने भी नहीं रखा !!
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2. सोनिया जी, मोदी साहेब, केजरीवाल जी, मुलायम सिंह जी, मायावती आदि के समर्थको एवं अंध भगतो का Evm पर क्या स्टेंड है ?
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नेताओं के समर्थको एवं अंध भगतो का सेपरेट कोई स्टेंड नहीं होता। जो उनके नेता का स्टेंड होता है, वही उनका स्टेंड हो जाता है। मतलब इस समय यदि आप सोनिया जी के भगतो से पूछेंगे तो वे कहेंगे कि Evm को हैक किया जा सकता है, किन्तु यही भगत 2014 से पहले तक नागरिको को यह विश्वास दिलाने में लगे रहते थे कि Evm एकदम सुरक्षित है !! अन्य नेताओं के भगतो का भी यही हिसाब है।
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3. सुप्रीम कोर्ट का Evm पर क्या स्टेंड है ?
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मेरी मान्यता में भारत की सबसे भ्रष्ट संस्था सुप्रीम कोर्ट है। जजों को मैं भारत के सभी स्तर के सभी प्रकार के भ्रष्टाचार की गंगोत्री मानता हूँ। Evm पर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज Evm के मुद्दे पर लगातार आती हुयी आपत्तियों की सुनवाई करके पिछले 20 साल से टाइम पास कर रहे है, ताकि Evm को शुरू रखा जा सके। जब भी कोई PIL दायर होती है केंचुआ सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों को जाकर कहता है कि, Evm एकदम सुरक्षित है, और सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज मान लेते है।
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उन्होंने कभी भी केंचुआ को नहीं कहा कि -- आपकी Evm को अवलोकन के लिए सार्वजनिक करो और इंजीनियर्स को इसे हेक करने का अवसर दो !! भ्रष्ट केंचुआ भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट दोनों ही संवेधानिक