उम्मीद रखना मना है
कविता
जिंदगी बेमानी लगता है
हमें तेरी कहानी अनजाने लगता है
आज सुबह उठे हम
पर
होस में हम थे ही नहीं
खो दिया खुद को कई
उन कहानियों में जो सुनी सुनाई लगी
बहुत शोर शोराबा सुन के उठा था
पर जागी सुबह तो
अपना कोई नहीं लगा
एक डरावनी सपने का अंत हुआ
पर जो सामने था वह दर्दनाक सच्चाई था
जिसे देखकर अपना होस संभालना मुश्किल लगा
जिंदा दिली बन कर रहना मुश्किल लगा
और हमने खुद को खुद ही दफना दिया वही
जहां जिंदा होकर मुर्दा चल रहे थे
वो कब्रगाह लाशों की नहीं थी
वह कब्रगाह रहा उम्मीदो की थी
जहां बड़ी बड़ी अक्षर में लिखा गया था
उम्मीद रखना मना है
यहां आप जिंदा तो हो
पर जिन मना है
🥀🫀🖤
यह कविता आप सबको अच्छे लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯