कैसा होगा वो दिन.........
जब में किसी PDF में अपना नाम देखूंगी
मेरे नाम के पीछे पापा का नाम जुड़ा होगा
आंखों में जीत के आंसू , होंठो पर हँसी होगी
या मुंह खोले, आंखे फाड़ कर परिणाम देखती रहूंगी।
कैसा होगा वो दिन........
क्या में अपने भाव छुपा पाऊंगी घर में बता पाऊंगी
या सीधा मिठाई लाकर घरवालों को अचंभित कर दूंगी ।
कैसा होगा वो दिन.......
थोड़ी देर के लिए घर का वातावरण कॉल सेंटर बन जायेगा
बधाईयों की बारिश, तानों के ओले गिरेंगे
या मैं धन्यवाद कहते कहते सांस लेना भूल जाऊंगी।
कैसा होगा वो दिन........
हमें तो पहले ही पता था ये पक्का सलेक्शन लेकर रहेगी
या अरे इसकी तो किस्मत ही बहुत अच्छी है सारा श्रेय मेरी किस्मत को दे दिया जायेगा ।
कैसा होगा वो दिन.......
मां के आंखों से खुशी के आंसू, गर्व से पापा खुशी से फूले नहीं समाएंगे
उस दिन मेरा हाल कुछ ऐसा होगा शब्दों में अपनी खुशी बयान नहीं कर पाऊंगी
क्या मैं अपने सारे संघर्षों पर पूर्ण विराम लगा पाऊंगी।
कैसा होगा वो दिन।
✍️ अंतिमा 😊