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एक वो इन्सान जिसकी प्रकृति बिल्कुल शांत हो, और दूसरा इन्सान वो जो ज्यादा गुस्सेवाली प्रकृति रखता हो, ये दोनों प्रकृति वाले इन्सान अपने अपने जीवन में इन्हें जो चाहिए वो हांसिल कर सकते है, मगर...ज्यादा से ज्यादा 80 प्रतिशत, और वो भी किसी न किसी की, थोड़ी बहोत दया, दबाव, डर, या फिर किसी की रहम नजर के कुछ प्रतिशत मिला के, इसके बाद भी, जो मिलता है, इसका भी सही आनंद तो इससे भी 50 प्रतिशत कम ले पाते हैं, यदि हम जो मिले, जितना मिले, इसका सो प्रतिशत आनंद लेना चाहते हैं तो, हमें शांत, और गुस्सा दोनों प्रकृति का पूर्ण ज्ञान होना, और उस ज्ञान का सही इस्तेमाल करना भी सीखना ही होगा, और इसको सीखना बिल्कुल सरल है, इसके लिए हमें सिर्फ इतना ही करना होगा कि, हमें कब, कौनसी बात पे कितना शांत रहना है, इसका पता "हमको" और हम कब, और कौनसी बात पे गुस्सा होंगे इसका पता "सामनेवाले को" होना अति आवश्यक है.
अपने भविष्य को लेकर बेफिक्र रहने वाले लोगों से तो, थोड़े गुमसुम रहने वाले अच्छे होते है, क्योंकि..... आगे चलकर वह दोनों, लगभग विपरित परिस्थितियों में जीते हैं. - Shailesh Joshi
इश्वर ने हमें वर्तमान सिर्फ भविश्य के बारे में सोचने के लिए नहीं दिया है, लेकिन भविष्य के बारे में सोचने के साथ-साथ, पहेले अभी का, और उसके बाद, यदि "समय बचें तो" भविष्य के लिए कुछ न कुछ... "अभी" हमसे जितना हो सके, वह करने के लिए दिया है. - Shailesh Joshi
समझदार होना अच्छी बात है समझदारी दिखाना भी अच्छी बात है मगर हमें हमारी समझदारी, कब दिखानी है ? कहां दिखानी है ? और कितनी दिखानी है ? यदि इतनी समझदारी हमारे अंदर नहीं है, तो फिर हमारे जीवन में, कभी ना कभी निसंदेह वो दिन आकर ही रहेगा, जब हमारी समझदारी ही हमें सबसे बड़ा नुकशान पहुंचाएगी, क्योंकि समझदारी एक ऐसा हथियार हैं, जो हमें हमारे जीवन में सफलता प्राप्त करने की, खुशिया हांसिल करने की जंग में, हमें कामयाबी भी दिला सकती हैं, और कभी-कभी हमारी समझदारी हमारी नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण भी बन सकती हैं, इसलिए हम हमारी समझदारीयों का उपयोग बहुत ही समझदारी से करे, क्योंकि हमारे लिए वहीं सबसे बड़ी समझदारी है.
हर वक़्त, हर बार, हर बात में "मैं सही हूं" साबित करने की हमारी आदत, या कोशिश, कभी-कभी हमको "मैं सही था" वाले हालत तक ले जाने का कारण बन सकती है. और तब हमें जो नुकसान, या फिर दर्द महसूस होता है, वह दुःख, या नुकशान, जीवन में दो चार बार, दो चार जगह, या फिर दो चार लोगों के सामने सही होने के बावजूद खुद को गलत साबित होना पड़े, इससे तो बड़ा ही होता है. - Shailesh Joshi
એકબીજાનાં દિલની વાત એકબીજાના કાને પહોંચે, ત્યારે "કચાશ" થાય છે, "માત્ર" પ્રેમની શરૂઆત, ને પછી.... જ્યારે "મૌન રહીને પણ" એકબીજાનાં મનની વાત, એકબીજાનાં મન સુધી પહોંચતી થાય, ત્યારે થાય એ પ્રેમને "પરિપક્વ થવાની શરૂઆત" - Shailesh Joshi
पैसे कमाना, इतना आसान काम नहीं होता, साथ ही, कमाये हुए पैसों में से, सोच समझकर सही जगह, और सही तरीके से पैसे खर्च करना भी आसान नहीं होता. ये दोनों कठिन काम है, इसके बावजूद कई लोग, ये दोनों ही कठिन काम पर सिद्धि हांसिल कर लेते है, फिर भी... फिर भी कई बार उनको उनके जीवन में, आगे जाके बहुत सी, मुश्किलों का, या फिर कठिनाईयोका सामना करने की नौबत आती है, क्यों.....? क्योंकि इसकी ज्यादातर वजह यह होती है कि, वो लोग मेहनत करके पैसे कमाना, और सोच समझकर खर्च करना तो सीख लेते है, मगर इनके अलावा, जो सबसे जरूरी, और सबसे कठिन काम जो होता है, उसमें धोखा खा जाते है, या फिर उसकी ओर इतना ध्यान नहीं देते, और वह कठिन काम का नाम है.....कमाए हुए पैसों में से, "कुछ रकम की बचत करने का काम"
सही तरीके से घर संसार कैसे चलता है ? या चल सकता है ? और इसके लिए हमें क्या करना चाहिए ? इसके लिए नंबर एक पर आता है कि, परिवार के सभी सदस्य भलीभांति जानते, मानते और समझते हो कि, सही तरीके से पैसे कमाना क्या होता है ? और वह क्यों जरूरी है ? नंबर दो, अभी हमारे घर में जितने भी सदस्य कुछ न कुछ धंधा रोजगार कर रहे हैं, और इससे हमारे घर में जो भी कमाई हो रही है, इस कमाई को हम हमारी जरूरतों के हिसाब से हमें, कहा-कहा, कैसे और कितना खर्च करना है ? ये सुनिश्चित करें. और नंबर तीन, जो अति से भी अति आवश्यक है कि, अभी हमारी कमाई, यदि हमारी जरूरतों से बहुत ही कम हो रही हों, या फिर अभी हमारी जितनी भी जरूरतें हैं, इससे कई गुना अधिक हो रही हैं, फिर भी..... इनमें से कुछ रकम की बचत तो हमें करनी ही करनी है, क्योंकि कल किसीने नहीं देखा. साथ ही साथ हमें हमारे जीवन में यह बात को तो कभी भी नहीं भूलनी चाहिये कि, हमें जो चाहिए, जैसा चाहिए वो सिर्फ हमारी सोच है, या फिर वह हमारा सपना है, इसलिए अभी भले ही हम हमारी सोच को पाले, अपने सपने को सम्भाले, और वह जरूरी भी है, क्योंकि अच्छी और बड़ी ख़ाहिशे ही हमारी खुल के जीने की, जीवन में कुछ और बहतरीन से बहतरीन करने की उम्मीद को जिंदा रखती है, मगर...लेकिन...किंतु....परंतु बड़ा सोचने के साथ-साथ, सपने देखने के साथ-साथ, अभी के हमारे हालात को कभी भी..... नजर अंदाज न करें. फिर हम देखेंगे कि, हमारा समय हमें हमारे सपनों से भी अधिक प्रदान करेगा, इस के लिए हमें खुद पर, इश्वर पर और समय पर भी रखना है सिर्फ, धैर्य, संयम और विश्वास.
जरूरतें भले ही कम करनी पड़े, हमारे प्यार को न हम कम होने देंगे, क्योंकि जरूरतें तो हमारी तुम्हारी होती है, लेकिन प्यार..... वो तो हमारा है. - Shailesh Joshi -
मुसीबतें तकलीफें या गरीबी न सिर्फ कर्म का फल होती है, लेकिन वह कभी कभी हमारे जीवन की उन्नती की कल भी हो सकती है, और ऐसे हालात में से बहार निकलने के लिए, हर किसीके सामने दो रास्ते होते हैं एक होता है सही रास्ता, और दूसरा रास्ता होता है गलत रास्ता. हाँ सही रास्ता अक्सर कठिन होता है और गलत रास्ता फिलहाल आसान लगता है, मगर..... यदि हम कठिन रास्ता चुनते हैं तो हमारा आगे का रास्ता अपनेआप आसान होता जाता है, लेकिन जब हम अभी आसान रास्ता ( गलत ) चुनते हैं, तो हमारे जीवन के आगे के रास्ते न सिर्फ कठिन बनते जाते हैं, साथ ही साथ रास्ते कम, और हम अकेले और निस्सहाय भी होते जाते हैं.
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