झूठ में जीना भी अच्छा ही है
निभ जाते हैं रिश्ते वो जो
आपके अधिकार
की बात करते हैं जिस दिन
आपने सही मान लिया
और तलाश की उन रिश्तों
मे अपनेअधिकार की जो
यह कहते पाये गये
“मेरी हर एक चीज पर
मुझसे अधिक तुम्हारा अधिकार है ।”
कुछ हाथ नहीं लगेगा केवल
एक सच के अतिरिक्त कहीं कुछ
नहीं था कहीं कुछ नहीं है,,,,,,,,,
- Ruchi Dixit