"चाहे भीड़ में हो या अकेले, मेरे संभालने के लिए मैं खुद ही हूं...." न में किसी पर डिपेंड हो सकती हु न ही सेल्फ डिपेंडेंट बन पा रही हूं।
किस झूले में झूल रही हु पता नहीं ...कहते है ख्वाहिशें पंख देती है नई उड़ानों को... पर मेरी ख्वाहिशें मुझे पल पल कचोट-निचोड़ रही है, कमजोर कर रही है । काश ये मुझसे पहले मर जाए तो मुझे कुछ समय का सुकून मिले ।