आना कभी उस घाट पर,,, दिखायेंगे हम तुम्हे जहा कभी हम बैठा करते थे ।।,,,
वो वहां का नजारा,,, वहां की शांति और पक्षियो ं की मधुर आवाजे
जरा देखना उस सूरज की किरन को
वो पानी में दिखता हुआ उसका बिंब
ऐसा लगता हे जैसे कोई किसी को पल भर के लिए निहार रहा हो,,, ।।।।
और देखना उस पंछी को जो इक पल में मछली को अपनी चोंच में भर ले गया
वो लहर जो तुम्हारे कदमों को छुए कभी महसूस करना उस पानी को
वो घाट ओर उसपर रखी वो कुर्सी कभी बैठो तो महसूस करना उस हवा के झोंके को
आना कभी उस घाट पर दिखाएंगे हम तुम्हे जहा कभी हम बैठा करते थे,,,,, ।।।।।।।
Das Vijju,,,,,,
मुझे मारने को तरस रही है दुनिया।
जैसे बादल भी ना बरसे,
वैसे बरस रही है दुनिया।
आजकल कल का भूला रात को घर आ जाए
भूला ही कहां जाता है।
आंख से आंसू आ जाए तो,
दुख दर्द बड़ा ही जाता है।
दुख दर्द मिटाने को कोई आगे ना आए
मुझको ही मिटाना सब का निशाना होता जाए।
मुझे मिटाने को तरस रही है दुनिया